हरियाणा के करनाल जिले के घरौंडा क्षेत्र में धान खरीद और राइस मिलों के संचालन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूथ कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाते हुए डीएफएससी (DFSC) मुकेश कुमार के अचानक हुए तबादले पर सवालिया निशान लगाए हैं। यह मामला उस समय गरमाया जब एक निजी राइस मिल पर देर रात छापेमारी की गई और उसके ठीक अगले दिन संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाओं को हवा दे दी है।
राइस मिल पर आधी रात का एक्शन और रहस्यमयी तबादला
यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) रजत लाठर ने प्रेस के सामने सनसनीखेज दावे किए हैं। उनके अनुसार, घरौंडा क्षेत्र में स्थित निशांत राणा की राइस मिल पर डीएफएससी मुकेश कुमार ने रात के करीब 1 बजे औचक छापेमारी की थी। आरोप है कि इस मिल पर करीब 6 करोड़ रुपये की चावल की देनदारी बकाया थी। छापेमारी के दौरान मिलर द्वारा साढ़े 5 करोड़ रुपये का चेक विभाग को सौंपा गया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि इस बड़ी कार्रवाई के 24 घंटे के भीतर ही डीएफएससी मुकेश कुमार का तबादला कर दिया गया।
लाठर ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि मिलर की सत्ताधारी दल के नेताओं और स्थानीय विधायक के साथ नजदीकी के कारण यह तबादला हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अधिकारी सही कार्य कर रहा था और रिकवरी कर रहा था, तो उसे इनाम देने के बजाय हटाया क्यों गया? उन्होंने यह भी मांग की कि छापेमारी वाली रात की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
| विवरण / वर्ष | आय/लेनदेन (अनुमानित राशि) | मुख्य विसंगति/आरोप |
|---|---|---|
| वर्ष 2016-17 | ₹1.47 करोड़ | बोली राशि में कम दर्शाने का संदेह |
| वर्ष 2017-18 | ₹1.77 करोड़ | आय में धीमी वृद्धि पर सवाल |
| वर्ष 2018-19 | ₹2.38 करोड़ | रिकॉर्ड और वास्तविक आय में अंतर |
| वर्ष 2019-20 (6 माह) | ₹4.00 करोड़ | अचानक आय बढ़ने से पिछले वर्षों पर संदेह |
| पंचायत फंड ट्रांसफर | ₹37 लाख + ₹24.5 लाख | सेलर के खाते में अवैध लेनदेन का आरोप |
पक्के पुल धाम की बोली और वित्तीय अनियमितताओं का दावा
विवाद केवल राइस मिल तक सीमित नहीं है। गांव के निवासी शक्ति सिंह ने सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त जानकारी के आधार पर पक्के पुल धाम की बोली में बड़े घोटाले का दावा किया है। आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए उन्होंने बताया कि 2016 से 2019 के बीच धाम से होने वाली आय में भारी विसंगतियां हैं। जहां तीन साल तक आय 1.5 से 2.5 करोड़ के बीच रही, वहीं 2019 के महज छह महीनों में यह आंकड़ा 4 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। शक्ति सिंह का आरोप है कि पिछले वर्षों में करोड़ों रुपये का गबन किया गया है।
इसके अलावा, वर्ष 2020 में एक कथित फर्जी ट्रस्ट बनाने का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि इस ट्रस्ट में पूर्व सरपंच के परिवार के सदस्यों को ही शामिल किया गया और तब से धाम की आय का कोई सार्वजनिक हिसाब-किताब नहीं दिया गया है। ग्रामीणों ने विजिलेंस जांच की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की प्रतिमा के नाम पर 13 लाख रुपये का बिल तो पास करा लिया गया, लेकिन धरातल पर प्रतिमा कहीं नजर नहीं आती।
किसानों पर दबाव और प्रशासनिक साठगांठ के आरोप
रजत लाठर ने धान खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली राइस मिलर किसानों को धमकाकर कम कीमतों पर धान बेचने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि जिन मिलरों ने पिछले सीजन का चावल सरकारी गोदामों में जमा नहीं कराया और जिन पर करोड़ों की देनदारी बकाया है, उन्हें दोबारा धान खरीदने और मिलिंग का लाइसेंस किस आधार पर दिया गया? उन्होंने इसे सीधे तौर पर किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ और सरकारी राजस्व को चपत लगाने वाला कदम बताया।
"एक ईमानदार अधिकारी रात में छापेमारी कर सरकारी रिकवरी करता है और अगले ही दिन उसका तबादला कर दिया जाता है। यह स्पष्ट संकेत है कि भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। हम इस पूरे मामले की हाई-कोर्ट के सिटिंग जज से जांच की मांग करते हैं।" - रजत लाठर, जिला अध्यक्ष (ग्रामीण), यूथ कांग्रेस
आगे की राह और प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इन गंभीर आरोपों के बाद अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और संबंधित विधायक के जवाब पर टिकी हैं। हालांकि, अभी तक आरोपी पक्ष या विभाग की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। यूथ कांग्रेस और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे। मामला अब विजिलेंस और उच्च अधिकारियों की चौखट पर है, जहां फाइलों की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी।





