हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक जस्सी पेटवाड़ ने राज्य सरकार के उस फैसले पर कड़े सवाल खड़े किए हैं, जिसके तहत गुरुग्राम और नूंह जैसे उच्च राजस्व वाले जिलों की बिजली वितरण व्यवस्था एक निजी कंपनी को सौंपी जा रही है। विधायक का दावा है कि यह कदम न केवल जनविरोधी है, बल्कि इसके पीछे की चयन प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है।
विधायक पेटवाड़ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि हरियाणा सरकार को बिजली विभाग से प्रतिवर्ष लगभग 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसमें से लगभग आधा हिस्सा, यानी 9,200 करोड़ रुपये से अधिक, केवल गुरुग्राम और नूंह जिलों से आता है। सरकार अब इसी मलाईदार क्षेत्र को 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी के हवाले करने की तैयारी में है।
नई कंपनी को ठेका देने पर प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल
विधायक ने सरकार की 'बिना पर्ची-बिना खर्ची' वाली छवि पर प्रहार करते हुए पूछा कि आखिर किस आधार पर एक ऐसी कंपनी को इतना बड़ा टेंडर दिया जा रहा है, जिसे बने अभी मात्र एक साल हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के पास बिजली वितरण क्षेत्र का न तो कोई पुराना अनुभव है और न ही इसके पास आवश्यक बुनियादी ढांचा या वित्तीय क्षमता है।
| विवरण | महत्वपूर्ण आंकड़े / तथ्य |
|---|---|
| कुल वार्षिक बिजली राजस्व (हरियाणा) | ~₹20,000 करोड़ |
| गुरुग्राम व नूंह का राजस्व योगदान | ~₹9,200 करोड़ |
| प्रस्तावित निजी कंपनी | इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड |
| हड़ताल की अवधि | 3 दिवसीय (24 अक्टूबर तक) |
| संभावित दर वृद्धि (आरोप) | ₹2.50 से ₹50 प्रति यूनिट तक |
विधायक के अनुसार, पूरे भारत में कहीं भी इस तरह का 'समानांतर लाइसेंस' (Parallel License) देने का उदाहरण नहीं मिलता, जैसा हरियाणा सरकार गुरुग्राम और नूंह में करने जा रही है। यह प्रयोग सरकारी बिजली निगमों के अस्तित्व के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
आम जनता और व्यापारियों पर आर्थिक बोझ की चेतावनी
कांग्रेस विधायक ने बिजली की दरों में होने वाली संभावित वृद्धि को लेकर जनता को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार आम नागरिकों और छोटे उपभोक्ताओं से लगभग 2 से 2.50 रुपये प्रति यूनिट चार्ज कर रही है। लेकिन निजीकरण की शर्तों के अनुसार, निजी कंपनी को 50 रुपये प्रति यूनिट तक वसूलने का अधिकार मिल सकता है।
"बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को निजी मुनाफे का जरिया बनाना सरासर गलत है। यदि बिजली के दाम 50 रुपये यूनिट तक पहुंचे, तो आम किसान, छोटा दुकानदार और मध्यम वर्गीय परिवार पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। सरकार को इस फैसले पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।" - जस्सी पेटवाड़, विधायक (कांग्रेस)
बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल का समर्थन
निजीकरण के इस फैसले के खिलाफ हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे राज्य में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। जस्सी पेटवाड़ ने इस हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों के रोजगार की नहीं, बल्कि हरियाणा की जनता के हक की है।
कर्मचारियों का तर्क है कि निजी कंपनियों के आने से सरकारी ढांचे का निजीकरण होगा और धीरे-धीरे बिजली विभाग पर जनता का नियंत्रण खत्म हो जाएगा। वे गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
आगामी कदम और संभावित राजनीतिक प्रभाव
हरियाणा में इस मुद्दे ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। विपक्ष इसे विधानसभा से लेकर सड़कों तक उठाने की रणनीति बना रहा है। सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' के चयन मानदंडों को सार्वजनिक करे और बिजली दरों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लिखित आश्वासन दे। यदि सरकार अपने रुख पर अड़ी रहती है, तो आने वाले दिनों में यह विवाद हरियाणा की कानून व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।





