हरियाणा के कैथल जिले की अनाज मंडियों में इन दिनों धान की खुशबू के साथ-साथ किसानों की समृद्धि की महक भी चारों ओर बिखरी हुई है। खरीफ सीजन के इस दौर में बारीक धान की आवक ने रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा धान के भावों की हो रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार धान की विभिन्न किस्मों के दाम में 1000 रुपये से लेकर 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक का भारी उछाल देखा जा रहा है। विशेष रूप से मुच्छल और 1718 जैसी प्रीमियम किस्मों ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे किसानों के चेहरों पर छाई रौनक देखते ही बन रही है।
बाजार में धान की किस्मों का ताजा हाल और कीमतों का विश्लेषण
कैथल की अतिरिक्त अनाज मंडी और अन्य खरीद केंद्रों पर मंगलवार को व्यापारिक गतिविधियों में जबरदस्त तेजी देखी गई। मुच्छल धान के भाव ₹4900 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए, जो महज दो दिन पहले ₹4800 के स्तर पर थे। इसी तरह, 1718 किस्म की धान भी ₹4850 प्रति क्विंटल के पार बिक रही है। यदि पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मुच्छल धान ₹3300 से ₹3400 के बीच सिमट गया था, लेकिन इस बार बाजार की बदलती परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय मांग के चलते कीमतों में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
| धान की किस्म | वर्तमान भाव (₹ प्रति क्विंटल) | पिछले वर्ष का भाव (₹) | अनुमानित वृद्धि (₹) |
|---|---|---|---|
| मुच्छल धान | 4900 | 3300 - 3400 | 1500 |
| 1718 किस्म | 4850 | 3700 - 3800 | 1100 |
| 1509 किस्म | 4500 | 3200 - 3300 | 1200 |
| पीआर-14 | 2750 | 2300 - 2400 | 400 |
| हाइब्रिड धान | 2320 | 2100 - 2200 | 150 |
हाइब्रिड किस्मों की बात करें तो इनके भाव ₹2320 प्रति क्विंटल तक दर्ज किए गए हैं। हालांकि, यह सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2461 से थोड़ा कम है, लेकिन पिछले सप्ताह की तुलना में इसमें भी ₹150 प्रति क्विंटल की तेजी आई है। वहीं, पीआर-14 किस्म ने सबको चौंकाते हुए एमएसपी से लगभग ₹300 से ₹400 अधिक यानी ₹2750 प्रति क्विंटल का भाव हासिल किया है।
किसानों और मंडी एसोसिएशन का क्या है कहना?
मंडी में अपनी फसल लेकर पहुंचे किसानों का कहना है कि इस बार पैदावार के साथ-साथ भावों ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है। किसान इंद्र और रामकुमार ने बताया कि बारीक धान की खेती में लागत अधिक आती है, लेकिन इस बार ₹4800 से ₹4900 के भाव मिलने से उनकी मेहनत सफल हो गई है। 1509 किस्म के दाम भी पहली बार ₹4500 के स्तर को छू रहे हैं, जो धान उत्पादक बेल्ट के लिए एक शुभ संकेत है।
"पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार बारीक धान के बाजार में जबरदस्त उछाल है। इससे न केवल किसानों को सीधा वित्तीय लाभ हो रहा है, बल्कि मंडी की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई है। फिलहाल मंडी में उठान की प्रक्रिया सुचारू है और किसानों के लिए पर्याप्त रास्ते व सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।" - रघुबीर मलिक, प्रधान, अतिरिक्त अनाज मंडी एसोसिएशन।
प्रशासनिक व्यवस्था और मार्केट कमेटी की निगरानी
धान की भारी आवक को देखते हुए मार्केट कमेटी कैथल पूरी तरह सतर्क है। शहर की मुख्य अनाज मंडियों सहित सभी छोटे खरीद केंद्रों पर सुपरवाइजरों की नियुक्ति की गई है ताकि गेट पास से लेकर तुलाई तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। मार्केट कमेटी के सचिव नरेंद्र ढुल ने स्पष्ट किया है कि मंडियों में किसानों, आढ़तियों और मजदूरों के लिए पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त कर दी गई हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि बारीक धान की कीमतों में इस तेजी का मुख्य कारण वैश्विक बाजार में चावल की मांग और इस बार की बेहतर गुणवत्ता है। कैथल की मंडियों में धान की आवक अभी और बढ़ने की उम्मीद है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसल को अच्छी तरह सुखाकर लाएं ताकि उन्हें अधिकतम भाव मिल सके और नमी के कारण किसी प्रकार की कटौती का सामना न करना पड़े। धान के इन ऊंचे दामों ने कैथल की जीटी रोड बेल्ट के ग्रामीण अंचलों में दिवाली से पहले ही खुशियों का माहौल पैदा कर दिया है।





