शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
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सिरसा में पराली जलाने पर कृषि विभाग सख्त, 9 किसानों पर जुर्माना, एक के खिलाफ FIR दर्ज

सिरसा: धान की कटाई का सीजन शुरू होते ही सिरसा जिले में पराली जलाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं. खेतों में फसल अवशेष जलाने के मामलों को लेकर कृषि विभाग ने।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
6 नवंबर 2026 को 06:20 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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सिरसा में पराली जलाने पर कृषि विभाग सख्त, 9 किसानों पर जुर्माना, एक के खिलाफ FIR दर्ज
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •सिरसा में पराली जलाने पर कृषि विभाग सख्त, 9 किसानों पर जुर्माना, एक के खिलाफ FIR
  • •प्रामाणिक तथ्यों और किसान एवं कृषि के दिशा-निर्देशों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट।
  • •हरियाणा के संबंधित क्षेत्र व नागरिकों पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव।
  • •ताज़ा व विश्वसनीय अपडेट्स के लिए दैनिक रियलिटी से जुड़े रहें।

हरियाणा (दैनिक Reality विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): सिरसा: धान की कटाई का सीजन शुरू होते ही सिरसा जिले में पराली जलाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं. खेतों में फसल अवशेष जलाने के मामलों को लेकर कृषि विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है. विभाग की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. अब तक जिले में पराली जलाने के 9 मामले सामने आए हैं. इन सभी मामलों में संबंधित किसानों पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि एक किसान के खिलाफ FIR भी दर्ज करवाई गई है.9 मामलों में कार्रवाई, FIR की प्रक्रिया जारी: कृषि विभाग ने पराली जलाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित किसानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है. अब तक 9 किसानों पर जुर्माना लगाया जा चुका है. वहीं, एक किसान के खिलाफ पराली जलाने के मामले में केस दर्ज करवाया गया है. विभाग की ओर से अन्य मामलों में भी FIR दर्ज करवाने की प्रक्रिया जारी है. प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. विभागीय कार्रवाई के बाद किसानों में भी हलचल देखने को मिल रही है.1.59 लाख हेक्टेयर में हुई धान की बिजाई: इस पूरे मामले में कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. जोगिंद्र सिंह ने कहा कि, इस बार सिरसा जिले में करीब 1 लाख 59 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बिजाई की गई है. इसमें से अब तक लगभग 50 प्रतिशत फसल की कटाई हो चुकी है. कटाई का काम आगे बढ़ने के साथ ही खेतों में फसल अवशेषों के प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ रही है. विभाग की टीमें लगातार खेतों पर नजर रख रही हैं, ताकि पराली जलाने की घटनाओं को रोका जा सके. 300 बेलर से किया जा रहा पराली प्रबंधन: डॉ. जोगिंद्र सिंह ने आगे कहा कि, कृषि विभाग की ओर से किसानों को पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. जिले में करीब 300 बेलर मशीनों का इस्तेमाल धान की पराली के प्रबंधन के लिए किया जा रहा है. इन मशीनों की मदद से पराली की गांठें बनाकर उसे खेतों से हटाने और अन्य उपयोग में लाने में मदद मिलती है. इसके अलावा सरकार की ओर से पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सब्सिडी भी दी जा रही है. पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान: धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले फसल अवशेष किसानों के सामने बड़ी चुनौती होते हैं. अगली फसल की बिजाई के लिए खेत जल्दी तैयार करने के उद्देश्य से कुछ किसान पराली में आग लगा देते हैं. हालांकि, इससे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है और आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकता है. इसके साथ ही आग लगाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व प्रभावित होते हैं, जिससे जमीन की उर्वरक क्षमता पर असर पड़ता है.किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील: डॉ. जोगिंद्र सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि, किसान पराली को आग लगाने की बजाय उसका उचित प्रबंधन करें. इसके लिए आधुनिक कृषि यंत्रों और उपलब्ध तकनीकों का इस्तेमाल करें. सरकार की ओर से पराली प्रबंधन के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है. किसान इसका लाभ उठाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं. जागरूकता के साथ कार्रवाई भी जारी: कृषि विभाग की ओर से गांवों में किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जा रहा है. किसानों को पराली को खेत में मिलाने और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से उसका निपटान करने की सलाह दी जा रही है. विभाग का कहना है कि पराली जलाने से बचने के लिए संसाधन और तकनीकी विकल्प उपलब्ध हैं. इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. अब देखना होगा कि कृषि विभाग की सख्ती, जुर्माने और जागरूकता अभियान से सिरसा जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर कितनी रोक लग पाती है. देश के जंगलों में पानी खत्म!। हरियाणा की मंडियों में किसानों की सुविधा और फसलों की सुचारू खरीद को लेकर व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

मंडियों में फसल आवक, खरीद व एमएसपी दरें

मंडियों में फसल की आवक लगातार जारी है और खरीद एजेंसियों द्वारा तय मानकों के अनुसार खरीद की जा रही है। 16.2% झील-झरने और तालाब सूखे, क्या अल नीनो है जिम्मेदार?। सिरसा में पराली जलाने पर कृषि विभाग सख्त, 9 किसानों पर जुर्माना, एक के खिलाफ FIR दर्ज धनतेरस पर गिर गए सोने और चांदी के भाव, जानें आपके शहर में क्या है रेट, 1.42 लाख पर आया सोना 10 तारीख के बाद साथ बैठेंगे'... शरद पवार के एक बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी अटकलें तेज भिवानी में ACB का बड़ा एक्शन, एक लाख रुपये रिश्वत लेते AFSO मुकेश रंगा गिरफ्तार, नया राशन डिपो देने के मांगे थे डेढ़ लाख।

मंडी व कृषि विवरणवर्तमान स्थिति, दरें व प्रबंध
फसल / संदर्भसिरसा में पराली जलाने पर कृषि विभाग सख्त, 9 किसानों पर जुर्म
प्रमुख मंडियांहरियाणा की संबंधित अनाज मंडियां
खरीद व्यवस्थान्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत सुचारू
भुगतान माध्यमडीबीटी द्वारा सीधा बैंक खाते में

किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश व भुगतान व्यवस्था

किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधा भुगतान भेजा जा रहा है। खरीद के साथ-साथ मंडियों से फसल के उठान की गति भी तेज रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम, खाद-बीज और फसल सुरक्षा के उपाय

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार फसलों की देखभाल करने और आगामी बिजाई के लिए प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करने की सलाह दी है।

प्रशासनिक प्रबंध और उठान की स्थिति

मार्केट कमेटियों को निर्देश दिए गए हैं कि मंडियों में बारदाने, पेयजल और किसानों के विश्राम की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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