हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले प्रदेश के हजारों स्वच्छता प्रहरियों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है। राज्य सरकार ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में तैनात करीब 21 हजार सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों के लिए 'जोखिम भत्ता' (Risk Allowance) लागू करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब इन कर्मचारियों को हर महीने 2,000 रुपये जोखिम भत्ते के रूप में दिए जाएंगे। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसे तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह निर्णय न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि उनके द्वारा किए जाने वाले चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे कार्यों को एक आधिकारिक पहचान भी देगा। सरकार के इस कदम से जीटी रोड बेल्ट सहित पूरे हरियाणा के शहरी निकायों में कार्यरत नियमित कर्मचारियों को सीधा फायदा पहुँचने वाला है।
बदली गई प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था: अब साल में मिलेंगे 24 हजार रुपये
प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, सरकार ने भत्ते के ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इससे पहले, नियमित सफाई कर्मचारियों को उनके बेहतर प्रदर्शन के आधार पर वार्षिक प्रोत्साहन राशि (Performance Based Incentive) दी जाती थी। यह राशि सालाना 9,000 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक होती थी। हालांकि, नई व्यवस्था में इस वार्षिक प्रोत्साहन राशि को समाप्त कर दिया गया है और इसके स्थान पर 2,000 रुपये का मासिक जोखिम भत्ता शुरू किया गया है।
गणितीय दृष्टिकोण से देखें तो पहले कर्मचारियों को साल में एक बार अधिकतम 12 हजार रुपये मिलते थे, लेकिन अब मासिक भत्ते के कारण उन्हें साल भर में कुल 24,000 रुपये अतिरिक्त प्राप्त होंगे। यानी सीधे तौर पर कर्मचारियों की वार्षिक आय में 12 हजार रुपये का शुद्ध इजाफा सुनिश्चित किया गया है।
| विवरण | पुरानी व्यवस्था (वार्षिक) | नई व्यवस्था (मासिक) | कुल वार्षिक लाभ |
|---|---|---|---|
| भत्ते का स्वरूप | प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन | निश्चित जोखिम भत्ता | ₹24,000 |
| राशि | ₹9,000 - ₹12,000 | ₹2,000 | ₹12,000 की वृद्धि |
| लाभार्थी संख्या | 21,000+ कर्मचारी | तत्काल प्रभाव से | संपूर्ण हरियाणा |
वित्त विभाग और मानव संसाधन विभाग की मिली मंजूरी
इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए वित्त विभाग और मानव संसाधन (HR) विभाग ने विस्तृत समीक्षा के बाद अपनी सहमति प्रदान की। 22 अक्टूबर को ही प्रदेश के सभी नगर निगमों के आयुक्तों, जिला नगर आयुक्तों, नगर परिषदों के कार्यकारी अधिकारियों और नगर समितियों के सचिवों को इस बाबत लिखित निर्देश भेज दिए गए हैं। सरकार का तर्क है कि सफाई और सीवर जैसे कार्यों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक होता है, इसलिए इसे केवल 'प्रोत्साहन' के बजाय 'जोखिम भत्ता' के रूप में देना अधिक न्यायसंगत है।
"जोखिम भत्ता देना सरकार का स्वागत योग्य कदम है, लेकिन बेहतर कार्यशैली के लिए दिया जाने वाला परफॉरमेंस अलाउंस बंद नहीं होना चाहिए। कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए दोनों व्यवस्थाएं जरूरी हैं।" - नरेश शास्त्री, प्रधान, राज्य नगर पालिका कर्मचारी संघ
कर्मचारी संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
जहाँ एक ओर 2,000 रुपये मासिक भत्ते की घोषणा से कर्मचारियों में खुशी है, वहीं दूसरी ओर राज्य नगर पालिका कर्मचारी संघ ने पुरानी प्रोत्साहन राशि को बंद करने पर आपत्ति जताई है। संघ के प्रधान नरेश शास्त्री का कहना है कि जोखिम भत्ता कर्मचारियों के कार्य की प्रकृति को देखते हुए उनका हक है, लेकिन परफॉरमेंस अलाउंस कर्मचारियों को और बेहतर काम करने की प्रेरणा देता था। संघ ने मांग की है कि सरकार को जोखिम भत्ते के साथ-साथ प्रदर्शन आधारित राशि को भी बहाल रखना चाहिए ताकि स्वच्छता सर्वेक्षणों में हरियाणा के शहर और बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
स्थानीय जनजीवन और स्वच्छता व्यवस्था पर प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर हरियाणा के शहरी जनजीवन पर पड़ने की उम्मीद है। जब सफाई कर्मियों को आर्थिक सुरक्षा और उनके काम का सम्मान मिलता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर दिखाई देता है। पानीपत, करनाल और रोहतक जैसे बड़े शहरों में जहाँ सीवरेज की सफाई एक बड़ी चुनौती रहती है, वहाँ सीवरमैनों के लिए यह भत्ता एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार कर्मचारी संघों की मांग पर विचार करते हुए प्रोत्साहन राशि को दोबारा शुरू करती है या इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाती है।





