हरियाणा (दैनिक Reality विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): पंचकूला: हरियाणा में भवन निर्माण संबंधी नियमों में संशोधन की सूचना से प्रदेश के लोग कई दिनों से असमंजस की स्थिति में हैं. हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में किए जाने वाले संशोधन के बारे में लोगों को सही और पूरी जानकारी नहीं मिल रही. इससे लोगों की परेशानी लगातार बनी हुई है. क्योंकि प्रदेश के लोगों तक केवल यह जानकारी पहुंची है कि हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में संशोधन किया जाना है. इस कारण हर कोई भवन निर्माण के नियमों में नए बदलाव होना तय मान रहा है. जबकि किसी नियम में कोई नया बदलाव नहीं होने जा रहा. इस संबंध में दैनिक रियलिटी ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, हरियाणा के अधिकारियों से बातचीत की. आप भी जानिए कि लोगों में यह असमंजस की स्थिति क्यों बनी. दस्तावेजी जानकारी और प्रक्रिया एक जगह: दरअसल, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एवं कंट्री प्लानिंग) द्वारा हाल ही में विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में प्रस्तावित संशोधन बताते हुए सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया है. इस नोटिस के अनुसार प्रस्तावित संशोधन के लिए प्रदेश के लोगों और हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं. इसके लिए लोगों को नोटिस के प्रकाशन की तिथि 2 नवंबर 2026 से 1 दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है. विभाग की डीटीपी अधिकारी, दिव्या डोगरा ने बताया कि बिल्डिंग कोड 2017 में कोई एक भी नया संशोधन नहीं किया जा रहा. क्योंकि दर्शाए गए प्रस्तावित संशोधन नए नहीं, बल्कि बीते वर्षों के पुराने हैं. लेकिन आधिकारिक वेबसाइट पर ऐसा किन कारणों से दर्शाया गया है, यह भी जानिए.सिंगल सिस्टम के लिए कानूनी अनिवार्यता: दरअसल, हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में संशोधन के शीर्षक के तहत सार्वजनिक नोटिस जारी करने की अनिवार्य है. क्योंकि विभाग बिल्डिंग कोड में नोटिस को सार्वजनिक किए बिना प्रक्रिया में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं कर सकता. हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 संबंधी प्रक्रिया और पुराने आदेश पहले अलग-अलग यूनिट में बंटे हुए थे. लोगों को बिल्डिंग कोड की कॉपी को डाउनलोड करके भी पूरी जानकारी नहीं मिलती थी और भवन निर्माण संबंधी फाइल निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरी नहीं होती थी. लंबे समय से लोगों के लिए यह प्रक्रिया जटिल बनी थी. इस कारण टाउन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग ने इस समूची प्रक्रिया को एक तरह से सिंगल विंडो सिस्टम बनाने की तैयारी की है. अब भवन निर्माण के लिए पूरी प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी महज हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 की कॉपी को डाउनलोड करके ही मिल जाएगी. जबकि पहले कोड संबंधी कॉपी में भी पूरी जानकारी का उल्लेख नहीं होता था. यहां दोबारा ध्यान देने वाली बात है कि बिल्डिंग कोड 2017 में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया जा रहा. केवल संबंधित प्रक्रिया को ही एक जगह समाहित किया जाना है. हालांकि, बिना पड़ताल किए कुछ मीडिया रिपोर्ट्स लोगों तक पहुंची, जिसके चलते प्रदेश के लोग दुविधा में हैं.एफएआर समेत कोई नया बदलाव नहीं: शहरों में प्लाट के आकार के अनुसार फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर), ग्राउंड कवरेज और बेसमेंट संबंधी कोई नया संशोधन नहीं किया गया है. नोटिस में संशोधन का शीर्षक केवल भवन निर्माण संबंधी प्रक्रिया को एक जगह पर लाने के लिए सार्वजनिक किया गया है. क्योंकि प्रक्रिया को एक जगह पर समाहित करने के लिए भी कानूनन संशोधन के तहत नोटिस को सार्वजनिक किए जाने की अनिवार्यता होती है. भले ही नोटिस में प्रस्तावित बदलाव प्लाट के क्षेत्रफल के अनुसार ग्राउंड कवरेज, बेसमेंट, बेस एफएआर और अतिरिक्त एफएआर की सीमा निर्धारित दर्शाई गई है. लेकिन यह उक्त कोड के अनुसार बीते कई वर्षों पुराना ही है.पांच श्रेणियों के प्लॉट: विभाग की ओर से सार्वजनिक किए गए नोटिस में प्लाट के आकार के आधार पर भवनों की पांच श्रेणियां हैं. इनमें 100 वर्ग मीटर, 100 से 250 वर्ग मीटर, 250 से 350 वर्ग मीटर, 350 से 500 वर्ग मीटर और 500 से 1000 वर्ग मीटर के प्लाट शामिल हैं. 100 व 200 वर्ग मीटर तक के प्लाट पर 75 प्रतिशत और इससे बड़े प्लाट पर 66 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की दर्शाई गई है, जिसे प्रस्तावित संशोधित समझा जा रहा है. लेकिन हरियाणा में यह नियम वर्षों पुराना है, यह कोई नया बदलाव नहीं है. वहीं ग्राउंड के साथ तीन फ्लोर हों या फिर स्टिल्ट प्लस फोर, भवन की अधिकतम ऊंचाई 16.5 मीटर पहले की है, जिसे अब भी प्रस्तावित संशोधित कानूनी अनिवार्यता के तहत दर्शाना पड़ा है. क्योंकि भवन निर्माण संबंधी प्रक्रिया को एक ही जगह किया जा रहा है. इससे आम लोगों और हितधारकों को अलग-अलग जगहों पर जाने की झंझट से राहत मिलेगी.इन पुराने नियमों को नया न समझें लोग: सिंगल लेवल बेसमेंट, 100 वर्ग मीटर के प्लाट पर बेस एफएआर 165 प्रतिशत और अतिरिक्त खरीद योग्य एफएआर व अधिकतम एफएआर 264 प्रतिशत भी पहले से निर्धारित है. 100 से 250 वर्ग मीटर तक के प्लाट के लिए 145 प्रतिशत बेस एफएआर और अतिरिक्त खरीद योग्य एफएआर समेत अधिकतम 264 प्रतिशत एफएआर भी पुराना है. 250 से 350 वर्ग मीटर तक के प्लाट के लिए बेस एफएआर 130 प्रतिशत और अधिकतम एफएआर 240 प्रतिशत, 350 से 500 वर्ग मीटर तक के प्लाट के लिए बेस एफएआर 120 प्रतिशत और अतिरिक्त खरीद योग्य एफएआर समेत अधिकतम एफएआर 240%, 500 से 1000 वर्ग मीटर तक के प्लाट के लिए बेस एफएआर 100 प्रतिशत और अतिरिक्त खरीद योग्य एफएआर समेत अधिकतम एफएआर 240 प्रतिशत भी पुराना ही है. ट्रंप बोले, 'ईरान के खिलाफ फिर से तैयार हूं', क्या फिर से युद्ध की होगी शुरुआत ?। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
विकास कार्य / जनसुविधा का पूरा ब्योरा और रूट
इस पहल से क्षेत्र के नागरिकों को दैनिक आवागमन, प्रशासनिक कार्यों और मूलभूत सुविधाओं में बड़ा लाभ मिलेगा। हरियाणा में बिल्डिंग कोड नहीं बदलेगा, पुराने नियमों को नया समझकर न हों परेशान, जानिए पूरा मामला सीन X रिव्यू: सूर्या की फिल्म निकली ब्लॉकबस्टर, दर्शक बोले- शानदार, रणबीर की 'रामायण' खतरे में?। जम्मू-कश्मीर: कैबिनेट फेरबदल से बगावत, नाराज NC विधायकों को मनाने आज श्रीनगर में बैठक करेंगे CM उमर अब्दुल्ला दिवाली पर आंखों में चोट लगी तो घबराएं नहीं, PGIMER में 24 घंटे मिलेगा इलाज, 3 दिन विशेष इमरजेंसी सेवा।
| परियोजना / जनसुविधा | डिपो / विभाग व लाभ |
|---|---|
| योजना / जनसुविधा | हरियाणा में बिल्डिंग कोड नहीं बदलेगा, पुराने नियमों को नया स |
| संबंधित विभाग | राज्य प्रशासन व स्थानीय प्राधिकरण |
| नागरिक लाभ | सुगम आवागमन व बेहतर सुविधाएं |
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को मिलने वाला लाभ
स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे जनहित में एक सार्थक प्रयास बताया है।
प्रशासन की समय-सीमा और जमीनी क्रियान्वयन
आगामी दिनों में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन की उच्चस्तरीय समीक्षा की जाएगी ताकि आम जनता को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
शहरवासियों की प्रतिक्रिया और आगामी कदम
विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए।





