हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): हरियाणा सरकार ने प्रदेश के 10,557 अतिथि शिक्षकों को नियमित करने से इन्कार कर दिया है।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
इसमें नियमों का हवाला देकर बताया गया कि नियमित करने का प्रावधान नहीं है।। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय दहिया ने यह पुष्टि की कि अतिथि शिक्षकों को नियमित नहीं किया जा सकता।। इस संबंध में पहले ही स्पष्ट स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया जा चुका है।। हालांकि सभी अतिथि अध्यापकों को 58 तक नौकरी की सुरक्षा सरकार दे रही है।।
| न्यायिक बिंदु | अदालत व मामले का विवरण |
|---|---|
| संबंधित न्यायालय / पीठ | कुरुक्षेत्र ज़िला एवं सत्र न्यायालय |
| मुकदमा / याचिका संदर्भ | हरियाणा में 10,757 अतिथि शिक्षकों को झटका |
| प्रमुख आंकड़े / राशि / तथ्य | 15 नवंबर, 18 जून, 25 मई, 27 अक्तूबर |
| अदालत का ताज़ा आदेश | संबंधित विभाग व प्रशासन द्वारा निगरानी जारी |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ के महासचिव भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वार्ता के दौरान अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा विभाग से जारी स्पीकिंग ऑर्डर में स्पष्ट बताया गया कि अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का प्रावधान ही नहीं है।। भूपेंद्र सिंह ने दावा किया कि 16 और 18 जून 2014 की तीन साल की नियमितीकरण नीति में ऐसी कोई शर्त नहीं है जिसके आधार पर अतिथि अध्यापकों को अपात्र बताया जा सके।। नियमितीकरण की मांग को लेकर कुरुक्षेत्र के लघु सचिवालय में संघ का धरना 134वें दिन भी जारी रहा।। उन्होंने कहा कि संघ ने 14-15 नवंबर को कुरुक्षेत्र में बड़ा प्रदर्शन करने और स्पीकिंग ऑर्डर की प्रतियां जलाने का एलान किया है।। कॉलेज कैडर के अतिथि प्राध्यापकों को नियमित किया राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य मेवा सिंह पिलानिया, ईश्वर बरवाला और महेश शर्मा ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों के बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण के खिलाफ नकारात्मक स्पीकिंग ऑर्डर जारी किए हैं।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी प्रावधानों को गंभीरता से परखा गया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती निर्देश का सीधा प्रभाव केस की आगामी सुनवाई और आगे की कानूनी कार्यवाही पर पड़ेगा। संबंधित पक्षों की निगाहें अब अदालत के आगामी आदेशों पर टिकी हैं।
अतिथि अध्यापकों की नियुक्ति हरियाणा सरकार के आदेशों के तहत गठित कमेटियों ने मेरिट के आधार पर की थी।। नियमित नहीं करने के पीछे विभाग का तर्क शिक्षा विभाग के अनुसार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति 2005 से स्कूलों में शिक्षकों की कमी और कार्यभार के आधार पर प्रति पीरियड भुगतान व्यवस्था के तहत की गई थी।। इन नियुक्तियों में नियमित भर्ती की तरह केंद्रीकृत चयन प्रक्रिया और आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ।। विभाग ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल अनुभव के आधार पर नियमित करना उचित नहीं है।। हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा अधिनियम 2019 भी अतिथि शिक्षकों को सेवा जारी रखने की सुरक्षा देता है लेकिन नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं देता।। हाई कोर्ट का आदेश हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 25 मई 2026 को नियमितीकरण के दावों पर 18 जून 2014 की नीति के तहत हरियाणा सरकार को विचार करने के निर्देश दिए थे।। राज्य सरकार की अपील पर छह अगस्त को खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार तथ्यों और सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर विचार कर फैसला ले सकती है।। पात्रता नहीं मिलने पर कारण बताते हुए शिक्षा विभाग की तरफ से आदेश जारी किया जा सकता है।। इसी के बाद शिक्षा विभाग की तरफ से कमेटी गठित कर नियमों पर समीक्षा की।। चार शिक्षकों की याचिका पर जारी हुआ था स्पीकिंग ऑर्डर हाई कोर्ट में चार पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) की याचिका पर आदेशानुसार शिक्षा विभाग ने नियमों की समीक्षा कर 27 अक्तूबर 2026 को स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया गया था।। इनमें गुरुग्राम के बादशाहपुर स्कूल की अर्ति गौर, करनाल के कटलेहड़ी स्कूल के भूपेंद्र पाल सिंह और नीतू तथा कुरुक्षेत्र के बानी स्कूल के निर्मल सिंह शामिल हैं।। विभाग का तर्क है कि लंबे समय तक सेवा देने और निर्धारित योग्यता रखने मात्र से नियमितीकरण का अधिकार नहीं मिल जाता।। जो अतिथि शिक्षक नियमों को पूरा नहीं कर रहे सिर्फ उन्हें ही नियमित नहीं करने का आदेश जारी किए जा सकते हैं।।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





