सोमवार, 2 नवंबर 2026
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नूंह के गन्ना किसानों को सरकारी भाव से ₹120 तक अधिक मिल रहे, निजी खरीदार दे रहे प्रीमियम कीमत

नूंह (मेवात) के गन्ना किसान सरकार द्वारा तय किए गए ₹430 प्रति क्विंटल के भाव से कहीं अधिक, ₹500 से ₹550 प्रति क्विंटल पर अपना गन्ना निजी खरीदारों को बेचकर अच्छी।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
2 नवंबर 2026 को 11:02 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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नूंह के गन्ना किसानों को सरकारी भाव से ₹120 तक अधिक मिल रहे, निजी खरीदार दे रहे प्रीमियम कीमत
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •नूंह जिले के गन्ना किसानों को निजी खरीदारों से मिल रहा है ₹500-550 प्रति क्विंटल का भाव।
  • •हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित ₹430 प्रति क्विंटल के सरकारी खरीद भाव से ₹70-120 अधिक मिल रहे।
  • •जिले में सरकारी चीनी मिल न होने के कारण निजी बाजार व्यवस्था से किसानों को हो रहा सीधा लाभ।
  • •गन्ने की खेती से किसानों, बेरोजगार युवाओं और पशुपालक परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

नूंह, हरियाणा: मेवात क्षेत्र के नूंह जिले में गन्ना किसानों के लिए इस बार की फसल विशेष मिठास घोल रही है। जहां राज्य सरकार ने हाल ही में गन्ने का सरकारी खरीद भाव बढ़ाया है, वहीं नूंह के किसान पहले से ही निजी खरीदारों से कहीं अधिक मूल्य प्राप्त कर रहे हैं। यह स्थिति जिले की अनूठी कृषि-अर्थव्यवस्था को दर्शाती है, जहां सरकारी चीनी मिलों की अनुपस्थिति ने एक वैकल्पिक और अधिक लाभकारी बाजार विकसित किया है।

स्थानीय किसानों को अपने गन्ने के लिए ₹500 से ₹550 प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं, जो हरियाणा सरकार द्वारा घोषित नए सरकारी खरीद भाव ₹430 प्रति क्विंटल से ₹70 से ₹120 अधिक है। यह अतिरिक्त आय न केवल गन्ना उत्पादकों के लिए वरदान साबित हो रही है, बल्कि इससे स्थानीय बेरोजगार युवाओं और पशुपालक परिवारों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल रहा है।

गन्ने की खेती से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा

नूंह जिले के मामलीका, पापड़ा, फलेंडी और बादली जैसे गांवों में सैकड़ों एकड़ भूमि पर गन्ने की खेती होती है। हालांकि सिंचाई के सीमित साधनों के कारण जिले में गन्ने का कुल रकबा उतना व्यापक नहीं है जितना अन्य क्षेत्रों में, लेकिन जहां भी इसकी खेती होती है, वहां के किसान अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। इस क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि बन गई है।

कच्चे गन्ने की इस प्रीमियम खरीद का सबसे बड़ा कारण जिले में सरकारी चीनी मिल का न होना है। इस वजह से, अधिकांश गन्ना सीधे खेतों से ही निजी खरीदारों द्वारा उठाया जाता है, जिससे किसानों को मिलों तक गन्ना ले जाने की परेशानी और खर्च से मुक्ति मिलती है और उन्हें तुरंत बेहतर कीमत मिल जाती है।

विवरणजानकारी
जिलानूंह (मेवात), हरियाणा
फसलगन्ना
निजी खरीद मूल्य₹500-550 प्रति क्विंटल
नया सरकारी खरीद मूल्य₹430 प्रति क्विंटल
निजी खरीद का अतिरिक्त लाभ₹70-120 प्रति क्विंटल (सरकारी भाव से अधिक)
प्रति एकड़ औसत आय₹1.5 - ₹2 लाख
सरकारी भाव वृद्धि लक्ष्यअगले 2 वर्षों में ₹35 तक
प्रमुख गन्ना उत्पादक गांवमामलीका, पापड़ा, फलेंडी, बादली

सरकार की नीति और नूंह का अनूठा बाजार

दीपावली के अवसर पर हरियाणा सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों को राहत देते हुए गन्ने का सरकारी खरीद भाव ₹415 से बढ़ाकर ₹430 प्रति क्विंटल कर दिया है। सरकार ने अगले दो वर्षों में इस भाव में ₹35 तक की बढ़ोतरी का लक्ष्य भी रखा है, जिससे हरियाणा देश में सबसे अधिक भाव पर गन्ने की खरीद करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। हालांकि, नूंह जिले की विशेष बाजार व्यवस्था के चलते, सरकारी भाव में यह वृद्धि मुख्य रूप से उन किसानों को लाभ पहुंचाएगी जो अपना गन्ना सरकारी चीनी मिलों में बेचते हैं। नूंह के किसान पहले से ही बाजार से कहीं अधिक मूल्य प्राप्त कर रहे हैं।

यह स्थिति बताती है कि कैसे स्थानीय बाजार की मांग और आपूर्ति सरकारी नीतियों से परे जाकर किसानों के लिए अधिक लाभकारी हो सकती है। नूंह में, यह एक आत्मनिर्भर आर्थिक चक्र को जन्म दे रहा है, जहां किसान बेहतर मूल्य पाते हैं और स्थानीय युवा रोजगार के अवसर तलाशते हैं।

किसान आरिफ ने बताया, "एक एकड़ में तैयार गन्ने की फसल करीब डेढ़ से दो लाख रुपये तक में बिक जाती है। यह हमारी आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और यह भी खुशी की बात है कि इससे हमारे स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिल रहा है।"

रोजगार और पशुपालकों के लिए भी लाभ

गन्ने की खेती केवल किसानों की आय तक सीमित नहीं है। यह बेरोजगार युवाओं के लिए भी रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है। युवा खेतों से ₹500 से ₹550 प्रति क्विंटल के भाव पर गन्ना खरीदकर ट्रैक्टर-ट्रॉली और तीन-पहिया वाहनों में भरते हैं, और फिर इसे राजस्थान सहित दूरदराज के इलाकों में ले जाकर बेचते हैं। इस प्रक्रिया से उन्हें अच्छी कमाई हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि बढ़ रही है।

इसके अतिरिक्त, गन्ने की छिलाई के दौरान कई गांवों की महिलाएं पशुओं के लिए हरा चारा भी ले जाती हैं। यह चारा पशुपालकों के लिए पूरे सीजन पशुओं की खुराक की उपलब्धता सुनिश्चित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पौष्टिक चारे से पशुओं में दूध की मात्रा में भी वृद्धि होती है, जिससे पशुपालकों को दोहरा लाभ मिलता है। यह एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र है जो गन्ने की फसल के हर पहलू का उपयोग करता है और स्थानीय समुदाय के विभिन्न वर्गों को लाभान्वित करता है।

आगे की आर्थिक संभावनाएं और प्रशासनिक दृष्टिकोण

नूंह में गन्ने की खेती और उसके निजी बाजार की यह सफलता एक महत्वपूर्ण आर्थिक मॉडल प्रस्तुत करती है। यह दर्शाता है कि स्थानीय बाजार की गतिशीलता, जब सही परिस्थितियों में हो, तो सरकारी हस्तक्षेप के बिना भी किसानों को बेहतर मूल्य दिला सकती है। भविष्य में, राज्य सरकार को इस तरह के सफल स्थानीय मॉडलों का अध्ययन करना चाहिए ताकि अन्य क्षेत्रों में भी किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

यह स्थिति यह भी सुझाव देती है कि यदि नूंह में एक सरकारी चीनी मिल स्थापित की जाती है, तो यह किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा और अधिक विकल्प पैदा कर सकता है। हालांकि, वर्तमान में निजी खरीदारों द्वारा दिए जा रहे प्रीमियम मूल्य को देखते हुए, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि कोई भी नया ढांचा किसानों के मौजूदा लाभ को कम न करे। यह एक सतत विकास का मार्ग है जिसमें किसानों की आर्थिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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