कुरुक्षेत्र जिले के धुराला गांव में एक किसान द्वारा अपने खेत में बिजली के खंभे लगाने के विरोध में आत्मदाह का प्रयास करने के बाद गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। जगपाल सिंह नामक इस किसान ने खुद को आग लगा ली थी और अब वह शहर के एक निजी अस्पताल के सघन चिकित्सा इकाई (ICU) में जीवन-मौत की जंग लड़ रहा है। इस दर्दनाक घटना के बाद, बिजली निगम ने भी किसान के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की मांग की है, जिससे मामले की जटिलता बढ़ गई है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब जगपाल सिंह की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और डॉक्टरों ने अगले 72 घंटे उनके लिए महत्वपूर्ण बताए हैं। एक ओर जहां परिवार किसान के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बिजली निगम की शिकायत ने परिवार के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। पुलिस अब दोनों पक्षों की शिकायतों की गहनता से जांच कर रही है, जिसमें यह पता लगाना है कि आखिर किन परिस्थितियों में किसान को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा और क्या नियमों का पालन किया गया था।
खेत में बिजली खंभों को लेकर गहराया विवाद: आत्मदाह और आरोप-प्रत्यारोप
यह पूरा विवाद धुराला गांव में किसान जगपाल सिंह के खेत में बिजली के खंभे लगाने को लेकर शुरू हुआ। जगपाल के भाई रमेश कुमार के अनुसार, उनके खेत में पहले ही चार बिजली के खंभे लगे हुए थे। पड़ोसी चरणजीत सिंह के घर तक बिजली लाइन पहुंचाने के लिए तीन और खंभे लगाए जाने थे, जिसका जगपाल लगातार विरोध कर रहा था। परिवार का कहना है कि इन खंभों से खेती करने में भारी परेशानी होती, क्योंकि जगपाल के हिस्से में करीब आधा एकड़ जमीन ही आती है। रमेश ने आरोप लगाया है कि पड़ोसी ने बिजली निगम के सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) और जूनियर इंजीनियर (JE) के साथ मिलीभगत करके ये खंभे लगवाए।
मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि यह विवाद पिछले लगभग छह महीनों से अदालत में विचाराधीन है। परिवार के मुताबिक, इस संबंध में कोर्ट में एक केस दायर किया गया था, जिसकी अगली सुनवाई 4 नवंबर को निर्धारित है। इसके बावजूद, बिजली निगम की टीम कथित तौर पर खंभे लगाने के लिए खेत में पहुंच गई। जगपाल ने काम रोकने का भरसक प्रयास किया, लेकिन जब उसकी बात नहीं सुनी गई, तो उसने पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगा ली। परिवार का यह भी आरोप है कि जगपाल द्वारा आत्मदाह का प्रयास करने के बाद भी खंभे लगाने का काम जारी रहा और बिजली लाइन पड़ोसी के घर तक पहुंचा दी गई। इस घटना के दौरान जगपाल को बचाने की कोशिश में उनकी बहन प्रीतो के हाथ भी बुरी तरह झुलस गए। डॉक्टरों के अनुसार, जगपाल के शरीर का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा आग से झुलस गया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| घटना स्थल | धुराला गांव, कुरुक्षेत्र जिला, हरियाणा |
| प्रभावित किसान | जगपाल सिंह |
| घटना का कारण | खेत में अतिरिक्त बिजली खंभे लगाने का विरोध |
| वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति | निजी अस्पताल के ICU में गंभीर, सांस लेने में तकलीफ, 35-40% झुलसा |
| परिवार का आरोप | बिजली निगम अधिकारियों की पड़ोसी से मिलीभगत, सरकारी काम रोकने का झूठा आरोप |
| बिजली निगम का आरोप | जगपाल सिंह द्वारा सरकारी कार्य में बाधा डालना |
| अदालती मामले की स्थिति | विवाद पर 6 महीने से कोर्ट में केस, अगली सुनवाई 4 नवंबर को |
| घायल अन्य व्यक्ति | किसान की बहन प्रीतो (बचाने के प्रयास में झुलसी) |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की भूमिका व बयान
इस पूरे मामले में बिजली निगम ने किसान के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। निगम के सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) संदीप कुमार ने परिवार के दावों को बेबुनियाद बताते हुए जगपाल सिंह पर उल्टा सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम ने अपनी शिकायत में जगपाल सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है, जिसकी झांसा पुलिस जांच करेगी।
थाना झांसा की एसएचओ कुलबीर कौर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें बिजली निगम की ओर से एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। पुलिस अब इस शिकायत की गहनता से जांच कर रही है। एसएचओ ने यह भी बताया कि किसान जगपाल सिंह के भाई रमेश कुमार ने भी बिजली निगम के एस.डी.ओ., जे.ई. और पड़ोसी चरणजीत सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन पर मिलीभगत और गलत तरीके से खंभे लगवाने का आरोप है। पुलिस दोनों शिकायतों के तथ्यों, परिस्थितियों और कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो।
"परिवार द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। किसान जगपाल सिंह ने सरकारी कार्य को रोकने की कोशिश की है। हमने इस संबंध में पुलिस को शिकायत दी है और उचित कार्रवाई की मांग की है।"— संदीप कुमार, SDO, बिजली निगम
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव
कुरुक्षेत्र के धुराला गांव में घटी यह घटना न केवल एक व्यक्ति की त्रासदी है, बल्कि यह किसानों के भूमि अधिकारों, सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जब कोई किसान अपनी फसल भूमि पर बिजली के खंभे लगने से खेती में बाधा महसूस करता है और उसके विरोध को अनसुना कर दिया जाता है, तो यह तनाव कई बार बड़े विवाद का रूप ले लेता है। इस मामले में, अदालत में मामला विचाराधीन होने के बावजूद खंभे लगाने का प्रयास, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में संभावित खामियों को उजागर करता है।
इस प्रकार की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं, जहां किसानों के लिए उनकी जमीन ही आजीविका का एकमात्र स्रोत होती है। आत्मदाह जैसा चरम कदम उठाना इस बात का संकेत है कि पीड़ित को कहीं और से कोई समाधान या न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही थी। यह घटना स्थानीय नागरिकों में सरकारी विभागों के प्रति विश्वास और उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा सकती है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी परिस्थितियों में कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन हो और किसानों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
कुरुक्षेत्र पुलिस अब दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर गहन जांच में जुट गई है। झांसा थाना पुलिस को बिजली निगम और किसान के परिवार दोनों की ओर से प्राप्त शिकायतों के सभी पहलुओं पर गौर करना होगा। इसमें घटना स्थल का मुआयना, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, बिजली निगम के रिकॉर्ड और अदालत में चल रहे मामले के दस्तावेजों की जांच शामिल है। उम्मीद है कि पुलिस निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी और कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।
अदालती प्रक्रिया भी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 4 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत इस बात पर विचार कर सकती है कि क्या अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद बिजली निगम द्वारा कार्य जारी रखना उचित था। इस मामले का परिणाम हरियाणा के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के भूमि विवादों और सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एक नजीर बन सकता है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए, प्रशासन को भूमि अधिग्रहण या सार्वजनिक उपयोगिता परियोजनाओं से प्रभावित किसानों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और उनकी शिकायतों के निवारण के लिए एक पारदर्शी और प्रभावी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।





