हरियाणा के करनाल जिले में धान खरीद सीजन के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक गतिरोध उत्पन्न हो गया है। निसिंग मंडी में अपनी उपज बेचने आए किसानों को जब गेट पास देने से मना किया गया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ करनाल-कैथल मुख्य मार्ग पर डेरा डाल दिया और सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी किसानों में मुख्य रूप से कैथल जिले के किसान शामिल हैं, जो दशकों से अपनी फसल निसिंग मंडी में लाते रहे हैं।
पुराने रिश्तों और नई व्यवस्था के बीच फंसा किसान
जाम लगाकर बैठे किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि वे कोई नए व्यापारी या बाहरी व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि पिछले चार दशकों से निसिंग मंडी के साथ उनका व्यापारिक और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि उनके पास फसल से जुड़े सभी वैध दस्तावेज, मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल का पंजीकरण और पहचान पत्र मौजूद हैं, फिर भी उन्हें मंडी के भीतर प्रवेश करने से रोका जा रहा है। किसानों के अनुसार, कई दिनों से वे ट्रालियों में धान भरकर मंडी के बाहर खड़े हैं, लेकिन अधिकारी उनकी सुनने को तैयार नहीं हैं।
| महत्वपूर्ण तथ्य | विवरण |
|---|---|
| विवाद का केंद्र | निसिंग अनाज मंडी, करनाल |
| प्रभावित मार्ग | करनाल-कैथल स्टेट हाईवे |
| मुख्य समस्या | दूसरे जिले (कैथल) के किसानों को गेट पास न मिलना |
| किसानों का दावा | 40 वर्षों से इसी मंडी में फसल विक्रय का इतिहास |
| प्रशासनिक आधार | सरकार द्वारा जारी 'दूसरे जिले की फसल' पर रोक का पत्र |
सेटेलाइट और सिस्टम पर किसानों के तीखे सवाल
विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार की तकनीकी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। किसानों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब खेतों में पराली या फानों में आग लगती है, तो सरकार की सेटेलाइट प्रणाली तुरंत उसकी पहचान कर लेती है और प्रशासन जुर्माना लगाने पहुंच जाता है। लेकिन जब वही किसान अपनी मेहनत की फसल लेकर मंडी आता है, तो सरकार को यह पता लगाने में परेशानी होती है कि फसल उसी किसान के खेत की है या नहीं। किसानों ने पूछा कि अगर देश में कहीं भी फसल बेचने की आजादी है, तो फिर पड़ोसी जिले की मंडी में जाने पर यह पाबंदी क्यों लगाई जा रही है?
"हम पिछले 40 सालों से निसिंग मंडी में अपनी फसल बेच रहे हैं। हमारे पास जमीन के कागजात और पोर्टल का रजिस्ट्रेशन भी है। सरकार की नीतियां किसानों को राहत देने के बजाय उन्हें सड़कों पर बैठने के लिए मजबूर कर रही हैं। जब तक गेट पास नहीं कटेंगे, हम जाम नहीं खोलेंगे।" - प्रदर्शनकारी किसान समूह
प्रशासनिक पक्ष: नियमों की दुहाई और सत्यापन का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए निसिंग मार्केट कमेटी के सचिव जसपाल मेहता ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश और पत्र जारी किए गए हैं, जिसमें दूसरे जिलों से आने वाली धान की आवक पर रोक लगाने की बात कही गई है। सचिव के अनुसार, विभाग केवल सरकारी आदेशों का पालन कर रहा है। हालांकि, किसानों के भारी विरोध को देखते हुए प्रशासन अब बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।
स्थानीय जनजीवन और यातायात पर व्यापक असर
करनाल-कैथल मार्ग हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण लिंक है। किसानों के जाम के कारण यात्रियों, स्कूली बसों और आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाने का प्रयास किया और यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। व्यापारियों और आढ़तियों ने भी चिंता जताई है कि यदि खरीद प्रक्रिया सुचारू नहीं हुई, तो मंडी में जाम की स्थिति और गंभीर हो जाएगी।
निष्कर्ष और आगामी कार्रवाई
फिलहाल, मंडी प्रशासन और जिला अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर मंथन जारी है। अधिकारियों का कहना है कि वे किसानों के दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई फर्जीवाड़ा न हो। वहीं, किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गेट पास जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह विवाद एक बार फिर हरियाणा की कृषि खरीद प्रणाली और डिजिटल पोर्टल की खामियों को उजागर कर रहा है, जहां भौगोलिक सीमाएं किसानों की मेहनत की राह में रोड़ा बन रही हैं।





