सोमवार, 2 नवंबर 2026
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वर्किंग महिलाओं में देर से मां बनने का ट्रेंड, आखिर क्यों 35 के बाद बढ़ जाती है हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, इन जोखिमों से रहें सावधान

करियर, आर्थिक स्थिरता और बदलती जीवनशैली के बीच अब महिलाएं मातृत्व की योजना पहले की तुलना में देर से बना रही हैं. 35 या 40 साल की उम्र के बाद मां बनना अब।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
2 नवंबर 2026 को 05:52 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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वर्किंग महिलाओं में देर से मां बनने का ट्रेंड, आखिर क्यों 35 के बाद बढ़ जाती है हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, इन जोखिमों से रहें सावधान
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खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •करियर, आर्थिक स्थिरता और बदलती जीवनशैली के बीच अब महिलाएं मातृत्व की योजना पहले की तु...
  • •प्रशासनिक व संबंधित विभाग ने मामले पर लिया त्वरित संज्ञान, जांच जारी।
  • •चंडीगढ़ सहित प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर रखी जा रही है निरंतर नजर।
  • •विस्तृत तथ्यों व अग्रिम अपडेट्स के लिए दैनिक रियलिटी से जुड़े रहें।

हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): करियर, आर्थिक स्थिरता और बदलती जीवनशैली के बीच अब महिलाएं मातृत्व की योजना पहले की तुलना में देर से बना रही हैं. 35 या 40 साल की उम्र के बाद मां बनना अब असामान्य नहीं है. हालांकि, बढ़ती उम्र के साथ गर्भधारण में कुछ चुनौतियां और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं. ऐसे में सही समय पर जांच, विशेषज्ञ की सलाह और नियमित देखभाल गर्भावस्था को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाती है.करियर के कारण देर से मां बनने का ट्रेंड: इस बारे में अधिक जानकारी के लिए दैनिक रियलिटी ने चंडीगढ़ के कोकून हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. श्रुति कैथ से बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, आजकल महिलाएं पढ़ाई, करियर और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देते हुए मातृत्व की योजना आगे बढ़ा रही हैं. शादी में देरी, निजी परिस्थितियां और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके कारण हो सकती हैं. चंडीगढ़ में मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के बीच कई महिलाएं गर्भधारण से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी समझती हैं. वह कामकाजी महिलाओं की जटिल गर्भावस्थाओं की देखभाल भी करती हैं. 35 के बाद प्रजनन क्षमता में आती है गिरावट: डॉ. श्रुति कैथ ने बताया कि, बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है. 35 से 40 साल के बाद यह गिरावट अधिक तेजी से हो सकती है. इसकी प्रमुख वजह अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता में बदलाव है. उम्र बढ़ने के साथ अंडाणुओं में क्रोमोसोम संबंधी गड़बड़ियों की आशंका भी बढ़ती है. इससे गर्भधारण में परेशानी, गर्भपात और बच्चे में कुछ आनुवंशिक स्थितियों का जोखिम बढ़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि इस उम्र में गर्भावस्था सुरक्षित नहीं हो सकती. कई महिलाएं 35 से 40 साल के बाद भी स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं. जोखिम महिला की उम्र, स्वास्थ्य और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करता है. डायबिटीज से हाई ब्लड प्रेशर तक बढ़ सकती हैं ये परेशानियां: डॉ. कैथ ने आगे कहा कि, 35 से 40 साल के बाद गर्भावस्था में कुछ जटिलताओं की आशंका बढ़ सकती है. इनमें गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और प्री-एक्लेम्पसिया प्रमुख हैं. प्री-एक्लेम्पसिया में गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित हो सकते हैं. समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर स्थिति बन सकती है. इसके अलावा गर्भपात, समय से पहले प्रसव, बच्चे का कम वजन और सिजेरियन डिलीवरी की संभावना भी बढ़ सकती है. 40 साल के बाद कुछ जोखिम और अधिक बढ़ सकते हैं. मोटापा, थायरॉइड, डायबिटीज या पहले से हाई ब्लड प्रेशर होने पर अतिरिक्त निगरानी जरूरी हो जाती है. सिर्फ अच्छी डाइट से नहीं रुकते उम्र के जैविक बदलाव: डॉ. श्रुति ने बताया कि, स्वस्थ जीवनशैली गर्भावस्था के लिए शरीर को तैयार करने में मदद करती है, लेकिन उम्र से जुड़े जैविक बदलाव अपनी जगह रहते हैं. संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद से महिला का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है. वजन और पोषण की स्थिति को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है. लेकिन केवल डाइट या व्यायाम के जरिए उम्र के साथ होने वाली प्रजनन क्षमता की गिरावट को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है. इसलिए गर्भधारण की योजना बनाते समय उम्र और स्वास्थ्य दोनों को ध्यान में रखना चाहिए. गर्भधारण से पहले ये जांच कराना जरूरी: डॉ. कैथ ने बताया कि, गर्भधारण की योजना बनाने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए. प्री-कन्सेप्शन चेकअप में महिला की मेडिकल हिस्ट्री, पहले की गर्भावस्थाओं, मासिक धर्म, दवाओं और परिवार में आनुवंशिक बीमारी के इतिहास की जानकारी ली जाती है. जरूरत के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, थायरॉइड और हीमोग्लोबिन की जांच कराई जा सकती है. वजन और पोषण का आकलन भी जरूरी है. गर्भधारण से पहले फोलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है, जो बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के शुरुआती विकास से जुड़ी कुछ जन्मजात समस्याओं का जोखिम कम करने में मदद करता है. इसकी सही मात्रा डॉक्टर तय करते हैं. गर्भ ठहरने के बाद नियमित जांच जरूरी: डॉ. श्रुति कैथ ने बताया कि, गर्भ ठहरने के बाद नियमित प्रसव पूर्व जांच यानी एंटीनैटल चेकअप जरूरी हैं. इनमें शुरुआती अल्ट्रासाउंड, ब्लड और यूरिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर की निगरानी और निर्धारित समय पर डायबिटीज की जांच शामिल होती है. बच्चे में क्रोमोसोम संबंधी स्थितियों की आशंका जानने के लिए डॉक्टर स्क्रीनिंग टेस्ट और जरूरत पड़ने पर डायग्नोस्टिक टेस्ट के विकल्प भी समझा सकते हैं. जांच का चुनाव महिला की उम्र, गर्भावस्था और मेडिकल स्थिति के अनुसार किया जाता है. नियमित फॉलोअप से संभावित जटिलताओं की समय रहते पहचान और इलाज संभव हो सकता है. हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का मतलब खतरा तय होना नहीं: हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी को लेकर डॉ. कैथ ने कहा कि, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का मतलब यह नहीं कि गर्भावस्था में कोई गंभीर समस्या जरूर होगी. इसका अर्थ है कि मां या बच्चे के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखने की जरूरत है. ऐसे मामलों में डॉक्टर अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की निगरानी कर सकते हैं. पहले से डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर होने पर गर्भधारण से पहले ही इलाज और दवाओं की समीक्षा जरूरी है. गर्भावस्था में डायबिटीज होने पर खानपान, शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर इंसुलिन से शुगर नियंत्रित की जाती है. प्री-एक्लेम्पसिया का जोखिम कम करने के लिए कुछ महिलाओं को कम मात्रा में एस्पिरिन दी जा सकती है, लेकिन इसे केवल डॉक्टर की सलाह पर लेना चाहिए. गर्भावस्था में व्रत कितना सुरक्षित?: अक्सर लोग प्रेग्नेंसी में व्रत रखते हैं, ऐसे लोगों के लिए डॉ. श्रुति कैथ ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि, गर्भावस्था में शरीर को पर्याप्त पानी, ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है. लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर कम हो सकती है, जबकि पानी न पीने से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है. डायबिटीज, इंसुलिन लेने वाली महिलाओं, हाई या लो ब्लड प्रेशर और लगातार उल्टी की समस्या से जूझ रही महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. चक्कर, बहुत ज्यादा कमजोरी या बेहोशी महसूस होने पर व्रत तोड़कर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए. धार्मिक आस्था के साथ मां और बच्चे की सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है. सही तैयारी से मातृत्व का सफर हो सकता है सुरक्षित: देर से मातृत्व एक व्यक्तिगत फैसला है, लेकिन इसके लिए स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और तैयारी भी जरूरी है. उम्र के साथ कुछ जोखिम बढ़ सकते हैं, मगर नियमित जांच, विशेषज्ञ की सलाह और उचित उपचार से कई जटिलताओं को नियंत्रित किया जा सकता है. गर्भधारण की योजना बनाते समय स्वास्थ्य की समीक्षा और पूरी गर्भावस्था के दौरान नियमित देखभाल मां और बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. वर्किंग महिलाओं में देर से मां बनने का ट्रेंड, आखिर क्यों 35 के बाद बढ़ जाती है हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, इन जोखिमों से रहें सावधान SRK Birthday: 'किंग' से जुड़ीं खास बातें, 3 दशक से लंबे करियर में सबसे अलग कैसे है शाहरुख खान की ये फिल्म?, जानें EICMA में पेश होने से पहले नई Royal Enfield Himalayan 750 का खुलासा, देखें कैसा है डिजाइन पंजाब: निलंबित AAP विधायक कुंवर विजय प्रताप ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया अल नीनो का तिहरा अटैक: 27.4 करोड़ पर भोजन संकट, सर्दी में पड़ रही गर्मी, धान-गेहूं की फसल चौपट। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।

मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?

घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक के पूरे मामले पर स्थानीय अधिकारियों और पुलिस टीमों की पैनी नजर बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक मामले के हर एक पहलू की गहनता से पड़ताल की जा रही है ताकि किसी भी तरह की भ्रांति न रहे और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

समाचार बिंदुताज़ा विवरण व स्थिति
मुख्य घटनाक्रमवर्किंग महिलाओं में देर से मां बनने का ट्रेंड, आखिर क्य
संबंधित क्षेत्र / ज़िलाचंडीगढ़
संबंधित संस्था / विभागसंबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन
प्रमुख तथ्य व आंकड़े40 साल, 27.4 करोड़

अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?

विभागीय स्तर पर प्राथमिक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और उच्चाधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी भेज दी गई है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों से भी आवश्यक जानकारी व साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर

इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था व जनसुविधा पूरी तरह चाक-चौबंद बनी रहे।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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