हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश में बिजली वितरण तंत्र के कथित निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोला है। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ताधारी दल सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर कर चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों के हित साधने में जुटा है। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों का अनियंत्रित प्रवेश आम उपभोक्ताओं, अन्नदाताओं और कमजोर तबके के लोगों की जेब पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डालेगा।
नेता प्रतिपक्ष ने विशेष रूप से गुरुग्राम और नूंह जिले के बिजली वितरण ढांचे में बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड नामक निजी प्रतिष्ठान को समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस जारी करना सार्वजनिक क्षेत्र के दक्षिणांचल बिजली वितरण निगम (DHBVN) की वित्तीय नींव को हिलाकर रख देगा। हुड्डा के अनुसार, सार्वजनिक सेवाओं का बाजारीकरण करने से राज्य के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर दूरगामी और प्रतिकूल प्रभाव पड़ेंगे।
गुरुग्राम सर्किल से निगम का राजस्व और समानांतर लाइसेंस का विवाद
प्रेस वार्ता के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सांख्यिकीय तर्कों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने रेखांकित किया कि दक्षिणांचल हरियाणा बिजली वितरण निगम को अपनी कुल आमदनी का करीब 33 फीसदी यानी लगभग एक-तिहाई राजस्व अकेले साइबर सिटी गुरुग्राम से प्राप्त होता है। जब सबसे अधिक मुनाफा देने वाले औद्योगिक और कॉरपोरेट उपभोक्ताओं के क्षेत्र निजी कंपनी को सौंप दिए जाएंगे, तो सरकारी बिजली निगम के पास केवल घाटे वाले या कम राजस्व वाले क्षेत्र ही शेष रह जाएंगे।
हुड्डा ने आशंका व्यक्त की कि मुनाफा कमाने वाली निजी कंपनियां केवल बड़े शॉपिंग मॉल्स, बहुमंजिला सोसायटियों और बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक अपनी निर्बाध आपूर्ति सीमित रखेंगी। इससे राज्य के सरकारी निगम की वित्तीय स्थिति पूरी तरह चरमरा जाएगी और वह भविष्य में आत्मनिर्भर रहकर ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में निर्बाध आपूर्ति देने में असमर्थ हो जाएगा।
| संबंधित विषय | निर्णय व हुड्डा द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु | प्रशासनिक व आर्थिक निहितार्थ |
|---|---|---|
| निजी कंपनी को लाइसेंस | इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम व नूंह में वितरण अधिकार | सरकारी तंत्र के समानांतर निजी एकाधिकार का खतरा |
| राजस्व संतुलन | डीएचबीविएन का 33% राजस्व अकेले गुरुग्राम औद्योगिक क्षेत्र से | सार्वजनिक निगम की आर्थिक रीढ़ टूटने की प्रबल आशंका |
| कृषि क्षेत्र पर असर | एग्री डिस्कॉम को पृथक कर सब्सिडी कम करने का अंदेशा | किसानों को सस्ती दर (10 पैसे यूनिट जैसी राहत) खोने का डर |
| कर्मचारी सुरक्षा | बिजली निगम के तकनीकी कर्मियों व अभियंताओं का आंदोलन | भविष्य में नियमित पदों में कटौती व छंटनी की तलवार |
कृषि डिस्कॉम को अलग करने की योजना पर जताई गहरी चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा करार देते हुए कहा कि ग्रामीण उपभोक्ताओं और खेती-किसानी के लिए अलग एग्री डिस्कॉम तैयार करने के पीछे गहरी मंशा छिपी है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान अन्नदाताओं को नलकूपों के लिए 10 पैसे प्रति यूनिट जैसी न्यूनतम और रियायती दरों पर बिजली मुहैया कराई जाती थी। वर्तमान नीति का अंतिम उद्देश्य कृषि क्षेत्र पर दी जा रही क्रॉस-सब्सिडी को धीरे-धीरे खत्म करना है।
हुड्डा ने कहा कि यदि सरकारी डिस्कॉम के पास औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाला अतिरिक्त राजस्व नहीं रहेगा, तो वह घाटा सहकर किसानों को सस्ती बिजली कैसे उपलब्ध करा पाएगा। परिणामस्वरूप, कृषि लागत में अभूतपूर्व उछाल आएगा और ग्रामीण अंचल के सामान्य उपभोक्ता महंगी दरों की चक्की में पिसने को मजबूर हो जाएंगे।
"सरकारी निगमों के सबसे अधिक मुनाफा देने वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपना जनहित के विरुद्ध है। मुनाफे का निजीकरण और घाटे का सरकारीकरण करने वाली इस नीति से अंततः राज्य का किसान, गरीब और बिजली कर्मचारी ही प्रभावित होगा।" - भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष
बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन और संभावित संकट
निजीकरण के इस फैसले के विरोध में प्रदेशभर के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष पूरी मजबूती से कर्मचारियों के साथ खड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तकनीकी रूप से दक्ष और अनुभवी कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी की गई, तो ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक अस्थिरता पैदा हो सकती है। निजीकरण के बाद आउटसोर्सिंग बढ़ेगी और स्थायी रोजगार के अवसरों में भारी गिरावट आएगी।
उन्होंने कहा कि जब लाभप्रद शहरी इलाकों से मिलने वाला राजस्व सरकारी खजाने में नहीं आएगा, तो देहात के दूरदराज के गांवों, ढाणियों और साधारण बस्तियों में बुनियादी ढांचे का रखरखाव करना निगम के लिए असंभव हो जाएगा। इससे ग्रामीण हरियाणा में बिजली कटौती का नया संकट खड़ा हो सकता है, जिससे लाखों परिवारों का दैनिक जीवन प्रभावित होगा।
विपक्ष का आगामी रुख और नीतिगत बदलाव की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से मांग की कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए समानांतर लाइसेंस देने की इस प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाए। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि सरकार ने इस नीति को वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक पूरी ताकत से उठाएगी। बिजली जैसे मूलभूत अधिकार को मुनाफा कमाने वाली कंपनियों के हवाले करने के कदम पर पुनर्विचार करने के लिए सरकार पर जनदबाव बनाया जाएगा।





