शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
खेल एवं खिलाड़ीब्रेकिंग

जींद की मनीषा भनवाला ने रचा इतिहास, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत पिता का सपना किया साकार

हरियाणा के जींद जिले के सिवाहा गांव की मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
31 अक्टूबर 2026 को 09:03 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
शेयर करें:
जींद की मनीषा भनवाला ने रचा इतिहास, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत पिता का सपना किया साकार
दैनिकरियलिटी
खेल एवं खिलाड़ी
दैनिक रियलिटी विशेष कवरेज
dainikreality.in
फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •जींद की मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 8-6 से अमेरिकी पहलवान को हरा स्वर्ण पदक जीता।
  • •पिता सुरेश भनवाला का सपना पूरा किया; 2022 में उनके निधन के बाद भाई रिंकू ने संभाला करियर।
  • •मां मीना देवी ने कहा, कढ़ी-चावल खिलाकर भेजा था, अब देशी घी के चूरमे से होगा भव्य स्वागत।
  • •मनीषा पहले भी कैडेट विश्व चैंपियनशिप, दक्षिण एशियाई खेल और विश्व सैन्य खेलों में स्वर्ण जीत चुकी हैं।
  • •अब मनीषा और उनके परिवार की निगाहें 2028 ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर केंद्रित हैं।

हरियाणा के जींद जिले के छोटे से गांव सिवाहा की बेटी मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया है। अमेरिका की पहलवान को 8-6 के करीबी मुकाबले में शिकस्त देकर विश्व चैंपियन बनीं मनीषा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके पैतृक गांव सिवाहा और पूरे परिवार में हर्षोल्लास का माहौल है। यह सफलता केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि पिता के देखे सपने, मां की अटूट दुआओं और बड़े भाई के अथक त्याग की एक प्रेरक गाथा है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली मनीषा ने तमाम संघर्षों को पार कर अपने दिवंगत पिता सुरेश भनवाला के संकल्प को पूरा कर दिखाया है।

इस स्वर्णिम सफलता के बाद, मनीषा का परिवार अब उनके घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। मां मीना देवी ने बताया कि बेटी को प्रतियोगिता के लिए जाते समय हरियाणवी व्यंजन कढ़ी-चावल खिलाकर भेजा था, और अब विश्व चैंपियन के स्वागत में उनके पसंदीदा देशी घी के चूरमे और टिंडी घी का प्रबंध किया जा रहा है। मनीषा की यह जीत ग्रामीण हरियाणा की उन बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखती हैं।

संघर्षों से भरा सफर और परिवार का अटूट समर्थन

मनीषा की मां मीना देवी ने बताया कि बचपन से ही मनीषा को खेलों का गहरा शौक था। वह अपने बड़े भाई रिंकू के साथ अक्सर कबड्डी के मैदान में जाती थीं, जहां भाई को खेलते देख ही उनके अंदर खेल के प्रति लगाव पनपा। लगभग 15 साल की उम्र में मनीषा ने कुश्ती का नियमित अभ्यास शुरू किया। शुरुआत में उनका उद्देश्य केवल फिटनेस सुधारना और वजन कम करना था, लेकिन धीरे-धीरे कुश्ती ही उनका जीवन लक्ष्य बन गई। मनीषा के पिता सुरेश भनवाला ने अपनी बेटी की प्रतिभा को समय रहते पहचान लिया था। उन्होंने मनीषा को कुश्ती के लिए प्रोत्साहित किया और परिवार की साधारण आर्थिक स्थिति के बावजूद, बेटी के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिता सुरेश मनीषा के लिए सिर्फ अभिभावक नहीं, बल्कि प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत थे।

तथ्यविवरण
खिलाड़ी का नाममनीषा भनवाला
गांवसिवाहा, जींद, हरियाणा
उपलब्धिविश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
प्रतिद्वंद्वीअमेरिका की पहलवान
अंतिम स्कोर8-6
पिता का नामस्वर्गीय सुरेश भनवाला
मां का नाममीना देवी
भाई का नामरिंकू भनवाला
प्रशिक्षण अकादमीचौधरी छोटूराम कुश्ती अकादमी, रोहतक
आगामी लक्ष्य2028 ओलंपिक में स्वर्ण पदक

पिता के निधन के बाद भाई ने संभाली जिम्मेदारी

साल 2022 मनीषा और उनके परिवार के लिए एक कठिन वर्ष साबित हुआ, जब उनके पिता सुरेश भनवाला का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। इस दुखद घटना ने मनीषा को भावनात्मक रूप से गहरे सदमे में डाल दिया और उनके कुश्ती करियर पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे। ऐसे मुश्किल समय में, बड़े भाई रिंकू भनवाला ने परिवार को संभाला और अपनी बहन के कुश्ती करियर की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। रिंकू ने मनीषा को रोहतक की प्रसिद्ध चौधरी छोटूराम कुश्ती अकादमी में दाखिला दिलाने में मदद की और अभ्यास से लेकर विभिन्न प्रतियोगिताओं तक, हर कदम पर बहन का साथ दिया। परिवार के इसी एकजुट सहयोग और भाई के समर्पण ने मनीषा को दोबारा मजबूती से खड़े होने और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की शक्ति प्रदान की।

विश्व चैंपियन बनने के बाद मनीषा की मां मीना देवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने भावुक होकर कहा, "बेटी को प्रतियोगिता के लिए रवाना करते समय हरियाणवी व्यंजन कढ़ी-चावल खिलाकर भेजा था। अब बेटी घर लौटेगी तो उसका स्वागत देशी घी से बने चूरमे और टिंडी घी से किया जाएगा। मनीषा को घर का बना चूरमा बेहद पसंद है। मैं बेटी का मुकाबला देख रही थी। मैच के दौरान मेरे मन में कई तरह के उतार-चढ़ाव चल रहे थे। शुरुआत में अमेरिका की खिलाड़ी ने अच्छी बढ़त बना ली थी, लेकिन दूसरे राउंड में मनीषा ने शानदार वापसी करते हुए 8-6 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। बेटी पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर ला चुकी है, लेकिन विश्व चैंपियन बनने की खुशी अलग है।"

अंतरराष्ट्रीय मंच पर मनीषा का पुराना प्रदर्शन और भविष्य की उम्मीदें

मनीषा के भाई रिंकू ने बताया कि यह सफलता अचानक नहीं मिली है, बल्कि वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। विश्व चैंपियन बनने से पहले भी मनीषा ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनके नाम कैडेट विश्व कुश्ती चैंपियनशिप और दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विश्व सैन्य खेलों में गोल्ड और कॉमनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक भी जीता है। मनीषा एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में तीन बार कांस्य पदक जीतने के साथ-साथ राष्ट्रीय खेलों में दो बार स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी हैं। जॉर्डन की राजधानी अम्मान में आयोजित एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया था। मनीषा की भाभी ममता ने बताया कि वह अपनी प्रेक्टिस को लेकर इतनी समर्पित हैं कि वे परिवार के किसी भी फंक्शन में नहीं जातीं और उनका पूरा ध्यान केवल अपने खेल पर केंद्रित रहता है।

2028 ओलंपिक में स्वर्ण जीतने का सपना

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद, मनीषा और उनके परिवार की निगाहें अब 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों पर टिकी हैं। परिवार को पूरी उम्मीद है कि मनीषा ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेंगी और तिरंगे का मान बढ़ाएंगी। सिवाहा जैसे एक छोटे से ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व कुश्ती के शिखर तक पहुंचने वाली मनीषा की यह कहानी न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश की ग्रामीण बेटियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है। उनकी यह उपलब्धि दृढ़ संकल्प, परिवार के त्याग और अटूट हौसले की मिसाल है, जो यह दर्शाती है कि कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

इस खबर को अपने दोस्तों व ग्रुप्स में शेयर करें:
व्हाट्सएप
नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

लेखक प्रोफाइल व सभी खबरें →

नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

संपादकीय प्राथमिकता:निष्पक्ष खबरेंतथ्यपरक जानकारीसरल हिंदीपाठकों का विश्वास
जींद की मनीषा भनवाला ने रचा इतिहास, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत पिता का सपना किया साकार | दैनिक रियलिटी