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भिवानी: निगाना फीडर टूटने से 150 एकड़ धान जलमग्न, किसानों पर दोहरी मार; रबी की बिजाई पर भी संकट

भिवानी के बीरन गांव में निगाना फीडर टूटने से 150 एकड़ धान की तैयार फसल पानी में डूब गई। किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद, आगामी रबी सीजन की बिजाई भी अधर में।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
30 अक्टूबर 2026 को 10:57 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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भिवानी: निगाना फीडर टूटने से 150 एकड़ धान जलमग्न, किसानों पर दोहरी मार; रबी की बिजाई पर भी संकट
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •भिवानी के बीरन गांव में निगाना फीडर टूटने से लगभग 150 एकड़ धान की फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई।
  • •किसानों की पककर तैयार खड़ी और कटाई के बाद खेतों में पड़ी धान की फसल जलमग्न होने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
  • •खेतों में लंबे समय तक जलभराव के कारण आगामी रबी सीजन की गेहूं और अन्य फसलों की बिजाई भी गंभीर खतरे में पड़ गई है।
  • •ग्रामीणों और सरपंच प्रतिनिधि ने प्रशासन की बेरुखी पर सवाल उठाते हुए तुरंत पानी निकासी और प्रभावित किसानों को मुआवजे की मांग की है।

भिवानी जिले के बीरन गांव में निगाना फीडर के अचानक टूट जाने से किसानों पर विपदा का पहाड़ टूट पड़ा है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र के अन्नदाताओं की महीनों की कड़ी मेहनत को चंद घंटों में बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। फीडर से निकले अथाह पानी ने गांव के करीब 150 एकड़ धान की फसल को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश और निराशा व्याप्त है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब धान की फसल या तो कटाई के लिए तैयार खड़ी थी या कटाई के बाद खेतों में पड़ी थी, जिससे नुकसान की भयावहता और भी बढ़ गई है।

केवल धान की फसल का नुकसान ही एकमात्र चुनौती नहीं है, बल्कि खेतों में तालाबनुमा जलभराव ने आगामी रबी सीजन की बिजाई पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। किसानों को आशंका है कि पानी की निकासी न होने के कारण जमीन लंबे समय तक जलमग्न रहेगी, जिससे वे अगली फसल बोने से वंचित रह सकते हैं। इस दोहरी मार ने किसानों को आर्थिक संकट के साथ-साथ भविष्य की खेती को लेकर भी गहरी चिंता में डाल दिया है, और वे प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की गुहार लगा रहे हैं।

घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम

बीरन गांव के किसानों के अनुसार, निगाना फीडर में दरार आने के बाद पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही समय में खेतों में पानी भर गया। देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जलमग्न हो गई, और धान की फसल पानी में डूब गई। कई खेतों में धान की बालियां पककर कटाई का इंतजार कर रही थीं, जबकि कुछ अन्य खेतों में कटाई के बाद फसल सूखने के लिए पड़ी थी। दोनों ही परिस्थितियों में पानी में डूबने से फसल पूरी तरह से गलने और सड़ने लगी है, जिससे किसानों के सामने सालभर की मेहनत आंखों के सामने बर्बाद होते देखने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।

स्थानीय किसानों ने बताया कि पानी की मात्रा इतनी अधिक है कि खेतों में तालाब जैसी स्थिति बन गई है। कुछ किसान अपने स्तर पर मजदूरों को लगाकर थोड़ी-बहुत फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पानी का स्तर लगातार बढ़ने और निकासी के कोई प्रबंध न होने के कारण उनके प्रयास निष्फल साबित हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल वर्तमान फसल को नष्ट कर रही है, बल्कि जमीन की उर्वरता और बिजाई की क्षमता पर भी दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

तथ्यविवरण
प्रभावित जिलाभिवानी
प्रभावित गांवबीरन
घटनानिगाना फीडर का टूटना
प्रभावित फसलधान (Paddy)
अनुमानित नुकसानलगभग 150 एकड़ (किल्ला) फसल जलमग्न
तत्काल मांगेंपानी की त्वरित निकासी, उचित मुआवजा, विशेष गिरदावरी
आगामी खतरारबी सीजन की बिजाई पर संकट

अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की भूमिका व बयान

इस गंभीर संकट के बीच, किसानों ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन की बेरुखी और निष्क्रियता ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है। समय पर पानी की निकासी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। सरपंच प्रतिनिधि जोगेंद्र फौगाट ने इस मामले में प्रशासन और सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

जोगेंद्र फौगाट ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि इतनी बड़ी बर्बादी का जिम्मेदार कौन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है और यदि तत्काल समाधान नहीं हुआ तो किसान बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

सरपंच प्रतिनिधि जोगेंद्र फौगाट ने कहा, "करीब 150 से अधिक किल्ले धान की फसल पानी में डूब चुकी है, जिससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। खेतों में पानी भरा होने के कारण अगली फसल की बिजाई की उम्मीद भी खत्म होती जा रही है। प्रशासन को चाहिए कि बिना देरी किए पानी की निकासी का प्रबंध करे और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दे। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।"

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव

बीरन गांव और आसपास के क्षेत्र में निगाना फीडर टूटने का सीधा और गहरा असर स्थानीय जनजीवन पर पड़ा है। धान की फसल किसानों की साल भर की आय का मुख्य स्रोत होती है, और इसके बर्बाद होने से हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। छोटे किसान और खेतिहर मजदूर, जो फसल की कटाई और बुवाई पर निर्भर रहते हैं, उनकी आजीविका भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगी, जिससे स्थानीय बाजारों और व्यवसायों पर भी असर देखने को मिल सकता है।

पानी की निकासी में देरी और मुआवजे की अनिश्चितता ने किसानों में हताशा और आक्रोश को बढ़ाया है, जिससे सामाजिक अशांति की आशंका भी बढ़ गई है। यदि प्रशासन ने शीघ्र और प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो यह मुद्दा एक बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे कानून व्यवस्था के लिए भी चुनौती उत्पन्न हो सकती है। कृषि आधारित इस क्षेत्र में, खेती का बाधित होना एक बड़े सामाजिक और आर्थिक संकट का कारण बन सकता है।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में निगाना फीडर से आ रहे पानी को तुरंत रोकना, युद्धस्तर पर खेतों से पानी की निकासी करवाना, और खराब हुई फसल की विशेष गिरदावरी (फसल सर्वेक्षण) करवाकर प्रत्येक प्रभावित किसान को उचित मुआवजा देना शामिल है। किसानों का मानना है कि केवल सरकारी सहायता से ही वे इस भारी नुकसान से उबर पाएंगे और आगामी रबी सीजन की बिजाई के लिए तैयार हो सकेंगे। प्रशासन को चाहिए कि वह इस प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न स्थिति को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि किसानों का विश्वास बना रहे और वे अपनी आजीविका को फिर से पटरी पर ला सकें।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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