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हरियाणा में बिजली निजीकरण पर घमासान: गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की मांग, इंजीनियरों ने दी आंदोलन की चेतावनी

हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण पर विवाद गहराया। पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी के पैरेलल लाइसेंस को रद्द करने की मांग करते हुए सीएम।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
23 अक्टूबर 2026 को 10:27 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा में बिजली निजीकरण पर घमासान: गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की मांग, इंजीनियरों ने दी आंदोलन की चेतावनी
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली वितरण लाइसेंस का कड़ा विरोध किया है।
  • •इंजीनियरों ने इलेवन पावर कंपनी की पात्रता और तकनीकी क्षमता पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
  • •हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के फैसले को निजीकरण को बढ़ावा देने वाला और जनविरोधी बताया गया।
  • •इंजीनियर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि फैसला नहीं बदला गया तो प्रदेशव्यापी हड़ताल और विरोध तेज होगा।

हरियाणा के बिजली क्षेत्र में निजीकरण की आहट ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) और हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी को दिए गए 'समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस' (Parallel Distribution License) को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। चंडीगढ़ में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान फेडरेशन के चेयरमैन इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों का प्रवेश न केवल सरकारी वितरण निगमों (Discoms) की वित्तीय स्थिति को कमजोर करेगा, बल्कि भविष्य में आम उपभोक्ताओं पर भी भारी बोझ डालेगा।

विद्युत नियामक आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) की भूमिका पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग द्वारा इलेवन पावर कंपनी को गुरुग्राम और नूंह जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली वितरण का लाइसेंस देना कई विसंगतियों को दर्शाता है। फेडरेशन का तर्क है कि जिस कंपनी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसके अनुभव, तकनीकी बुनियादी ढांचे और वित्तीय निवेश की क्षमता का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाना चाहिए। इंजीनियरों का मानना है कि निजी कंपनियां केवल उन क्षेत्रों को लक्षित कर रही हैं जहाँ से राजस्व अधिक मिलता है (Cream Skimming), जिससे सरकारी बिजली निगमों के पास केवल कम राजस्व वाले ग्रामीण और कृषि क्षेत्र रह जाएंगे।

प्रमुख बिंदुविवरण
विवादित क्षेत्रगुरुग्राम और नूंह (हरियाणा)
निजी पक्षकारइलेवन पावर कंपनी (Eleven Power Company)
नियामक संस्थाहरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC)
मुख्य विरोधकर्ताऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF)
कानूनी आधारविद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत हस्तक्षेप की मांग
संभावित प्रभावसरकारी बिजली निगमों के राजस्व में भारी कमी

निजीकरण से सरकारी खजाने और जनहित को खतरा

हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर रविंदर सिंह घनघस ने इस मुद्दे के तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी इस तरह का पैरेलल लाइसेंस देने का उदाहरण नहीं मिलता। निजी कंपनियां मुख्य रूप से औद्योगिक उपभोक्ताओं को अपने पाले में करने की योजना बना रही हैं। यदि बड़े औद्योगिक उपभोक्ता सरकारी ग्रिड से हटकर निजी वितरण प्रणाली पर चले जाते हैं, तो सरकारी निगमों (UHBVN और DHBVN) का रेवेन्यू बुरी तरह प्रभावित होगा। इसका सीधा असर प्रदेश के विकास कार्यों, बिजली लाइनों के रखरखाव और नई परियोजनाओं पर पड़ेगा।

"सरकार का APTEL में अपील करना केवल समय बिताने और मामले को लटकाने की रणनीति (Eye-wash) जैसा प्रतीत होता है। मुख्यमंत्री को कैबिनेट की बैठक बुलाकर नीतिगत निर्णय लेना चाहिए कि हरियाणा में निजीकरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि सरकार धारा 108 का उपयोग कर इस लाइसेंस को निरस्त करती है, तो यह किसानों और आम जनता के हित में एक बड़ा कदम होगा।" - इंजीनियर रविंदर सिंह घनघस, महासचिव, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन

औद्योगिक और सार्वजनिक सेवाओं पर बिजली संकट का साया

बिजली क्षेत्र में चल रही इस खींचतान का असर पहले ही धरातल पर दिखने लगा है। हाल के दिनों में कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में बिजली गुल होने से मरीजों का इलाज मोबाइल टॉर्च की रोशनी में करना पड़ा, जो व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। वहीं, गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों में भी बिजली कटौती से करोड़ों रुपये के नुकसान की खबरें आ रही हैं। इंजीनियरों का कहना है कि यदि सरकार ने निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए, तो कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ेगा, जिससे बिजली आपूर्ति की स्थिरता पर और भी बुरा असर पड़ सकता है।

आगामी रणनीति और हड़ताल की चेतावनी

पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने साफ कर दिया है कि उनकी लड़ाई केवल कर्मचारियों के हितों के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए भी है। उन्होंने मांग की है कि लाइसेंसिंग प्रक्रिया की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि किसी भी प्रकार की मिलीभगत या भ्रष्टाचार की संभावना को खत्म किया जा सके। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो बिजली कर्मचारी और इंजीनियर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे और प्रदेशव्यापी हड़ताल के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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