हरियाणा के हिसार जिले में प्रॉपर्टी डीलिंग और कॉलोनाइजरों द्वारा नियमों की अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है। 'दी सूरजमुखी कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड' के बैनर तले करीब 8 से 9 कॉलोनियों के सैकड़ों प्लॉट धारक पिछले कई वर्षों से अपनी मेहनत की कमाई के निवेश को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मामला कॉलोनाइजर द्वारा सोसाइटी के नाम जमीन ट्रांसफर न करने से जुड़ा है, जिसके कारण इन कॉलोनियों में रह रहे परिवारों के पास मालिकाना हक के पुख्ता कानूनी दस्तावेज नहीं हैं।
जमीन हस्तांतरण का पेच: 2010 से लटका है मामला
हिसार कैंट, सातरोड कलां और मायड़ क्षेत्र में वर्ष 2010 से 2020 के दौरान कॉलोनाइजर गुलशन कुमार सिंगला द्वारा कई कॉलोनियां विकसित की गई थीं। इनमें न्यू सैनिक कैंट मार्केट, न्यू विकास नगर, रामदयाल जांगड़ा कॉलोनी, सज्जन कॉलोनी, सुबे सिंह कॉलोनी, मस्तानाथ क्षेत्र और न्यू सैनिक विहार-1, 11 व 12 जैसी महत्वपूर्ण बसावटें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में वर्तमान में 50 प्रतिशत से अधिक भूखंडों पर मकान बन चुके हैं और लोग वहां निवास कर रहे हैं।
| विवरण | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| प्रभावित संस्था | दी सूरजमुखी कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड |
| मुख्य आरोपी/कॉलोनाइजर | गुलशन कुमार सिंगला एवं विवेक सिंगला |
| प्रभावित क्षेत्र | हिसार कैंट, सातरोड कलां, मायड़ (हिसार) |
| कुल प्रभावित कॉलोनियां | 08 से 09 प्रमुख कॉलोनियां |
| मुख्य निवासी वर्ग | सेवानिवृत्त फौजी, सेवारत सैनिक और जिंदल स्टील वर्कर्स |
| विवाद का मुख्य कारण | सोसाइटी के नाम जमीन का पंजीकरण (रजिस्ट्री) न करना |
सोसाइटी के प्रधान कैप्टन रामपाल ने बताया कि कॉलोनाइजर ने प्लॉट धारकों को 'दी सूरजमुखी सोसाइटी' के नाम से अलॉटमेंट कार्ड तो थमा दिए, लेकिन जिस जमीन पर ये प्लॉट कटे हैं, वह तकनीकी और कानूनी रूप से अभी भी सोसाइटी के नाम हस्तांतरित नहीं की गई है। इसके चलते निवासियों को भविष्य में मालिकाना हक खोने या कानूनी पेचीदगियों में फंसने का डर सता रहा है।
लिखित वादे से मुकरने का आरोप और 'बीमारी' का बहाना
विवाद तब और बढ़ गया जब कॉलोनाइजर अपने पिछले वादों से पीछे हटते नजर आए। सोसाइटी सदस्यों के अनुसार, 5 अक्टूबर 2025 को हुई एक महत्वपूर्ण आम सभा में कॉलोनाइजर गुलशन सिंगला और उनके पुत्र विवेक सिंगला ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि वे अपने निजी खर्च पर जमीन को सोसाइटी के नाम स्थानांतरित करवा देंगे। इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग और मीटिंग रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
"हमने जीवन भर की जमा पूंजी इन प्लॉटों में लगा दी। 2025 में लिखित समझौता हुआ, 2026 में वकील के माध्यम से एग्रीमेंट ड्राफ्ट तैयार हुआ, लेकिन अब कॉलोनाइजर बहानेबाजी कर रहे हैं। जब उन्हें बैठक में बुलाया गया तो उन्होंने अस्पताल में भर्ती होने का झूठ बोला, जबकि वे अपने कार्यालय में ही मौजूद थे। यह सीधे तौर पर धोखाधड़ी है।" - कैप्टन रामपाल, प्रधान, सूरजमुखी सोसाइटी
प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तक्षेप की तैयारी
सोसाइटी की हालिया जनरल बॉडी मीटिंग में सदस्यों का आक्रोश फूट पड़ा। प्लॉट धारकों, जिनमें अधिकांश देश की सीमा की रक्षा करने वाले फौजी और औद्योगिक श्रमिक हैं, ने निर्णय लिया है कि अब वे इस मामले को लेकर चुप नहीं बैठेंगे। कॉलोनाइजर की नीयत पर सवाल उठाते हुए निवासियों ने अब स्थानीय विधायक से मिलने और उन्हें पूरे मामले से अवगत कराने की रणनीति बनाई है।
स्थानीय जनजीवन और कानूनी स्थिति पर प्रभाव
इस विवाद का सीधा असर हिसार के रियल एस्टेट मार्केट और आम जनजीवन पर पड़ रहा है। बिना रजिस्ट्री और मालिकाना हक के, इन कॉलोनियों के निवासी न तो अपने मकानों पर बैंक लोन ले पा रहे हैं और न ही उन्हें भविष्य की सुरक्षा का अहसास है। यदि जमीन सोसाइटी के नाम ट्रांसफर नहीं होती है, तो भविष्य में इन कॉलोनियों को अवैध घोषित किए जाने या मालिकाना हक को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई का खतरा बना रहेगा। आगामी दिनों में यदि विधायक या जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करता है, तो निवासियों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।





