हरियाणा सरकार ने अपने आधिकारिक विमानन बेड़े के प्रबंधन और तकनीकी रखरखाव को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के नागरिक उड्डयन विभाग ने राज्य के वीआईपी हेलीकॉप्टरों तथा विमानों के सुचारू संचालन, कलपुर्जों के रख-रखाव और क्रू प्रबंधन को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस व्यवस्था के लागू होने से सरकारी उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि अब हर छोटी-बड़ी तकनीकी गतिविधि का रिकॉर्ड एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।
राज्य में लंबे समय से सरकारी विमानों और हेलीकॉप्टरों के रख-रखाव से जुड़े दस्तावेज कागजी तौर पर मेंटेन किए जाते रहे हैं, जिसमें मानवीय भूल या डेटा मिलान में कई तरह की व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस नई पहल के तहत विमानों के इंजनों, विभिन्न तकनीकी घटकों, स्पेयर पार्ट्स की स्थिति और उनकी निर्धारित जीवन अवधि की ऑटोमेटेड निगरानी की जाएगी। इससे समय पर मेंटेनेंस की योजना तैयार करने और किसी भी संभावित तकनीकी बाधा को पहले ही भांपने में भारी मदद मिलेगी।
| प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था | प्रमुख विशेषता एवं उद्देश्य | वर्तमान स्थिति / कदम |
|---|---|---|
| विमान मेंटेनेंस ट्रैकिंग | इंजन, पार्ट्स और घटकों की उम्र व स्थिति की डिजिटल निगरानी | निविदा (टेंडर) प्रक्रिया शुरू |
| क्रू व पायलट प्रबंधन | उड़ान समय, ड्यूटी घंटे और अनिवार्य विश्राम अवधि का रिकॉर्ड | सॉफ्टवेयर आधारित अलर्ट प्रणाली |
| डीजीसीए अनुपालन | सुरक्षा मानकों और नागरिक उड्डयन नियमों का कड़ाई से पालन | डेटा सुरक्षा और बैकअप सुनिश्चित |
| प्रशासनिक नियंत्रण | हरियाणा सरकार का स्वामित्व और सुरक्षित डेटा बैकअप | क्रियान्वयन की तैयारी जारी |
पायलटों की कार्य अवधि और विश्राम समय पर रहेगी कड़ाई से नजर
विमानन सुरक्षा के लिहाज से चालक दल यानी पायलटों की फिटनेस और मानसिक विश्राम अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू होता है। प्रस्तावित अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर के माध्यम से पायलटों के उड़ान भरने के कुल समय, लगातार ड्यूटी की अवधि और उनके अनिवार्य विश्राम अंतराल का पूरा लेखा-जोखा डिजिटल रूप में दर्ज किया जाएगा। यदि किसी पायलट की ड्यूटी तय सुरक्षा सीमाओं के करीब पहुंचती है या नियमों के दायरे से बाहर जाने की कोई भी संभावना बनती है, तो यह आधुनिक सिस्टम संबंधित अधिकारियों को पहले से ही सचेत (अलर्ट) कर देगा।
इसके अलावा, पायलटों की आकस्मिक छुट्टियों, ऑन-कॉल ड्यूटियों और संपूर्ण क्रू शेड्यूलिंग का प्रबंधन भी अब इसी डिजिटल तंत्र के जरिए संचालित किया जाएगा। इस पारदर्शी प्रणाली के आ जाने से विभाग के पास उपलब्ध मानव संसाधन और क्रू की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करना बेहद आसान हो जाएगा। डीजीसीए यानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा तय किए गए सुरक्षा और परिचालन संबंधी तमाम दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने में भी यह तकनीक मील का पत्थर साबित होगी।
डेटा सुरक्षा और विभाग की भावी कार्यप्रणाली
इस पूरी डिजिटल व्यवस्था में सुरक्षा और डेटा की गोपनीयता को सर्वोपरि रखा गया है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि विमानन बेड़े से जुड़ा समस्त डिजिटल डेटा हरियाणा सरकार के स्वामित्व में रहेगा और इसका एक सुरक्षित बैकअप भी तैयार किया जाएगा ताकि तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में भी जानकारी सुरक्षित बनी रहे। फिलहाल, नागरिक उड्डयन विभाग ने इस उन्नत सॉफ्टवेयर की खरीद और उसे धरातल पर उतारने के लिए निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है, जिसके जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है।





