हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने एक बार फिर अपनी सक्रियता से एक बड़े आंदोलन को टालने में सफलता हासिल की है। सिरसा से अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़ की तरफ पैदल कूच कर रहे सैकड़ों गेस्ट टीचरों का जत्था सोमवार को जब अंबाला छावनी पहुंचा, तो वहां मंत्री अनिल विज के साथ हुई वार्ता के बाद गतिरोध समाप्त हो गया। विज के त्वरित हस्तक्षेप के चलते अब प्रदेश सरकार और गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल के बीच आगामी 2 नवंबर को विधिवत बैठक का समय तय हो गया है।
यह आंदोलन पिछले कई दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ था, क्योंकि शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए थे। सिरसा से शुरू हुई यह पैदल यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ती जा रही थी। हालांकि, अंबाला में अनिल विज ने न केवल शिक्षकों की बात सुनी, बल्कि तत्काल समाधान की दिशा में कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क साधा।
अनिल विज का 'स्पॉट डिसीजन': मौके पर ही तय हुआ बैठक का समय
जब गेस्ट टीचरों का प्रतिनिधिमंडल अंबाला छावनी में अनिल विज से मिला, तो उन्होंने अपनी पीड़ा साझा की कि वे लंबे समय से सरकार के साथ अपनी समस्याओं पर संवाद करना चाह रहे हैं। विज ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना किसी देरी के शिक्षकों के सामने ही मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर को फोन लगाया। इस सीधी बातचीत का परिणाम यह रहा कि सरकार ने 2 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे शिक्षकों के साथ औपचारिक वार्ता के लिए सहमति दे दी।
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| बैठक की तिथि | 2 नवंबर 2026 |
| बैठक का समय | प्रातः 11:00 बजे |
| मध्यस्थता करने वाले मंत्री | अनिल विज (ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री) |
| सरकारी प्रतिनिधि | राजेश खुल्लर (प्रधान सचिव, मुख्यमंत्री) |
| आंदोलन का स्वरूप | सिरसा से चंडीगढ़ पैदल यात्रा |
| मुख्य मांग | सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण संबंधी मुद्दे |
संवाद से समाधान की ओर: शिक्षकों ने खत्म किया आंदोलन
मंत्री अनिल विज ने शिक्षकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि जब सरकार ने बातचीत के लिए दरवाजे खोल दिए हैं और बैठक का समय निर्धारित हो गया है, तो उन्हें इस कठिन पैदल यात्रा को जारी रखने की आवश्यकता नहीं है। विज के इस भरोसे और मौके पर की गई कार्रवाई से शिक्षक संतुष्ट नजर आए। प्रतिनिधिमंडल ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे अपनी यात्रा को यहीं विराम देंगे और अपने-अपने जिलों को लौट जाएंगे।
"लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ा हथियार है। हमने गेस्ट टीचरों की जायज मांगों को सुना और सरकार के उच्च अधिकारियों से बात कर बैठक तय करवाई है। मुझे विश्वास है कि 2 नवंबर की वार्ता से सकारात्मक परिणाम निकलेंगे और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होगा।" - अनिल विज, कैबिनेट मंत्री, हरियाणा
प्रशासनिक और राजनीतिक निहितार्थ
हरियाणा में गेस्ट टीचरों का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। पूर्व की सरकारों से लेकर वर्तमान कार्यकाल तक, ये शिक्षक अपनी नौकरी की सुरक्षा और वेतन विसंगतियों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं। अनिल विज द्वारा इस तरह से बीच में हस्तक्षेप करना और मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ समन्वय स्थापित करना, सरकार के भीतर उनके बढ़ते प्रभाव और जनता के बीच उनकी 'संकटमोचक' की छवि को और मजबूत करता है।
आगे की राह: 2 नवंबर की बैठक पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें 2 नवंबर को होने वाली उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में शिक्षा विभाग के आला अधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रतिनिधि और गेस्ट टीचरों के नेता शामिल होंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार शिक्षकों के लिए किसी नए सेवा नियम या आर्थिक पैकेज की घोषणा कर सकती है, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिले। फिलहाल, अंबाला से शिक्षकों की विदाई के साथ ही जीटी रोड बेल्ट पर प्रशासनिक तनाव भी कम हो गया है।





