राजस्थान के औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र कोटा के बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर मजबूती देने के लिए एक बड़ी योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कोटा शहर के डीसीएम रोड से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए एक नई 'कनेक्टिविटी लाइफलाइन' को मंजूरी दी है। लगभग 1600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह 23 किलोमीटर लंबा फोरलेन हाईवे न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य को भी पूरी तरह बदल कर रख देगा।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कोटा शहर की मुख्य आबादी और व्यापारिक केंद्रों को देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से सीधे जोड़ना है। वर्तमान में शहर से एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए भारी यातायात और संकरी सड़कों का सामना करना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। नया हाईवे बनने के बाद, व्यापारियों और आम जनता को जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी और यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा।
परियोजना का तकनीकी विवरण और प्रमुख आंकड़े
NHAI की इस परियोजना को इंजीनियरिंग के आधुनिक मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। यह फोरलेन हाईवे न केवल वाहनों की गति को बढ़ाएगा, बल्कि सुरक्षा मानकों पर भी खरा उतरेगा। परियोजना की विस्तृत रूपरेखा नीचे दी गई तालिका में समझी जा सकती है:
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कुल लंबाई | 23 किलोमीटर |
| सड़क का प्रकार | फोरलेन (4-Lane) हाईवे |
| कुल अनुमानित बजट | ₹1600 करोड़ (लगभग) |
| प्रारंभिक बिंदु | डीसीएम रोड (बॉम्बे योजना के पीछे), कोटा |
| अंतिम बिंदु | बालापुरा इंटरचेंज (दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे) |
| समय की बचत | 40 मिनट से घटकर 23 मिनट |
| कार्यकारी संस्था | भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) |
इन क्षेत्रों से होकर गुजरेगा नया हाईवे कॉरिडोर
इस नए हाईवे का रूट चार्ट इस तरह तैयार किया गया है कि यह शहर के बाहरी इलाकों और प्रमुख कृषि भूमियों को कवर करते हुए सीधे एक्सप्रेसवे तक पहुंचे। एनएचएआई के परियोजना निदेशक संदीप अग्रवाल के अनुसार, यह 23 किलोमीटर लंबा मार्ग कोटा के डीसीएम रोड पर बॉम्बे योजना के पीछे से शुरू होगा। यहाँ से यह मुख्य नहर के किनारे-किनारे आगे बढ़ते हुए श्रीराम नगर क्षेत्र में प्रवेश करेगा।
इसके बाद हाईवे का मार्ग ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्रों जैसे मोतीपुरा, प्रहलादपुरा, रामनगर और अभयपुरा से होकर गुजरेगा। परियोजना के अंतिम चरण में यह रानीपुरा, गांदीफली और भगवानपुरा की कृषि भूमि को पार करते हुए बालापुरा इंटरचेंज पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के साथ मिल जाएगा। इस रूट के चयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि कम से कम विस्थापन हो और अधिक से अधिक लोगों को परिवहन का लाभ मिले।
आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स को मिलेगी नई गति
इस हाईवे के निर्माण का सबसे बड़ा लाभ कोटा की प्रसिद्ध भामाशाह मंडी को होने वाला है। मंडी से निकलने वाले सैकड़ों मालवाहक ट्रकों को अभी शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से गुजरना पड़ता है, लेकिन नया हाईवे उन्हें सीधे एक्सप्रेसवे तक पहुंच प्रदान करेगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और कोटा का व्यापार दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंच सकेगा।
"यह 23 किलोमीटर लंबा फोरलेन हाईवे कोटा के विकास में गेम-चेंजर साबित होगा। डीसीएम रोड से बालापुरा इंटरचेंज तक की यह कनेक्टिविटी न केवल यात्रा समय को कम करेगी, बल्कि प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए भी एक मजबूत आधार प्रदान करेगी। हम इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
— संदीप अग्रवाल, परियोजना निदेशक, NHAI
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और भविष्य की संभावनाएं
कोटा में प्रस्तावित नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के दृष्टिकोण से भी यह सड़क परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। एयरपोर्ट के संचालन के बाद यात्रियों को शहर तक पहुंचने के लिए एक उच्च गति वाले मार्ग की आवश्यकता होगी, जिसे यह नया हाईवे पूरा करेगा। इसके अलावा, हाईवे के किनारे नए औद्योगिक क्षेत्रों और टाउनशिप के विकसित होने की प्रबल संभावनाएं हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।
प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण और प्रारंभिक सर्वेक्षण की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। NHAI का लक्ष्य है कि इस परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि जनता को इसका लाभ जल्द मिल सके। आने वाले समय में यह हाईवे कोटा को राजस्थान के एक प्रमुख 'ट्रांसपोर्ट हब' के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।





