शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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पानीपत: आंगनबाड़ी में एक्सपायरी दूध से खीर बनाने और राशन गबन का आरोप, जांच शुरू

पानीपत के चाबरी कॉलोनी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को दिए जाने वाले राशन में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत सामने आई है।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
30 अक्टूबर 2026 को 11:06 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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पानीपत: आंगनबाड़ी में एक्सपायरी दूध से खीर बनाने और राशन गबन का आरोप, जांच शुरू
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •पानीपत के चाबरी कॉलोनी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के पोषण में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत।
  • •आरोप है कि बच्चों को परोसी जाने वाली खीर एक्सपायरी डेट के दूध से तैयार की जा रही थी।
  • •सहायिका के बयान के अनुसार, केंद्र की प्रभारी मैडम पर बच्चों के राशन के चावल के कई कट्टे गबन करने का इल्जाम।
  • •जिला कार्यक्रम अधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किए।
  • •प्रारंभिक जांच में एक्सपायरी दूध नहीं मिला, अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से ठोस सबूत प्रस्तुत करने को कहा।

हरियाणा के पानीपत जिले में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े एक संवेदनशील मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चाबरी कॉलोनी स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिनमें एक्सपायरी डेट के दूध से बच्चों के लिए खीर बनाने और उनके हिस्से के राशन, विशेषकर चावल, के गबन की शिकायतें शामिल हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) सीमा रोहिल्ला ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) सुमन को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं, जिससे इस पूरे प्रकरण की तह तक जाया जा सके।

यह मामला उस समय उजागर हुआ जब एक पार्षद प्रतिनिधि ने केंद्र में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों से शिकायत की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, केंद्र की एक सहायिका ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिनमें प्रभारी मैडम पर बच्चों के लिए आए पांच कट्टे चावल में से तीन कट्टे अपने घर ले जाने और कई दिनों से एक्सपायरी दूध का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इन आरोपों ने बच्चों के स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम

पार्षद प्रतिनिधि के माध्यम से सामने आई शिकायत के अनुसार, चाबरी कॉलोनी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही थी। केंद्र की सहायिका नरेश कुमारी ने कथित तौर पर बताया कि बच्चों के लिए आवंटित चावल के कुल पाँच कट्टे केंद्र में आए थे, जिनमें से तीन कट्टे केंद्र की इंचार्ज मैडम द्वारा अपने निजी उपयोग के लिए घर ले जाए गए, जबकि बच्चों के लिए मात्र दो कट्टे ही बचे। यह सीधा-सीधा बच्चों के अधिकार का हनन और सरकारी राशन का दुरुपयोग दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, सहायिका ने यह भी दावा किया कि पिछले कई दिनों से बच्चों के लिए बनाई जा रही खीर में एक्सपायरी डेट वाले दूध के पैकेटों का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह आरोप बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है, क्योंकि एक्सपायरी दूध का सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। इन गंभीर आरोपों के बाद स्थानीय समुदाय में रोष व्याप्त है और वे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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विवरणजानकारी
घटना स्थलचाबरी कॉलोनी आंगनबाड़ी केंद्र, पानीपत
मुख्य आरोपएक्सपायरी दूध से खीर बनाना, बच्चों के राशन (चावल) का गबन
कथित आरोपीकेंद्र की इंचार्ज मैडम (शिकायत के अनुसार)
शिकायतकर्ता (परोक्ष)सहायिका नरेश कुमारी (पार्षद प्रतिनिधि के माध्यम से)
जांच अधिकारीसीडीपीओ सुमन (जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देश पर)
वर्तमान स्थितिजांच जारी, शिकायतकर्ता से साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया

अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की भूमिका व बयान

मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला कार्यक्रम अधिकारी सीमा रोहिल्ला ने बिना किसी देरी के बाल विकास परियोजना अधिकारी सुमन को तत्काल जांच के आदेश दिए। निर्देशों के तहत, बुधवार को एक जांच टीम चाबरी कॉलोनी स्थित संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची। हालांकि, जांच टीम को एक अप्रत्याशित स्थिति का सामना करना पड़ा, जब शिकायतकर्ता बताई जा रही सहायिका नरेश कुमारी मौके पर उपस्थित नहीं मिलीं। वह दो दिन की छुट्टी पर थीं, जिससे प्रारंभिक पूछताछ में बाधा आई।

सीडीपीओ सुमन ने बताया कि केंद्र की इंचार्ज दिव्या से पूछताछ की गई, जिन्होंने जानकारी दी कि वह पिछले छह महीनों से 'विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) सर्वे' की ड्यूटी पर थीं। उनकी अनुपस्थिति में केंद्र की संपूर्ण जिम्मेदारी सहायिका संभाल रही थी। सीडीपीओ ने आगे बताया कि जांच के दौरान केंद्र में एक्सपायरी डेट वाले दूध का कोई पैकेट नहीं मिला, जिससे आरोपों की पुष्टि करना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं से दो दिनों के भीतर आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य उपलब्ध करवाने को कहा है।

"हमने आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया है और एक्सपायरी दूध के पैकेट नहीं मिले हैं। शिकायतकर्ताओं से दो दिन के भीतर अपने आरोपों के समर्थन में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया है। यदि शिकायत के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए जाते और शिकायत झूठी पाई जाती है, तो नियमानुसार संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।"

यह बयान मामले की संवेदनशीलता और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को दर्शाता है।

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव

इस प्रकार की शिकायतें सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों को प्रारंभिक पोषण और शिक्षा प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं, और यदि ऐसे केंद्रों में ही धांधली होती है, तो यह माता-पिता के विश्वास को ठेस पहुंचाता है। पानीपत जैसे क्षेत्रों में, जहां कई परिवार पोषण के लिए इन केंद्रों पर निर्भर करते हैं, राशन और दूध में गड़बड़ी की खबरें उन्हें चिंतित करती हैं। यह घटना सरकारी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में कोई भी बच्चों के हक पर डाका डालने की हिम्मत न करे। यह घटना न केवल चाबरी कॉलोनी, बल्कि पूरे पानीपत जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की समीक्षा की आवश्यकता को भी उजागर करती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों को उनका उचित पोषण और देखभाल मिले।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

जिला प्रशासन अब शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों का इंतजार कर रहा है। यदि साक्ष्य संतोषजनक पाए जाते हैं, तो आरोपों की पुष्टि के लिए आगे की विस्तृत जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें संबंधित स्टाफ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा भी शामिल हो सकता है। वहीं, यदि शिकायतें निराधार पाई जाती हैं, तो झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है, जैसा कि सीडीपीओ ने स्पष्ट किया है।

यह मामला सरकार की महिला एवं बाल विकास योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए एक चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में आपूर्ति श्रृंखला से लेकर वितरण तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह हो, ताकि गरीब और जरूरतमंद बच्चों को उनके पोषण के अधिकार से वंचित न किया जा सके। इस घटना के बाद, संभव है कि अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों में भी औचक निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया को तेज किया जाए।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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