चंडीगढ़: हरियाणा में व्याप्त बिजली और पानी के गंभीर संकट के बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्य की नायब सिंह सैनी सरकार पर गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का कारोबार एक निजी कंपनी को सौंपने के निर्णय को लेकर तीखा हमला बोला है। AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया है कि यह फैसला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अक्षमता और जनता की समस्याओं के प्रति उदासीनता का परिचायक है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है कि आखिर ₹1 करोड़ की मामूली पेड-अप कैपिटल वाली कंपनी को हजारों करोड़ का बिजली कारोबार क्यों दिया जा रहा है?
अनुराग ढांडा ने मंगलवार को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जब प्रदेश के लोग 36 घंटे से अधिक समय से बिजली-पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं, तब मुख्यमंत्री जनता की परेशानी दूर करने के बजाय एक अपरिचित निजी कंपनी को ₹10,000 करोड़ के संभावित लाभ वाला बिजली वितरण का ठेका देने में व्यस्त हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि सरकारी उपक्रमों को किनारे कर एक निजी कंपनी को इतना बड़ा लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिसकी न तो कोई अनुभव है और न ही वह वित्तीय क्षमता के मानकों पर खरी उतरती दिख रही है।
घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम
आम आदमी पार्टी के नेता अनुराग ढांडा ने हरियाणा सरकार के इस फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने बताया कि 'इलेवन पावर्स प्राइवेट लिमिटेड' नामक यह कंपनी 6 जून 2025 को स्थापित हुई थी, जिसकी पेड-अप कैपिटल मात्र ₹1 करोड़ के करीब है। इसके बावजूद, कंपनी ₹4,700 करोड़ के निवेश का दावा कर रही है और उसे 25 साल की लंबी अवधि के लिए गुरुग्राम और नूंह जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बिजली वितरण की जिम्मेदारी दी जा रही है। ढांडा ने कंपनी के पुराने अनुभव और इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने की क्षमता पर सरकार से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने निविदा प्रक्रिया, वित्तीय क्षमता और तकनीकी योग्यता की जांच किस आधार पर की है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी जनता को नहीं दी गई है।
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों जैसे गुरुग्राम, अंबाला, रोहतक, हिसार, करनाल और कुरुक्षेत्र से पिछले 36 घंटों से बिजली-पानी की किल्लत की शिकायतें लगातार आ रही हैं। गुरुग्राम जैसे प्रमुख आईटी हब में भी लोग बिजली कटौती से परेशान होकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। ढांडा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर तंज कसते हुए पूछा कि जब उनसे बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं संभल रहीं, तो वे किस बात की सरकार चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा की जनता पूछ रही है कि बिजली गायब है, पानी गायब है और मुख्यमंत्री भी गायब हैं, आखिर प्रदेश चला कौन रहा है?
| विवरण | तथ्य/आरोप |
|---|---|
| कंपनी का नाम | इलेवन पावर्स प्राइवेट लिमिटेड |
| कंपनी स्थापना तिथि | 6 जून 2025 |
| कंपनी की पेड-अप कैपिटल | लगभग ₹1 करोड़ |
| प्रस्तावित निवेश | लगभग ₹4,700 करोड़ |
| अनुमानित वार्षिक लाभ पैकेज | ₹10,000 करोड़ |
| ठेके की अवधि | 25 साल |
| प्रभावित क्षेत्र | गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण |
| मुख्य आरोप | अनुभव और वित्तीय क्षमता की कमी, 'गुजरात कनेक्शन' |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की भूमिका व बयान
अनुराग ढांडा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंशा पर सीधे सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर ₹10,000 करोड़ की कमाई वाला यह पैकेज एक निजी कंपनी को क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने मुख्यमंत्री के 'पर्ची नहीं चलती' वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा कि बिना किसी पर्ची के ₹1 करोड़ की कंपनी को ₹4,700 करोड़ के निवेश की इजाजत कोई सरकार नहीं दे सकती। ढांडा ने आरोप लगाया कि आखिर ₹10,000 करोड़ के लाभ की पर्ची सीएम कार्यालय से गई थी या 'सुपर सीएम' केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर के दफ्तर से? उन्होंने इस पूरी डील में 'गुजरात कनेक्शन' की भी जांच की मांग की और कहा कि हरियाणा की जनता को किसी के निजी कनेक्शन के कारण बिजली-पानी संकट में नहीं डाला जा सकता।
ढांडा ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) का नाम लेकर जिम्मेदारी से बचने के बजाय सरकार से इस डील को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार के पास डील रद्द करने का अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री की न जाने कौन सी मजबूरी है कि वे ऐसा नहीं कर रहे। आम आदमी पार्टी इस फैसले का पुरजोर विरोध करती है और तुरंत इस डील को रद्द करने तथा इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करती है, जब तक जांच पूरी न हो, इसे आगे बढ़ाने पर रोक लगाई जानी चाहिए।
“नायब सिंह सैनी को याद रखना चाहिए कि हरियाणा की जनता ने उन्हें सरकार चलाने के लिए चुना है, निजी कंपनियों की तिजोरी भरने और लोगों को अंधेरे में रखने के लिए नहीं। अगर उनसे प्रदेश नहीं संभल रहा, तो उन्हें कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।”
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव
इस विवादास्पद फैसले और प्रदेशव्यापी बिजली-पानी संकट का सीधा असर हरियाणा के आम जनजीवन पर पड़ रहा है। गुरुग्राम जैसे शहरों में, जहां देश-विदेश की बड़ी आईटी कंपनियां और लाखों पेशेवर काम करते हैं, बिजली कटौती से व्यापार और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, जो सरकार के प्रति व्यापक असंतोष को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल तात्कालिक परेशानी का कारण बन रही है, बल्कि राज्य की छवि और निवेश के माहौल पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। ढांडा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर बिजली व्यवस्था संभालते हैं, उन्हें ₹5,000 मासिक जोखिम भत्ता देने में सरकार को समस्या है, लेकिन एक अनुभवहीन निजी कंपनी को हजारों करोड़ रुपये का ठेका देने में कोई हिचक नहीं। यह स्थिति कर्मचारियों के मनोबल को गिरा रही है और बिजली आपूर्ति को और बाधित कर रही है। ढांडा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से सीखने की सलाह दी, जिन्होंने निजी बिजली प्रोजेक्टों को सरकारी बनाकर जनता को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई है, जबकि हरियाणा सरकार सरकारी वितरण को निजी हाथों में सौंप रही है।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आम आदमी पार्टी ने सरकार से इस पूरी डील के सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने और बिजली-पानी के संकट के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। पार्टी का मानना है कि हरियाणा किसी मुख्यमंत्री की जागीर नहीं है और जनता को बिजली-पानी उपलब्ध कराना सरकार का एहसान नहीं, बल्कि उसकी मूलभूत जिम्मेदारी है। ढांडा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस डील को रद्द नहीं किया और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज करेगी।
इसके अलावा, उन्होंने बिजली कर्मचारियों की मांगों पर तुरंत बातचीत करने और उन्हें उचित जोखिम भत्ता देने की भी वकालत की। AAP ने मांग की है कि हरियाणा में बिजली-पानी के संकट को दूर करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि जनता को सरकार की नाकामी की कीमत न चुकानी पड़े। इस मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता ही आगे का रास्ता हो सकती है, ताकि जनता का विश्वास बहाल हो सके और प्रदेश के संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके।





