खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने हरियाणा की धरती से एक बड़े अभियान की शुरुआत की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने करनाल जिले के ऐतिहासिक कस्बे तरावड़ी का दौरा किया, जहां उन्होंने आधिकारिक रूप से 'खेत बचाओ अभियान' का शंखनाद किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर राज्य के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी उनके साथ विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अन्नदाताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य तथा किसानों की आर्थिक सुदृढ़ता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
इस दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने खेतों में जाकर अमोनिया गैस के प्रभाव और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों का ज़मीनी मुआयना किया। उन्होंने इस बात पर विशेष संतोष व्यक्त किया कि हरियाणा का अन्नदाता पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहा है और पराली जलाने की कुप्रथा को त्यागकर वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन कर रहा है। सरकार का यह नया अभियान न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बंजर होती ज़मीन को उपजाऊ बनाए रखने में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
मृदा स्वास्थ्य और रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग पर गंभीर चिंता
धरती की घटती उर्वरा शक्ति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भूमि हमारी माता है जो हमें जीवनयापन के लिए अन्न प्रदान करती है। हालांकि, पिछले कुछ दशकों से अत्यधिक मात्रा में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग ने मिट्टी की जैविक संरचना को गंभीर क्षति पहुंचाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि की सेहत खराब होने का सीधा असर हमारे खान-पान और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। किसानों को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ज़मीन की सेहत सुधारने के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो निकट भविष्य में देश की कृषि व्यवस्था के सामने एक विकट संकट खड़ा हो सकता है।
मृदा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने सॉइल हेल्थ कार्ड के समुचित उपयोग की वकालत की। उन्होंने समझाया कि बिना सोचे-समझे रासायनिक खाद डालने के बजाय किसानों को मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही पोषक तत्वों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही देश में खाद्यान्न की उपलब्धता पर बोलते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि भारत के पास गेहूं और चावल का प्रचुर भंडार मौजूद है, इसलिए खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका की कोई गुंजाइश नहीं है।
| अभियान एवं कार्यक्रम विवरण | प्रमुख बिंदु एवं तथ्य |
|---|---|
| कार्यक्रम का नाम | खेत बचाओ अभियान |
| आयोजन स्थल | तरावड़ी, करनाल (हरियाणा) |
| मुख्य अतिथि | शिवराज सिंह चौहान (केंद्रीय कृषि मंत्री) |
| विशेष उपस्थिति | श्याम सिंह राणा (कृषि मंत्री, हरियाणा) |
| पराली प्रबंधन प्रोत्साहन राशि | 1,200 रुपये प्रति एकड़ |
फसल अवशेष प्रबंधन और हरियाणा के किसानों का सराहनीय योगदान
पराली जलाने की समस्या पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के किसानों की पीठ थपथपाई और उन्हें देश के लिए एक मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में फसल अवशेष जलाने के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसके लिए किसान और राज्य प्रशासन दोनों बधाई के पात्र हैं। राज्य सरकार द्वारा पराली का प्रबंधन करने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जो इस दिशा में एक कारगर कदम है। उन्होंने हाथ जोड़कर अन्नदाताओं से विनम्र आग्रह किया कि वे पर्यावरण और मिट्टी को बचाने के इस महायज्ञ में अपना सहयोग जारी रखें।
राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष तीखा प्रहार करते हुए केंद्रीय मंत्री ने वोट चोरी और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावों में पराजय का सामना करने के बाद जनता के बीच भ्रम और अराजकता का माहौल फैलाना विपक्ष की पुरानी आदत बन चुकी है। संसद, चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर सवाल उठाने वाले दलों की मंशा पर संदेह जताते हुए उन्होंने कहा कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनकी नीतियों पर पूरा भरोसा करती है। पंजाब में एनडीए की सरकार बनने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है।
"धरती मां हमें जीवन के लिए अन्न देती है, लेकिन अत्यधिक रसायनों के प्रयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। हमें पराली जलाने की बजाय उसका उचित प्रबंधन करना होगा ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि सुरक्षित रह सके।" - शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री
कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव
केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 25 रुपये प्रति क्विंटल की हालिया बढ़ोतरी पर बोलते हुए कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। सभी फैसले तथ्यात्मक और तार्किक विश्लेषण के बाद ही लिए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र में आ रही इन सकारात्मक बदलावों का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अपनाने लगे हैं, जिससे उनकी लागत में कमी और मुनाफे में बढ़ोतरी हो रही है।
तरावड़ी में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कृषि क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास कर रही हैं। आने वाले समय में सॉइल हेल्थ कार्ड और पराली प्रबंधन जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है।





