हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): हरियाणा में धान की खरीद और चावल की डिलीवरी को लेकर राइस मिलर्स और सरकारी एजेंसियों के बीच विवाद बढ़ गया है।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
इसक उनका कहना है कि इस संबंध में सरकार और चंडीगढ़ में वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी गई है।। जिला राइस मिल चेयरमैन नरेश बंसल, उपप्रधान राजिंदर मोंगा, सौरव गुप्ता सहित सभी राइस मिलर्स ने प्रेसवार्ता कर कहा कि पिछले सीजन में चावल की डिलीवरी में हुई देरी के लिए मिलर्स को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार इसकी मुख्य वजह एजेंसियों की ओर से चावल नहीं उठाना और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) समय पर उपलब्ध नहीं कराना है।। मिलर्स का कहना है कि धान अलॉट नहीं होने से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है और मिलों में काम करने वाले मजदूरों व कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है।। 54 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य से ज्यादा खरीद मिलर्स के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के सीजन में केंद्र सरकार ने 54 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य दिया था, लेकिन हरियाणा में इससे अधिक धान की सरकारी खरीद हुई।।
| मंडी व कृषि विवरण | वर्तमान स्थिति व दरें |
|---|---|
| फसल / मुद्दा | हरियाणा में 433 राइस मिल डिफॉल्टर |
| संबंधित मंडियां / ज़िले | करनाल, चंडीगढ़ |
| दरें / एमएसपी / आंकड़े | 54 लाख, 4 लाख, 2.55 लाख, 5.50 करोड़ |
| प्रशासनिक व्यवस्था | संबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
उनका दावा है कि FCI ने निर्धारित मात्रा के चावल की डिलीवरी लेने के बाद जगह की कमी के कारण आगे चावल लेना बंद कर दिया था।। मिलर्स के अनुसार, बाद में प्रदेश सरकार के प्रयासों से 4 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी लेने की अनुमति मिली।। इसके बावजूद करीब 2.55 लाख मीट्रिक टन चावल अभी भी मिलों में पड़ा है।। मिलर्स का कहना है कि वे लंबे समय से इस चावल का रखरखाव कर रहे हैं।। ऐसे में चावल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ रहा है।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
भगवती राइस मिल में रात को कार्रवाई का आरोप मिलर्स ने करनाल की भगवती राइस मिल में अधिकारियों की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।। उनका आरोप है कि पहले दो राइस मिलों की जांच की गई थी और दोनों जगह स्टॉक पूरा मिला था।। इसके बावजूद बाद में रात के समय भगवती राइस मिल में कार्रवाई की गई और मिल मालिक पर दबाव बनाकर करीब 5.50 करोड़ रुपए का चेक लिया गया।। मिलर्स ने कहा कि यदि स्टॉक की जांच करनी थी तो इसे दिन में भी किया जा सकता था।। उनका आरोप है कि रात के समय की गई कार्रवाई से कारोबारियों पर दबाव बनता है और राइस मिलिंग व्यापार की छवि खराब होती है।। उन्होंने इस मामले में उच्च अधिकारियों से शिकायत कर जांच कराने की मांग की है।। हालांकि, इस आरोप पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।। FRK में देरी से फरवरी में शुरू हुई डिलीवरी मिलर्स ने बताया कि करनाल जिले में FRK समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया।। उनके अनुसार, इसी वजह से चावल की डिलीवरी नवंबर के बजाय फरवरी में शुरू हो पाई।। उनका कहना है कि जब डिलीवरी की प्रक्रिया ही देर से शुरू हुई तो तय समय पर चावल जमा नहीं होने की पूरी जिम्मेदारी मिलर्स पर डालना उचित नहीं है।। मिलर्स का आरोप है कि एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।। पिछले सीजन की डिलीवरी पूरी नहीं होने के कारण इस सीजन में धान का अलॉटमेंट नहीं मिला, जिससे मिलों का काम प्रभावित हो रहा है।। 80 प्रतिशत डिलीवरी वालों को भी मिला धान मिलर्स के अनुसार, सरकार ने पहले उन राइस मिलों को धान अलॉट किया, जिन्होंने पिछले सीजन में 100 प्रतिशत चावल की डिलीवरी पूरी कर दी थी।। इसके बाद 80 प्रतिशत डिलीवरी पूरी करने वाले मिलर्स को भी धान अलॉट करने की व्यवस्था की गई।। इससे कई मिलों को काम मिला और मंडियों में धान की खरीद व्यवस्था को सुचारू रखने में मदद मिली।। मिलर्स का कहना है कि करनाल में अभी भी 100 से ज्यादा मिल ऐसे हैं, जिन्हें इस सीजन में धान नहीं मिला।। उन्होंने कहा कि एक राइस मिल से कई परिवारों की आजीविका चलती है।। धान अलॉट नहीं होने से मजदूरों, कर्मचारियों और अन्य कामगारों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।। सरकार से चावल उठाने का समाधान निकालने की मांग मिलर्स ने बताया कि चंडीगढ़ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में चावल की डिलीवरी की समस्या पर चर्चा हुई थी।। बैठक में FCI और संबंधित विभागों के अधिकारियों के सामने समाधान के सुझाव रखे गए।। मिलर्स ने मांग की कि मिलों में पड़े चावल को जल्द उठाया जाए या कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि लंबे समय से रखे स्टॉक का समाधान हो सके।। मिलर्स ने सरकार से डिफॉल्टर घोषित किए गए मिलों के मामलों की समीक्षा करने और उन्हें इस सीजन में धान अलॉट करने पर विचार करने की मांग की।। उनका कहना है कि जब चावल की डिलीवरी में देरी एजेंसियों की ओर से हुई है, तो उसका नुकसान अकेले मिलर्स को नहीं उठाना चाहिए।। This website follows the DNPA Code of Ethics.।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





