हरियाणा के कैथल शहर में प्रशासनिक महकमों में पारदर्शिता के दावों की पोल खोलती एक बड़ी घटना सामने आई है। राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की सतर्क इकाई ने स्थानीय नगर परिषद कार्यालय के भीतर औचक कार्रवाई करते हुए एक कंप्यूटर ऑपरेटर को अठारह हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि सरकारी कार्यालयों में आम जनता और ठेकेदारों को अपने वैध कार्यों के लिए किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इसकी बानगी इस मामले ने एक बार फिर पेश कर दी है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। नगर परिषद में ठेकेदारी का काम करने वाले एक प्रार्थी ने आधिकारिक बिलों के भुगतान को लेकर कैथल स्थित एसीबी विंग से संपर्क साधा था। प्रार्थी का आरोप था कि उसके कार्य से जुड़े फाइलों को आगे बढ़ाने और बिल पास करने के बदले कार्यालय का ही एक कर्मचारी लगातार अवैध रूप से रुपयों की मांग कर रहा था। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच दल ने कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया और आरोपी को दबोचने के लिए एक सुनियोजित योजना तैयार की, जिसके तहत शिकायतकर्ता को नियत समय पर रकम के साथ भेजा गया था।
जाल बिछाकर की गई कार्रवाई और सिलसिलेवार घटनाक्रम
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जब ठेकेदार द्वारा लिखित और पुख्ता शिकायत प्राप्त हुई, तो उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार एक विशेष ट्रैपिंग टीम का गठन किया गया। योजना के तहत शिकायतकर्ता को केमिकल लगे हुए नोट देकर आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर के पास भेजा गया। जैसे ही ऑपरेटर ने तयशुदा रकम अपने हाथों में ली और दराज में रखने लगा, पहले से ही मुस्तैद एसीबी के सादे कपड़ों में तैनात अधिकारियों ने उसे दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से रिश्वत की पूरी नकदी बरामद कर ली गई, जिसकी निशानदेही पर तुरंत वीडियोग्राफी और अन्य साक्ष्य जुटाए गए।
इस औचक धरपकड़ के दौरान नगर परिषद परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अचानक हुई इस कार्रवाई की भनक लगते ही कई कर्मचारी अपने काउंटर छोड़कर नदारद हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टीम ने मौके पर पहुंचकर न केवल आरोपी से पूछताछ की, बल्कि उसके कार्यस्थल की फाइलों और दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में ले लिया ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने इससे पहले कितने लोगों को इस तरह परेशान किया है।
| जांच एजेंसी | कार्रवाई का स्थान | गिरफ्तार आरोपी | बरामद राशि | संबद्ध विभाग |
|---|---|---|---|---|
| एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB कैथल) | नगर परिषद कार्यालय, कैथल | कंप्यूटर ऑपरेटर (ठेका आधारित) | ₹18,000 नकद | शहरी स्थानीय निकाय विभाग, हरियाणा |
अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल और प्रशासनिक जांच
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद नगर परिषद के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय जानकारों का मानना है कि केवल एक निचले स्तर या अनुबंध पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अकेले इतने बड़े स्तर पर बिल पास करने का जोखिम नहीं उठा सकता। इसके पीछे विभागीय मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। एसीबी अब इस एंगल पर भी गहराई से तहकीकात कर रही है कि इस रिश्वतखोरी के खेल में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं, जिनके इशारे पर फाइलों को रोका जाता था।
जांच दल ने आरोपी को हिरासत में लेकर उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर की हार्ड डिस्क और अन्य दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है। पूछताछ के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां या विभागीय गाज गिर सकती है। सरकार और उच्चाधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर तैनात हो।
"भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। कैथल नगर परिषद में रिश्वतखोरी की शिकायत मिलने पर हमारी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। मामले में संलिप्त अन्य लोगों की भी गहनता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" - एंटी करप्शन ब्यूरो, हरियाणा टीम
स्थानीय जनजीवन और व्यवस्था पर प्रभाव
इस घटना ने कैथल और आसपास के शहरी क्षेत्रों में स्थानीय ठेकेदारों, दुकानदारों और आम जनता की परेशानियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। नगर निकाय जैसे संस्थानों में जहां लोगों को बुनियादी सुविधाएं और अपने विकास कार्यों के भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं, वहां इस तरह के घूसखोरी के मामले जनता का प्रशासनिक तंत्र से भरोसा डिगाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ठेकेदारों को अपने ही मेहनत के पैसे पाने के लिए यदि इस प्रकार सरकारी बाबुओं की मुट्ठी गर्म करनी पड़े, तो विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ता है। व्यापारियों और नागरिकों ने मांग की है कि इस तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त सभी जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त से सख्त मिसाल पेश की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को अंजाम देने की हिम्मत न जुटा सके।




