हरियाणा के ऊर्जा सेक्टर में निजीकरण की सुगबुगाहट के साथ ही प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक मंचों तक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) की ओर से एक ऐसा निर्णय सामने आया, जिसके तहत 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' नामक निजी कंपनी को गुरुग्राम और नूंह जिलों के नए राजस्व क्षेत्रों में समानांतर बिजली वितरण यानी पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन का लाइसेंस अधिकृत किया गया है। राज्य के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला वाकया है जब किसी प्राइवेट फर्म को उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इस कदम ने न केवल बिजली निगमों के भीतर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है, बल्कि खुद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने इसके विरोध में खुलकर आवाज उठाई है।
नियामक आयोग के इस फैसले के आने के तुरंत बाद ऊर्जा और श्रम मंत्री अनिल विज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह निजीकरण के सख्त खिलाफ हैं और उनके विभाग ने पूरी दृढ़ता के साथ इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया था। मंत्री ने बताया कि विभाग का यह पक्ष लिखित दस्तावेजों में दर्ज है और कोई भी इसे सार्वजनिक रूप से देख सकता है। हालांकि नियामक द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद अब इस पूरे प्रकरण को उच्च स्तर पर चुनौती देने की पुख्ता तैयारी कर ली गई है। मंत्री ने साफ किया कि वह कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर अपनी बात को अंतिम मुकाम तक पहुंचाएंगे ताकि उपभोक्ताओं और विभागीय हितों की रक्षा की जा सके।
गुरुग्राम और नूंह के बिजली वितरण का बदलता प्रशासनिक ताना-बाना
| प्रशासनिक बिंदु | विवरण एवं तथ्य |
|---|---|
| प्रभावित जिले | गुरुग्राम और नूंह (नया राजस्व क्षेत्र) |
| लाइसेंस प्राप्तकर्ता कंपनी | इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड |
| निर्णय लेने वाली संस्था | हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) |
| प्रमुख विरोधकर्ता | कैबिनेट ऊर्जा मंत्री अनिल विज |
| राजनीतिक प्रतिक्रिया | कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी द्वारा तीखा हमला |
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने भी सत्तारूढ़ दल को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि HERC के सदस्यों और तंत्र की नियुक्ति खुद राज्य सरकार द्वारा की जाती है, ऐसे में यह विरोधाभास समझ से परे है कि सरकार खुद के द्वारा स्थापित आयोग के फैसलों के खिलाफ अदालत जाने की बात कर रही है। कांग्रेस सांसद ने इसे आम जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला राजनीतिक पाखंड करार दिया है, जिससे नागरिकों को भ्रमित किया जा सके।
"मैं खुद भी प्राइवेट के खिलाफ हूं। इसलिए मेरे विभाग ने पूरी दृढ़ता के साथ इसका विरोध किया है। यह सब लिखित में है... हम इसके लिए अपील करेंगे और आखिरी सिरे तक जायेंगे।" - अनिल विज, ऊर्जा मंत्री, हरियाणा सरकार
राजनीतिक बयानबाजी और एसआईआर (SIR) का मुद्दा
बिजली निजीकरण के इस सियासी घमासान के बीच राज्य की राजनीति में अन्य मुद्दों पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। जब कांग्रेस पार्टी की ओर से यह सवाल उठाया गया कि भाजपा सरकार ने एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया के दौरान कितने घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर किया है, तो ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने इस पर भी पलटवार किया। विज ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के संशोधन और इस प्रकार की प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ा हर कार्य सीधे तौर पर चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने समझाया कि सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान मृत व्यक्तियों के नाम हटाने या अन्य स्थानों पर विवाह कर चुकी बेटियों के नाम संशोधित करने जैसे कार्य निर्वाचन आयोग के तय नियमों के तहत ही संपन्न होते हैं।
ऊर्जा मंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि इस समय पूरा विपक्ष अपनी वैचारिक पटरी से उतर चुका है और दिशाहीन हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि विपक्षी दलों के नेता इस प्रकार के सवाल उठा रहे हैं तो इसका अर्थ यही निकाला जा सकता है कि उनके पास जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का अभाव है, जो घर-घर जाकर नागरिकों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक कर सकें। विज के अनुसार चुनाव आयोग निष्पक्षता के साथ अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहा है ताकि प्रत्येक नागरिक का मताधिकार सुनिश्चित किया जा सके।
आगामी दिनों में इस पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के खिलाफ बिजली विभाग द्वारा की जाने वाली कानूनी अपील और कर्मचारियों के साथ होने वाली बैठकों के परिणाम काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे। राज्य की विद्युत वितरण व्यवस्था में यह बदलाव भविष्य के प्रशासनिक स्वरूप को तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।





