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अमृतसर-जामनगर आर्थिक गलियारा: हरियाणा सहित 4 राज्यों में बदलेगी यात्रा की तस्वीर, दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद

अमृतसर-जामनगर आर्थिक गलियारा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात को जोड़ेगा। 1257 किमी का यह 6-लेन एक्सप्रेसवे 80 हजार करोड़ की लागत से दिसंबर तक पूरा होगा, जिससे।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
24 अक्टूबर 2026 को 02:17 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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अमृतसर-जामनगर आर्थिक गलियारा: हरियाणा सहित 4 राज्यों में बदलेगी यात्रा की तस्वीर, दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •1257 किलोमीटर लंबा अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे चार राज्यों - गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब को जोड़ेगा।
  • •लगभग 80 हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह 6-लेन आर्थिक गलियारा दिसंबर 2024 तक पूरी तरह चालू होने की संभावना है।
  • •यह एक्सप्रेसवे अमृतसर से जामनगर तक की 22 घंटे की यात्रा को घटाकर मात्र 13 घंटे कर देगा, दिल्ली से जामनगर का सफर भी 16 घंटे में संभव होगा।
  • •हरियाणा में 85 किलोमीटर का हिस्सा मंडी डबवाली से चौटाला गांव तक फैला है, जो राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को गति देगा।
  • •यह कॉरिडोर गुजरात के कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों से सीधा जुड़ाव प्रदान कर लॉजिस्टिक्स लागत घटाएगा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा।

भारत में आधुनिक राजमार्गों का जाल देश के विभिन्न हिस्सों को निकट ला रहा है, जिससे यात्रा के समय में अभूतपूर्व कमी आ रही है। इसी कड़ी में, पंजाब के अमृतसर से गुजरात के जामनगर तक निर्मित किया जा रहा 1257 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा अब अपने अंतिम चरण में है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना हरियाणा समेत चार प्रमुख राज्यों को सीधे जोड़ेगी, जिससे सड़क मार्ग से होने वाली यात्रा में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। वर्तमान में 22 घंटे का यह लंबा सफर मात्र 13 घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जो सड़क परिवहन के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

लगभग 80 हजार करोड़ रुपये की विशाल लागत से तैयार किया जा रहा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब से होकर गुजरेगा। इस कॉरिडोर का सामरिक महत्व भी अत्यधिक है, क्योंकि जामनगर और अमृतसर दोनों ही सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित हैं। दिल्ली से भी इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से जामनगर तक केवल 16 घंटे में पहुंचा जा सकेगा, जबकि वर्तमान में इस दूरी को तय करने में करीब 26 घंटे लगते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की देखरेख में चल रहे इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य इस साल दिसंबर तक हरियाणा, पंजाब और गुजरात के शेष हिस्सों को वाहनों के लिए खोलना है।

परियोजना का विस्तृत विवरण और महत्व

अमृतसर-जामनगर आर्थिक गलियारा भारत की लॉजिस्टिक्स और व्यापार क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1257 किलोमीटर की यह विशाल दूरी छह लेन वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य उत्तरी भारत को सीधे गुजरात के महत्वपूर्ण कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों से जोड़ना है। यह जुड़ाव व्यापारिक गतिविधियों के लिए माल ढुलाई की लागत और समय को काफी कम करेगा, जिससे आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह कॉरिडोर बाड़मेर रिफाइनरी से भी सीधा संपर्क स्थापित करेगा, जो ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है।

यह एक्सप्रेसवे केवल व्यापारिक मार्गों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान, गुजरात और पंजाब के पर्यटन क्षेत्रों के लिए भी एक नई राह खोलेगा। तेज और सुगम कनेक्टिविटी पर्यटकों को इन राज्यों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों तक आसानी से पहुंचने में मदद करेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। कुल 917 किलोमीटर का हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया गया है, जिसका अर्थ है कि यह पूरी तरह से नए संरेखण पर बनाया गया है, जिससे भूमि अधिग्रहण और निर्माण में दक्षता सुनिश्चित हुई है।

विशेषताविवरण
परियोजना का नामअमृतसर-जामनगर आर्थिक गलियारा (NH-754A)
कुल लंबाई1257 किलोमीटर
लेन की संख्या6 लेन
अनुमानित लागतलगभग 80,000 करोड़ रुपये
जुड़ने वाले राज्यगुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब
वर्तमान यात्रा समय (अमृतसर-जामनगर)लगभग 22 घंटे
नया यात्रा समय (अमृतसर-जामनगर)लगभग 13 घंटे
दिल्ली-जामनगर यात्रा समयलगभग 16 घंटे (वर्तमान 26 घंटे)
अपेक्षित पूर्णतादिसंबर 2024
अनुमत गति सीमा120 किलोमीटर प्रति घंटा

मार्ग और कनेक्टिविटी: हरियाणा की अहम भूमिका

इस एक्सप्रेसवे का मुख्य मार्ग जामनगर से शुरू होकर सिरसा, जोधपुर-बाड़मेर होते हुए अमृतसर तक पहुंचता है। हरियाणा इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा है, जहां 85 किलोमीटर का मार्ग पंजाब सीमा के मंडी डबवाली से चौटाला गांव तक फैला हुआ है। यह हरियाणा के पश्चिमी हिस्सों को सीधे राजस्थान और गुजरात से जोड़ेगा, जिससे स्थानीय उद्योगों और कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार खुलेंगे। राजस्थान में इस हाईवे का सबसे बड़ा हिस्सा है, जो 637 किलोमीटर लंबा है और हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, सांचौर और जालोर जैसे महत्वपूर्ण शहरों से गुजरता है। राजस्थान का यह हिस्सा पहले ही पूरी तरह से चालू हो चुका है।

दिल्ली से इस एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए कई विकल्प उपलब्ध होंगे। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के माध्यम से इसे सीधे अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। इसके अतिरिक्त, दिल्ली में KMP (वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे) या NH-44 के रास्ते रोहतक होते हुए ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे का उपयोग किया जा सकता है, जहां से सिरसा-डबवाली इंटरचेंज के माध्यम से अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे पर पहुंचा जा सकता है। भविष्य में, निर्माणाधीन दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे भी पंजाब के संगरूर-मोगा के पास लुधियाना-बठिंडा एक्सप्रेसवे लिंक से इस कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे राष्ट्रीय राजधानी की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। पंजाब में 155 किलोमीटर का हिस्सा टिब्बा गांव से मोगा, धरमकोट, बठिंडा से होकर संगत कलां तक है, जबकि गुजरात में 380 किलोमीटर का हिस्सा थराद, वासरदा, राधनपुर, संतलपुर, मालिया के रास्ते जामनगर तक जाता है।

अधिकारियों की भूमिका और आगामी कदम

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस परियोजना के क्रियान्वयन में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। NHAI ने पहले ही इस एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों को वाहनों के लिए खोल दिया है, जिसमें गुजरात सीमा तक 27 किलोमीटर का देवगढ़ खंड और गुरुग्राम सेक्शन शामिल है। यह आंशिक उद्घाटन परियोजना के लाभों को चरणबद्ध तरीके से जनता तक पहुंचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ समय पर पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दिसंबर 2024 की समय-सीमा को पूरा करने के लिए निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे जल्द ही पूरे कॉरिडोर का लाभ देश के नागरिकों को मिल सके।

एक NHAI अधिकारी ने 'दैनिक रियलिटी' को बताया, "अमृतसर-जामनगर आर्थिक गलियारा भारत की ढांचागत प्रगति का प्रतीक है। यह न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि देश के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के बीच व्यापार, पर्यटन और सामरिक जुड़ाव को भी मजबूत करेगा। हम दिसंबर तक परियोजना को पूरी तरह से चालू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

स्थानीय जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस कॉरिडोर का स्थानीय जनजीवन, विशेषकर हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और गुजरात के निवासियों पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हरियाणा के सिरसा और आसपास के क्षेत्रों को सीधे पश्चिमी भारत के औद्योगिक और बंदरगाह शहरों से जुड़ने का लाभ मिलेगा, जिससे कृषि उत्पादों और निर्मित वस्तुओं के परिवहन में लगने वाला समय और लागत कम होगी। यह नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित कर सकता है और रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। व्यापारियों और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के लिए यह कॉरिडोर एक गेम चेंजर साबित होगा, क्योंकि इससे माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी और व्यापार की लागत कम होगी।

इसके अलावा, तेज गति वाले इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जिससे लंबी दूरी की यात्राएं अधिक आरामदायक और कम समय लेने वाली होंगी। यह न केवल लोगों के व्यापारिक दौरों को आसान बनाएगा बल्कि पारिवारिक यात्राओं और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। यह कॉरिडोर देश की अर्थव्यवस्था को गति देने, क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने और विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य के निहितार्थ

परियोजना के शेष हिस्सों को दिसंबर तक चालू करने के लिए NHAI और संबंधित राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। इसमें भूमि अधिग्रहण से संबंधित छोटे-मोटे मुद्दों को सुलझाना और निर्माण कार्य में तेजी लाना शामिल है। एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद, इस कॉरिडोर के रखरखाव और संचालन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जाएगा, ताकि इसकी दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके। यह परियोजना भारत के 'गति शक्ति' मास्टर प्लान का एक अभिन्न अंग है, जिसका उद्देश्य देश में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है।

अमृतसर-जामनगर आर्थिक गलियारा केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत के आर्थिक एकीकरण और रणनीतिक मजबूती का प्रतीक है। यह देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों के बीच एक मजबूत आर्थिक सेतु का निर्माण करेगा, जिससे व्यापार, उद्योग और पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। आने वाले वर्षों में, इस कॉरिडोर का प्रभाव देश की समग्र आर्थिक वृद्धि और विकास पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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