हरियाणा की प्राचीन और गौरवशाली संस्कृति को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देने की दिशा में राज्य प्रशासन ने एक बड़ा और दूरदर्शी प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रागैतिहासिक काल से जुड़ी लगभग 10 हजार साल पुरानी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने एक वृहद ऐतिहासिक कॉरिडोर के निर्माण का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य केंद्र सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित केंद्र राखीगढ़ी को बनाया जाएगा, जहां पुरातात्विक अनुसंधान और पर्यटन विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रदेश के पुरातात्विक परिदृश्य को सुदृढ़ करने के लिए तैयार की गई इस कार्ययोजना के तहत वर्ष 2031 तक राज्य में संरक्षित प्राचीन स्मारकों की मौजूदा संख्या 72 से बढ़ाकर 120 से अधिक करने का प्रशासनिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके क्रियान्वयन के लिए कुल 21 नए पुरातात्विक स्थलों की पहचान की गई है, जहां वैज्ञानिक पद्धति से खोदाई का कार्य संपन्न कराया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल प्राचीन इतिहास के अनछुए पहलुओं को उजागर करना है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी जड़ों को सुरक्षित रखना भी है।
चरणबद्ध खोदाई और सरस्वती-सिंधु विरासत कॉरिडोर का विस्तार
पुरातत्व विभाग के तय कार्यक्रम के अनुसार, इस अभियान के प्रथम चरण की शुरुआत वर्ष 2026-27 के दौरान हिसार जिले के ऐतिहासिक सीसवाल गांव से की जाएगी। सीसवाल सभ्यता अपनी विशिष्ट ग्रामीण संस्कृति और प्राचीन बस्तियों के लिए जानी जाती है, जिसके वैज्ञानिक अध्ययन से हरियाणा के शुरुआती मानव बस्तियों के रहन-सहन पर महत्वपूर्ण प्रकाश पड़ेगा। इसके साथ ही, सरस्वती-सिंधु सभ्यता के भौगोलिक दायरे में आने वाले प्रमुख स्थलों जैसे राखीगढ़ी, बनावली, कुनाल और बालू को एक साझा 'सरस्वती-सिंधु विरासत कॉरिडोर' के सूत्र में पिरोया जाएगा, जिससे इन सभी ऐतिहासिक स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच सुगम हो सकेगी।
| योजना का मुख्य पहलू | निर्दिष्ट स्थल / विवरण | लक्ष्य एवं समय-सीमा |
|---|---|---|
| पुरातात्विक खोदाई | हिसार का सीसवाल व 21 नए स्थल | प्रथम चरण 2026-27 |
| प्रमुख पर्यटन केंद्र | राखीगढ़ी | वैश्विक पुरातात्विक एवं पर्यटन हब |
| विरासत कॉरिडोर | राखीगढ़ी, बनावली, कुनाल, बालू | सरस्वती-सिंधु कॉरिडोर से जुड़ाव |
| संग्रहालय विकास | पंचकूला, राखीगढ़ी, कुरुक्षेत्र, झज्जर आदि | 6 नए संग्रहालय व 6 का नवीनीकरण |
संग्रहालयों का आधुनिकीकरण और ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण
ऐतिहासिक अवशेषों के वैज्ञानिक प्रदर्शन और पर्यटकों के आकर्षण को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे में भी व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत पानीपत, हिसार, जींद और पिंजौर समेत छह पुराने संग्रहालयों के भवनों का आधुनिकीकरण और नवीनीकरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पंचकूला, राखीगढ़ी, कुरुक्षेत्र और झज्जर जैसे सामरिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में छह बिल्कुल नए आधुनिक संग्रहालयों की स्थापना की जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर केवल बड़े स्थलों तक ही सीमित न रहकर, स्थानीय स्तर पर मौजूद ऐतिहासिक किलों, प्राचीन बावड़ियों, ऐतिहासिक मंदिरों और औपनिवेशिक काल यानी अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित पुराने पुलों की सुध लेने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इन सभी धरोहरों के जीर्णोद्धार के साथ-साथ आम नागरिकों, विशेषकर स्कूली विद्यार्थियों में अपने इतिहास के प्रति चेतना जगाने के लिए समय-समय पर हेरिटेज वॉक, सांस्कृतिक मेलों और शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
हरियाणा की प्राचीन और समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारी यह पहल न केवल हमारी आने वाली पीढ़ियों को गौरवशाली इतिहास से जोड़ेगी, बल्कि प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भी एक विशिष्ट पहचान दिलाएगी।
स्थानीय जनजीवन, संस्कृति और पर्यटन पर दूरगामी प्रभाव
इस वृहद ऐतिहासिक कॉरिडोर और संग्रहालय नेटवर्क के विकास से हरियाणा के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है। जब राखीगढ़ी और अन्य पुरातात्विक केंद्र वैश्विक पर्यटन सर्किट से जुड़ेंगे, तो स्थानीय स्तर पर होटल, हस्तशिल्प, गाइड सेवाओं और पारंपरिक खानपान के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा, क्षेत्रीय युवाओं में अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रति गर्व की भावना जागृत होगी, जो सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।





