हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले से एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहां प्रशासनिक और विभागीय मनमानी के विरोध में एक अन्नदाता ने खुद को आग के हवाले कर दिया। यह सनसनीखेज मामला झांसा रोड से सटे धुराला गांव का है, जहां बिजली निगम द्वारा खेतों के बीचों-बीच जबरन विद्युत खंभे गाड़े जाने को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि एक किसान ने खौफनाक कदम उठा लिया। इस दर्दनाक हादसे में किसान का शरीर बुरी तरह झुलस गया है, वहीं उसे बचाने की जद्दोजहद में उसकी बहन भी गंभीर रूप से जख्मी हो गई है। घटना के बाद से ग्रामीण इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धुराला गांव निवासी जगपाल महज आधा एकड़ कृषि भूमि का मालिक है और इसी छोटी सी जमीन पर खेती करके अपने परिवार का गुजर-बसर करता है। उसके खेत में पहले से ही बिजली विभाग के चार खंभे लगे हुए थे, जिसके कारण ट्रैक्टर चलाने और फसल की बुवाई-कटाई करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसके बावजूद, निगम के अधिकारी और कर्मचारी तीन और नए खंभे लगाने के लिए पुलिस बल के साथ उसके खेतों में आ धमके। किसान का परिवार लंबे समय से इस बात का विरोध कर रहा था कि यदि खेत में इतने अधिक खंभे लगा दिए जाएंगे, तो खेती योग्य भूमि का दायरा सिमट जाएगा और आजीविका का यह एकमात्र साधन भी नष्ट हो जाएगा।
कानूनी लड़ाई के बीच अचानक खेत में पहुंचे कर्मचारी और पुलिस
इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ित किसान जगपाल ने पहले ही न्याय की आस में अदालत का दरवाजा खटखटाया था और मामला न्यायालय में विचाराधीन था। कानूनी प्रक्रिया के दायरे में मामला होने के बावजूद, बिजली निगम के नुमाइंदों ने अदालत के फैसले का इंतजार करना मुनासिब नहीं समझा। बुधवार को विभाग के कर्मचारी भारी पुलिस बल के साथ अचानक धुराला गांव स्थित जगपाल के खेत में पहुंच गए और खंभे खड़े करने का काम शुरू कर दिया। जब किसान ने इसका विरोध किया और उन्हें कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया, तो आरोप है कि मौके पर मौजूद कर्मियों ने उसकी एक नहीं सुनी और मनमाने तरीके से काम आगे बढ़ाने लगे।
निगम कर्मियों की इस जिद और प्रशासनिक हठधर्मिता से आहत होकर किसान मानसिक रूप से टूट गया। विरोध जताने का कोई अन्य रास्ता न पाकर उसने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ छिड़क लिया और आग लगा ली। चंद सेकंड में लपटों से घिरे किसान की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और उसकी बहन तुरंत मौके पर दौड़े। बहन ने जब अपने भाई को आग की चपेट में देखा, तो उसने बिना एक पल गंवाए उसे बचाने की कोशिश की। इस दौरान आग बुझाते-बुझाते बहन भी गंभीर रूप से झुलस गई। आनन-फानन में दोनों भाई-बहनों को सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। परिवारिक सूत्रों का कहना है कि किसान का आधा शरीर आग से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
| घटना के प्रमुख बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रभावित जिला व गांव | कुरुक्षेत्र, धुराला गांव (झांसा रोड) |
| पीड़ित किसान का नाम | जगपाल (आधा एकड़ भूमि का मालिक) |
| विवाद का मुख्य कारण | खेत में पहले से 4 और अब 3 नए बिजली खंभे लगाना |
| कानूनी स्थिति | मामला पहले से न्यायालय (कोर्ट) में विचाराधीन |
| वर्तमान स्थिति | सिविल अस्पताल में दोनों घायलों का इलाज जारी |
प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय किसानों और खाप पंचायतों में गहरा रोष फैल गया है। किसानों का कहना है कि जब मामला न्यायपालिका के विचाराधीन था, तो पुलिस और बिजली निगम को किसी भी प्रकार की जबरदस्ती करने का कोई अधिकार नहीं था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए एक गरीब किसान की रोजी-रोटी छीनने का प्रयास किया, जिससे मजबूर होकर उसे यह चरम कदम उठाना पड़ा। इस मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं कि अदालत में केस होने के बावजूद पुलिस बल ने किस आधार पर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई में सहयोग किया।
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अमला हरकत में आया। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायलों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में उपचाराधीन किसान और उसकी बहन की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों और पुलिस बल के पास इस कार्रवाई से संबंधित कौन से आधिकारिक निर्देश या दस्तावेज थे।
"मेरे खेत में पहले से ही चार खंभे गड़े हुए हैं जिससे किसानी करना दूभर हो गया था। मैंने कोर्ट में केस दायर कर रखा है, फिर भी कर्मचारी पुलिस को लेकर जबरन तीन और खंभे लगाने पहुंच गए, जिससे तंग आकर मैंने यह कदम उठाया।" - जगपाल, पीड़ित किसान
ग्रामीण अंचल में उपजा गहरा रोष और व्यवस्था पर असर
कुरुक्षेत्र की इस घटना ने एक बार फिर बिजली निगमों और प्रशासनिक विभागों की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और बिजली बोर्ड के बीच खंभों या लाइनों को लेकर विवाद आम बात है, परंतु अदालती प्रक्रिया के बीच इस तरह की जोर-जबरदस्ती किसी की जान पर बन आएगी, इसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। इस घटना से धुराला गांव सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों में भारी गुस्सा है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
आम जनजीवन और कृषि व्यवस्था पर इस प्रकार की घटनाओं का बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जहां एक ओर देश का अन्नदाता पहले से ही मौसम की मार, कर्ज और महंगे होते कृषि इनपुट्स से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों का ऐसा दमनकारी रवैया उनके मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह तोड़ देता है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या विकास कार्यों के नाम पर किसानों के अधिकारों और उनकी जीवन रक्षा को ताक पर रख दिया जाएगा? अब देखना यह होगा कि इस मामले में शासन-प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को किस प्रकार न्याय मिलता है।





