हिसार जिले के ऐतिहासिक और अग्रवाल समाज की अटूट आस्था के केंद्र अग्रोहा धाम में रविवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर वार्षिक मेले का विहंगम दृश्य देखने को मिला। महाराजा अग्रसेन की पावन धरा पर आयोजित इस उत्सव में न केवल हरियाणा, बल्कि पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे दूर-दराज के राज्यों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मेले की शुरुआत अलसुबह पांच बजे शक्ति सरोवर में पवित्र स्नान के साथ हुई, जिसके बाद पूरे धाम परिसर में 'महाराजा अग्रसेन अमर रहें' के जयघोष गूंजने लगे।
धाम को इस विशेष अवसर के लिए दुल्हन की तरह सजाया गया है। रंग-बिरंगी लाइटों, ताजे फूलों और भव्य लड़ियों से सराबोर अग्रोहा धाम की आभा देखते ही बन रही थी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और धाम प्रबंधन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए थे, जिसमें पुलिस बल के साथ-साथ निजी सुरक्षा कर्मियों की बड़ी फौज तैनात रही।
आयोजन की मुख्य विशेषताएं और विशिष्ट अतिथि
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| मुख्य अतिथि | कवींद्र गुप्ता (राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश) |
| विशिष्ट अतिथि | विपुल गोयल (निकाय मंत्री), सावित्री जिंदल (विधायक) |
| धार्मिक स्थल | अग्रोहा धाम, हिसार (हरियाणा) |
| सांस्कृतिक कलाकार | मासूम शर्मा, अंजनी द्विवेदी |
| प्रमुख आकर्षण | शक्ति सरोवर स्नान, शरद पूर्णिमा मेला, विशाल भंडारा |
राजनीतिक और सामाजिक दिग्गजों का संगम
मेले के मुख्य समारोह में मंच पर कई बड़ी हस्तियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने अपने संबोधन में अग्रोहा की ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए समाज में एकता और सेवा भाव का संदेश दिया। वहीं, हरियाणा के निकाय मंत्री विपुल गोयल और पंजाब के मंत्री वीरेंद्र गोयल ने भी अग्रवाल समाज की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की सराहना की।
"अग्रोहा केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि महाराजा अग्रसेन के समाजवाद और एक रुपया-एक ईंट के उस महान दर्शन का प्रतीक है, जिसने समाज को जोड़ना सिखाया। आज का यह मेला उसी एकता का प्रमाण है।"
राज्यसभा के पूर्व सदस्य डॉ. सुभाष चंद्रा और हिसार की विधायक सावित्री जिंदल ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। सावित्री जिंदल ने कहा कि अग्रोहा धाम का विकास और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है। नेताओं ने समाज के युवाओं से महाराजा अग्रसेन के सिद्धांतों पर चलने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और जन-सुविधाएं
मेले में भक्ति और मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध हरियाणवी कलाकार मासूम शर्मा और भजन गायिका अंजनी द्विवेदी ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। भजनों पर झूमते श्रद्धालुओं ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। मेले में खानपान के व्यंजनों से लेकर घरेलू उपयोग के सामान तक की सैकड़ों स्टॉल लगाई गई थीं। बच्चों के लिए खिलौनों की दुकानों और झूलों ने मेले में रौनक और बढ़ा दी।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धाम प्रबंधन द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था, जहां हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पेयजल, चिकित्सा सहायता और खोया-पाया केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए स्वयंसेवकों की टोलियां लगातार सक्रिय रहीं।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता
भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हिसार पुलिस द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था की गई थी। धाम की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी और सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। अग्निशमन विभाग और एम्बुलेंस की टीमें भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात रहीं। स्थानीय प्रशासन ने ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया था ताकि नेशनल हाईवे पर जाम की स्थिति पैदा न हो।
भावी योजनाएं और धार्मिक महत्व
अग्रोहा धाम का वार्षिक मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह पूरे उत्तर भारत के व्यापारिक और सामाजिक समुदाय के मिलन का एक बड़ा मंच बन चुका है। धाम समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, आने वाले वर्षों में यहां सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटकों को भी आकर्षित किया जा सके। शरद पूर्णिमा की चांदनी में शक्ति सरोवर की महाआरती के साथ मेले के मुख्य चरण का समापन हुआ, लेकिन श्रद्धालुओं का आना देर रात तक जारी रहा।





