हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): हरियाणा में किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
उन्होंने कहा कि नशा खरीदने जाओ तो कोई सबूत नहीं चाहिए, मगर मंडी में किसान को अपनी फसल बेचने के लिए तीन गवाह लाने पड़ रहे हैं।। सरकार बताए कि किसानों पर ऐसी शर्तें क्यों थोपी जा रही हैं।। पेटवाड़ ने कहा कि कृषि प्रधान देश किसानों के साथ अन्याय करके आगे नहीं बढ़ सकता।। मंडियों में धान का उठान धीमा है और मिलर्स की संख्या कम होने से खरीद प्रभावित हो रही है।।
| मंडी व कृषि विवरण | वर्तमान स्थिति व दरें |
|---|---|
| फसल / मुद्दा | किसानों की दुर्दशा पर बरसे जस्सी पेटवाड़ |
| संबंधित मंडियां / ज़िले | हरियाणा (संबंधित क्षेत्र) |
| दरें / एमएसपी / आंकड़े | 29 सितंबर, 3100 रु, 2461 रु, 250 रु |
| प्रशासनिक व्यवस्था | हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी / AICC |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
सरकार 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने का दावा करती है, लेकिन उसे बताना चाहिए कि हरियाणा में इन फसलों की खरीद किस तरह सुनिश्चित की जा रही है।। नमी की शर्त 17 से बढ़ाकर 20 फीसदी करने की मांग कांग्रेस विधायक ने कहा कि सरकार ने धान की खरीद 29 सितंबर से शुरू की, लेकिन शुरुआती दौर में मंडियों में आढ़ती और मिलर्स खरीद नहीं कर रहे थे।। उन्होंने कहा कि धान में 17 फीसदी नमी का मानक किसानों के लिए परेशानी बन रहा है।। इसे बढ़ाकर 20 फीसदी किया जाना चाहिए।। उनके अनुसार, नमी के नाम पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने मिलिंग की शर्त पर भी सवाल उठाए।। पेटवाड़ ने कहा कि एक क्विंटल धान के बदले मिलर्स को 67 किलो चावल देना होता है, जबकि इतनी मात्रा में चावल निकलना संभव नहीं हो पाता।। इससे आढ़ती और किसान दोनों प्रभावित होते हैं।। उन्होंने सरकार से चावल की निर्धारित मात्रा 58-59 किलो करने की मांग की, ताकि दोनों को राहत मिल सके।। 3100 रुपये का वादा, 2461 रुपये में भी खरीद नहीं: पेटवाड़ पेटवाड़ ने कहा कि भाजपा ने चुनाव के दौरान धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने का वादा किया था।। मुख्यमंत्री ने भी कई जनसभाओं में इसकी घोषणा की थी, लेकिन अब 2461 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर भी खरीद नहीं हो पा रही है।। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों को जवाब देना चाहिए कि चुनावी वादे का क्या हुआ।। पोर्टल पर गलत फसल, सत्यापन के लिए काटने पड़ रहे चक्कर कांग्रेस विधायक ने कहा कि हरियाणा में हजारों किसान पोर्टल पर फसल के सत्यापन के लिए परेशान हो रहे हैं।। नारनौंद के खेड़ी चौपटा में एक किसान ने बाजरा बोया है, लेकिन पोर्टल पर नरमे की फसल दिखाई जा रही है।। कापड़ो गांव के एक किसान को एक एकड़ में 97 मन धान की पैदावार हुई, जबकि सरकार प्रति एकड़ 21.30 क्विंटल यानी करीब 52 मन धान की खरीद के मानक के आधार पर सवाल उठा रही है।। उन्होंने कहा कि सरकार ने अधिक पैदावार होने पर एसडीएम और तहसीलदार से सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।। इससे किसानों को अतिरिक्त परेशानी हो रही है।। पेटवाड़ ने कहा कि उन्होंने विधानसभा के पिछले सत्र में भी किसानों को मुआवजा देने की मांग उठाई थी।। सरकार में मुख्यमंत्री की भले न चले, लेकिन पोर्टल की जरूर चलती है।। हुड्डा सरकार के दौरान बोनस देने का किया दावा पेटवाड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय केंद्र की ओर से गेहूं के समर्थन मूल्य में 250 रुपये की बढ़ोतरी के साथ हरियाणा सरकार ने 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया था।। उन्होंने दावा किया कि हुड्डा सरकार के दौरान धान की कीमत 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची थी।। पेटवाड़ ने कहा कि सरकार को किसान की आमदनी के साथ उसकी खेती की लागत का भी हिसाब रखना चाहिए।।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





