हरियाणा की अनाज मंडियों में इस बार धान की आवक और खरीद ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, लेकिन दिवाली जैसे पावन पर्व पर प्रदेश के कई किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, धान खरीद की कुल एमएसपी राशि का लगभग 1.70 प्रतिशत हिस्सा, जो करीब 161.50 करोड़ रुपये बनता है, अभी भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते अटका हुआ है। हालांकि, विभाग का दावा है कि अधिकांश किसानों को उनकी मेहनत का फल मिल चुका है, लेकिन त्योहार के समय बकाया राशि का न मिलना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक चुनौती पेश कर रहा है।
मंडियों में फसल आवक, खरीद व एमएसपी दरें
इस खरीफ सीजन में हरियाणा की मंडियों में रौनक देखते ही बन रही है। अब तक मंडियों में कुल 48.91 लाख मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की जा चुकी है। सरकारी एजेंसियों ने तत्परता दिखाते हुए इसमें से 44.27 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पूरी कर ली है, जो कि तय लक्ष्य का लगभग 96.2 प्रतिशत है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकारी खरीद प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और मंडियों में व्यवस्था को सुचारू रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कृषि अर्थशास्त्र के नजरिए से देखें तो राज्य में अब तक कुल 9,493.00 करोड़ रुपये की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) राशि बनती है। इसमें से 9,331.50 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे किसानों के खातों में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया जा चुका है। प्रदेश के 5,53,173 किसान अब तक लाभान्वित हुए हैं, जो कृषि क्षेत्र में डिजिटल भुगतान व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
| मंडी व कृषि विवरण | वर्तमान स्थिति, दरें व प्रबंध |
|---|---|
| कुल निर्धारित एमएसपी राशि | ₹9,493.00 करोड़ |
| सफलतापूर्वक किया गया भुगतान | ₹9,331.50 करोड़ |
| लंबित भुगतान राशि | ₹161.50 करोड़ (1.70%) |
| कुल धान आवक (मंडियों में) | 48.91 लाख मीट्रिक टन |
| सरकारी खरीद का स्तर | 44.27 लाख मीट्रिक टन (96.2%) |
| कुल लाभान्वित किसान | 5,53,173 किसान |
| उठान की स्थिति (Lifting) | 39.90 लाख मीट्रिक टन (90.1%) |
किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश व भुगतान व्यवस्था
सरकार और कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों का भुगतान अभी बकाया है, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रशासनिक सत्यापन और तकनीकी मिलान के कारण यह देरी हुई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बैंक डिटेल और 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर दी गई जानकारी को एक बार पुनः जांच लें। रबी सीजन 2026-27 के लिए भी पोर्टल सक्रिय कर दिया गया है, जिस पर समय रहते पंजीकरण करना अनिवार्य है ताकि भविष्य में खाद और बीज की सब्सिडी का लाभ मिल सके।
भुगतान व्यवस्था को लेकर विभाग का कहना है कि दिवाली के अवकाश के तुरंत बाद शेष 1.7 प्रतिशत राशि को क्लियर करने की प्राथमिकता दी जाएगी। किसानों को अपनी फसल बेचने के बाद जे-फॉर्म और गेट पास की प्रतियों को सुरक्षित रखने का सुझाव दिया गया है, ताकि किसी भी विसंगति की स्थिति में मंडी सचिव कार्यालय से संपर्क किया जा सके।
मौसम, खाद-बीज और फसल सुरक्षा के उपाय
आगामी रबी सीजन को देखते हुए किसानों के लिए मौसम की सटीक जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। हरियाणा और पंजाब में स्थापित किए जा रहे 19 नए वेदर स्टेशन किसानों को बुवाई और सिंचाई के लिए सटीक वैज्ञानिक डेटा प्रदान करेंगे। वर्तमान में भाखड़ा बांध में जलस्तर 38 फीट और पौंग बांध में 22 फीट की गिरावट दर्ज की गई है, जो आगामी सिंचाई चक्र के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में किसानों को कम पानी वाली फसलों और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को अपनाने की सलाह दी जा रही है।
मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखते हुए, विशेषज्ञों ने धान की कटाई के बाद अवशेष न जलाने और खाद के संतुलित प्रयोग पर जोर दिया है। रबी फसलों की बुवाई के लिए बीजों का चयन कृषि विज्ञान केंद्रों की सिफारिशों के आधार पर ही करें। फसल सुरक्षा के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) का पालन करना आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से लाभकारी सिद्ध होगा।
प्रशासनिक प्रबंध और उठान की स्थिति
मंडियों में जगह की कमी न हो, इसके लिए धान के उठान की प्रक्रिया को तेज किया गया है। अब तक खरीदे गए धान का 90.1 प्रतिशत हिस्सा यानी 39.90 लाख मीट्रिक टन गोदामों और राइस मिलों तक पहुंचाया जा चुका है। हालांकि, अभी भी 4.37 लाख मीट्रिक टन धान मंडियों में खुले आसमान के नीचे या अस्थाई शेड में रखा है। प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए उठान कार्य में कोई ढिलाई न बरती जाए।
मंडी समितियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उठान के दौरान अनाज की बर्बादी न हो और लेबर व ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था चाक-चौबंद रहे। किसानों की सुविधा के लिए मंडियों में पेयजल और विश्राम की उचित व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है, ताकि फसल बेचने आए अन्नदाता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।





