हरियाणा में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच कचरे के पहाड़ अब केवल विकट समस्या बनकर नहीं रहेंगे, बल्कि इनसे स्वच्छ ऊर्जा और मूल्यवान संसाधन तैयार किए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता अभियानों को नया आयाम देते हुए चार प्रमुख जिलों में विशालकाय वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर मुहर लग चुकी है, जिससे आगामी वर्षों में राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत शहरों से निकलने वाले कचरे को रिसाइकिल करके बिजली का उत्पादन किया जाएगा, जिससे लैंडफिल साइट्स पर बढ़ते दबाव से भी निजात मिलेगी।
राज्य में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में यह अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। योजना के अनुसार, इन चारों प्लांटों में हर दिन लगभग 5,000 टन ठोस कचरे को अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रोसेस किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के परिणामस्वूप कुल 50 मेगावाट विद्युत ऊर्जा का सृजन होगा। इस परियोजना का खाका इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह न केवल स्थानीय निकायों के कचरे का स्थायी समाधान देगा, बल्कि राज्य को हरित ऊर्जा की ओर भी अग्रसर करेगा। सरकार ने इन सभी चारों परियोजनाओं को अक्टूबर 2028 तक पूरी क्षमता के साथ धरातल पर उतारने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया है।
चारों प्रमुख प्लांटों की रूपरेखा और क्षमता का विवरण
| परियोजना / कलस्टर | शामिल क्षेत्र / निकाय | दैनिक कचरा प्रसंस्करण क्षमता | उत्पादित होने वाली ऊर्जा |
|---|---|---|---|
| गुरुग्राम प्लांट | गुरुग्राम महानगर क्षेत्र | सर्वोच्च क्षमता आधारित (सबसे बड़ा प्लांट) | निर्धारित क्लस्टर लक्ष्य का हिस्सा |
| हिसार क्लस्टर | हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद | संयुक्त शहरी निकायों का कुल कचरा | कुल 50 मेगावाट उत्पादन में शामिल |
| अन्य दो क्लस्टर प्लांट | संबंधित निर्धारित जोन | वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत तय मात्रा | ऊर्जा ग्रिड को आपूर्ति हेतु |
| कुल योग | चारों प्लांट | प्रतिदिन लगभग 5,000 टन | कुल 50 मेगावाट बिजली |
इन प्रस्तावित संयंत्रों में सबसे बड़ा प्लांट गुरुग्राम जिले में स्थापित किया जाएगा, जो अत्यधिक घनत्व वाले इस क्षेत्र के कचरे को संभालेगा। इसके अलावा हिसार क्लस्टर के अंतर्गत हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद जिलों के शहरी स्थानीय निकायों के कचरे को एक साथ समेकित करके प्रोसेस किया जाएगा। इस विकेंद्रीकृत लेकिन समन्वित मॉडल से न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि छोटे शहरों को भी कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा मिल सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि कचरे को ऊर्जा में बदलने की यह तकनीक दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने इस पूरी योजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के मूर्त रूप लेने से कचरा प्रबंधन की पुरानी और पारंपरिक बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि इससे शहरी क्षेत्रों में बरसों से विकराल होती जा रही सफाई संबंधी समस्याओं का सहज ही समाधान निकल आएगा। सरकार का यह भी प्रयास है कि कूड़ा उठान की पूरी व्यवस्था को डिजिटल तकनीक और सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाए, ताकि यह मॉनिटर किया जा सके कि किस घर से कचरा उठाया गया है और कहां लापरवाही बरती जा रही है। इसके साथ ही, राज्य के 87 में से 84 शहरी निकायों में घर-घर से कचरा उठाने के अनुबंध पहले ही दिए जा चुके हैं, जो इस व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाएंगे।
“इन मेगा परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल हमारे शहरों को कचरे के ढेरों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर पर्यावरण-अनुकूल बिजली का उत्पादन भी होगा। सरकार स्वच्छता और संसाधनों के पुनर्चक्रण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और तय समयसीमा के भीतर इन सभी प्लांट्स का काम पूरा कर लिया जाएगा।” - विपुल गोयल, शहरी निकाय मंत्री, हरियाणा सरकार
नागरिकों के जीवन पर प्रभाव और स्वच्छता तंत्र का आधुनिकीकरण
इस वृहद पहल का सीधा असर हरियाणा के आम जनजीवन और शहरी परिवेश पर पड़ेगा। अब तक शहरी क्षेत्रों में कचरे के खुले में ढेर लगना और उनके कारण फैलने वाली बीमारियां स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय थीं। इन आधुनिक बिजली संयंत्रों के शुरू होने से न केवल रिहायशी इलाकों के आसपास स्वच्छता का स्तर सुधरेगा, बल्कि मक्खी-मच्छरों और दूषित वायु से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा कूड़ा उठान प्रक्रिया में डिजिटल ट्रैकिंग शुरू किए जाने से मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होगी, जिससे नागरिकों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
प्रशासनिक और तकनीकी मोर्चे पर इन प्लांट्स की सफलता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को कड़ा किया जा रहा है। स्थानीय निकाय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार विभिन्न जिलों के नगर निगमों के संपर्क में हैं ताकि भूमि आवंटन, पर्यावरण स्वीकृतियों और अन्य वैधानिक औपचारिकताओं को समय पर पूरा किया जा सके। जानकारों का मानना है कि इस तरह के मॉडल यदि पूरी क्षमता से लागू होते हैं, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी कचरा प्रबंधन का एक बेहतरीन उदाहरण बन सकते हैं। हरियाणा सरकार का यह कदम आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से राज्य के भविष्य को सुदृढ़ करने वाला साबित होगा।





