हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): Army Toll Tax Free : नई दिल्ली।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
इसके तहत सशस्त्र बलों के पात्र कर्मियों के निजी वाहनों को टोल शुल्क से छूट देने के लिए डिजिटल पहचान प्रणाली विकसित की जा सकती है।। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच इस विषय पर बातचीत शुरू हो गई है।। वर्तमान में सैन्यकर्मियों को अपने निजी वाहनों पर टोल छूट लेने के लिए टोल प्लाजा पर पहचान पत्र दिखाना पड़ता है।। लेकिन मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MKFF) प्रणाली में वाहनों को बिना रोके टोल शुल्क काटा जाता है।।
| समाचार बिंदु | ताज़ा विवरण व स्थिति |
|---|---|
| मुख्य घटनाक्रम | देश के सैनिकों का टोल टैक्स होगा फ्री, केंद्र सरकार बना |
| संबंधित क्षेत्र / ज़िला | दिल्ली |
| संबंधित संस्था / विभाग | संबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन |
| प्रमुख तथ्य व आंकड़े | 14 लाख, 075 रु |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
ऐसे में पात्र सैन्यकर्मियों के निजी वाहनों की पहचान नहीं होने पर उन्हें ई-चालान भेजे जाने की समस्या सामने आ रही है।। फास्टैग के जरिए छूट देने पर विचार नई व्यवस्था के लिए कई विकल्पों पर चर्चा की जा रही है।। एक प्रस्ताव के अनुसार, पात्र वाहनों पर सामान्य फास्टैग लगाया जा सकता है और उसके वार्षिक पास का खर्च रक्षा मंत्रालय की ओर से वहन किया जा सकता है।। हालांकि, इस खर्च की जिम्मेदारी किस मंत्रालय की होगी, इस पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।। दूसरे विकल्प के तहत सैन्यकर्मियों के निजी वाहनों के लिए विशेष फास्टैग जारी किए जा सकते हैं।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
इनकी मदद से वाहनों की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड तो रखा जाएगा, लेकिन टोल शुल्क नहीं काटा जाएगा।। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र वाहन बिना किसी रुकावट के टोल प्लाजा से गुजर सकें और उन्हें अनावश्यक ई-चालान का सामना न करना पड़े।। 2028 तक 1,150 टोल प्लाजा को जोड़ने की योजना देश में एमएलएफएफ तकनीक का विस्तार करने की योजना है।। वित्त वर्ष 2028 के अंत तक करीब 1,150 टोल प्लाजा को इस प्रणाली के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है।। इस तकनीक में सड़क पर बैरियर लगाने की जरूरत नहीं होती।। टोल प्लाजा पर लगे कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट पहचानते हैं, जबकि रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक से फास्टैग की जानकारी प्राप्त की जाती है।। इसके आधार पर वाहन से टोल शुल्क स्वतः काट लिया जाता है।। फिलहाल देश के 10 से कम टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था काम कर रही है।। 100 से अधिक टोल प्लाजा के लिए निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी हैं।। मंत्रालय को चालू वित्त वर्ष के अंत तक 300 से 400 अन्य टोल प्लाजा के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।। 14 लाख सक्रिय सैन्यकर्मियों से जुड़ा मामला भारत की तीनों सेनाओं में लगभग 14 लाख सक्रिय सैन्यकर्मी हैं।। हालांकि, इनमें से कितने कर्मियों के निजी वाहन प्रस्तावित टोल छूट के पात्र होंगे, इसकी सटीक संख्या अभी उपलब्ध नहीं है।। वर्तमान फास्टैग वार्षिक पास की कीमत 2026-27 के लिए 3,075 रुपये है।। इस पास के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर एक वर्ष में 200 बार यात्रा की जा सकती है।। वाहनों की पहचान और सत्यापन भी होगा जरूरी प्रस्तावित व्यवस्था में पात्र वाहनों की पहचान के लिए रक्षा मंत्रालय के डेटाबेस का इस्तेमाल किया जा सकता है।। इसके अलावा विशेष फास्टैग जारी करने या सामान्य फास्टैग के माध्यम से टोल राशि की भरपाई करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





