त्योहारी सीजन के आगमन के साथ ही आमजन की सेहत से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों पर राज्य प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। त्योहारी दिनों में मिठाइयों, दूध, पनीर और मावे की मांग में अचानक आए उछाल का फायदा उठाने वाले असामाजिक तत्वों की अब खैर नहीं होगी। प्रदेश सरकार ने खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मिलावटखोरी के खिलाफ एक व्यापक और आक्रामक निगरानी अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजारों में बिकने वाला हर एक खाद्य उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित और मिलावट रहित हो, ताकि त्योहारों की मिठास में किसी भी प्रकार की कड़वाहट न घुल सके।
प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए इन सख्त कदमों के तहत स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिलों में विशेष सर्विलांस टीमों के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इन टीमों का मुख्य दायित्व प्रमुख बाजारों, प्रतिष्ठित व सामान्य मिष्ठान भंडारों, दुग्ध डेयरियों और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के खाद्य विक्रेताओं के परिसरों का औचक निरीक्षण करना होगा। इस पूरी कवायद के दौरान विशेष रूप से दूध, घी, पनीर, खोया और रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली खाद्य सामग्री को जांच के दायरे में रखा जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर होने वाली मिलावट को समय रहते रोका जा सके।
सख्त निगरानी और साप्ताहिक पोर्टल अपडेशन की नई व्यवस्था
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा बनाई गई नई कार्ययोजना के मुताबिक, नियमित रूप से एकत्र किए जाने वाले नमूनों के अलावा प्रत्येक जिले में 100 से 150 अतिरिक्त सर्विलांस सैंपल लिए जाएंगे। इन सभी नमूनों को पारदर्शी और मानक प्रक्रियाओं के तहत राज्य की अधिकृत प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खाद्य सुरक्षा मुख्यालय के अधिकारियों को यह कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक सप्ताह घटिया और असुरक्षित पाए गए नमूनों की प्रगति रिपोर्ट विभागीय पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। इससे न केवल जिला स्तर पर हो रही कार्रवाई की सीधी मॉनिटरिंग हो सकेगी, बल्कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी हर एक मामले पर अपनी पैनी नजर रख सकेंगे।
हाल ही में सामने आए आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि राज्य में मिलावट का यह काला कारोबार किस हद तक फैला हुआ है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, बीते छह महीनों (1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026) के दौरान पूरे प्रदेश से कुल 2,428 खाद्य नमूने जांच के लिए उठाए गए थे। इनमें 1,239 प्रवर्तन (Enforcement) और 1,189 सर्विलांस नमूने शामिल थे। जब इन सभी नमूनों की वैज्ञानिक जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुल 381 नमूने तय किए गए खाद्य सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह फेल साबित हुए, जिनमें 232 प्रवर्तन और 149 सर्विलांस सैंपल शामिल थे। इन सभी मामलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के सुसंगत प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है।
| जांच अवधि | कुल लिए गए नमूने | प्रवर्तन नमूने (फेल) | सर्विलांस नमूने (फेल) | मानकों पर खरे न उतरे कुल नमूने |
|---|---|---|---|---|
| 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 | 2,428 | 232 | 149 | 381 |
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सर्विलांस के दौरान यदि किसी नमूने की रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारी उसकी गहराई से समीक्षा करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार अलग से प्रवर्तन नमूना भरकर दोषी कारोबारियों के खिलाफ त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस स्पष्ट नीति से मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि साप्ताहिक पोर्टल अपडेट होने के कारण किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई छिपाना अब संभव नहीं होगा।
प्रदेश के नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। त्योहारी सीजन के मद्देनजर मिलावटखोरों के खिलाफ चलाए जा रहे इस विशेष अभियान में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जिलों में विशेष निगरानी दल सक्रिय कर दिए गए हैं और मानकों का उल्लंघन करने वालों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। - आरती सिंह राव, स्वास्थ्य मंत्री, हरियाणा
स्वास्थ्य मंत्री की अपील और मिलावट के खिलाफ जनता की भागीदारी
प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ सरकार ने आम जनता और खाद्य कारोबारियों से भी नैतिक दायित्व निभाने की अपील की है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने सभी खाद्य व्यापारियों और दुकानदारों से आह्वान किया है कि वे व्यापार में पूरी ईमानदारी बरतते हुए स्वच्छता और गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करें। इसके साथ ही, आम नागरिकों से भी यह आग्रह किया गया है कि वे हमेशा विश्वसनीय और पंजीकृत दुकानों से ही खाद्य पदार्थों की खरीदारी करें। यदि किसी भी उपभोक्ता को मिलावट या खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर जरा भी संदेह होता है, तो वह तुरंत इसकी सूचना संबंधित जिला प्रशासन या खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को दे सकता है ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।
त्योहारों के इस उल्लासपूर्ण माहौल में आम जनमानस की सेहत से कोई खिलवाड़ न हो, इसके लिए विभाग ने अपने सभी मैदानी अमले को पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा है। आने वाले दिनों में इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा, जिससे राज्य के कोने-कोने में मिलावट के अवैध नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया जा सके।





