शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
विज्ञापन • ADVERTISEMENT
सेहत एवं जीवनशैलीब्रेकिंग

गुजरात में गहराया बिजली संकट, सरकार ने औद्योगिक और घरेलू स्तर पर खपत घटाने की अपील की

गुजरात में बिजली संकट गहराने के बाद सरकार ने खपत नियंत्रित करने की अपील की है। कमजोर मानसून और बढ़ती मांग के कारण राज्य में रात के समय बिजली कटौती की सूचना मिल रही।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
24 अक्टूबर 2026 को 12:50 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
शेयर करें:
गुजरात में गहराया बिजली संकट, सरकार ने औद्योगिक और घरेलू स्तर पर खपत घटाने की अपील की
दैनिकरियलिटी
सेहत एवं जीवनशैली
दैनिक रियलिटी विशेष कवरेज
dainikreality.in
फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •गुजरात में बिजली संकट गहराया, सरकार ने लोगों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से खपत नियंत्रित करने की अपील की है।
  • •देश के कुल बिजली उत्पादन में गुजरात का योगदान 12.61% है और यहाँ प्रतिदिन लगभग 80,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
  • •कमजोर मानसून, अलनीनो के प्रभाव और गर्मी के कारण बिजली की मांग में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
  • •सरदार सरोवर परियोजना, तापी और कडाना बांधों में जलस्तर घटने से जलविद्युत और पवन ऊर्जा उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

देश के सबसे विकसित और औद्योगिक रूप से अग्रणी राज्यों में शुमार गुजरात इस समय गंभीर बिजली संकट के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से बिजली की खपत को तुरंत नियंत्रित करने का आग्रह किया है। प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की अपील सामने आने के बाद आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था के और अधिक चरमराने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर बिजली उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो गुजरात देश के उन प्रमुख राज्यों में शुमार है जो ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर माने जाते रहे हैं। देश के कुल बिजली उत्पादन में अकेले गुजरात की हिस्सेदारी 12.61 प्रतिशत है और यहाँ हर रोज लगभग 80,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। इसके बावजूद मौजूदा हालात में राज्य के कई हिस्सों से विशेषकर रात्रि के समय अघोषित बिजली कट लगने की खबरें सामने आ रही हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि मांग और आपूर्ति के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है।

उत्पादन में मामूली गिरावट और मांग में बेतहाशा वृद्धि

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के हालिया दस्तावेजों के मुताबिक राज्य में कुल बिजली का उत्पादन बढ़कर 1.19 लाख मिलियन यूनिट तक पहुंच चुका है, फिर भी यह आंकड़ा पिछले रिकॉर्ड की तुलना में करीब 9,000 मिलियन यूनिट कम है। इस बार त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही बिजली की खपत में अप्रत्याशित उछाल आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून के दौरान अलनीनो के प्रभाव के चलते बारिश की कमी दर्ज की गई, जिसके कारण जलविद्युत परियोजनाओं और पवन ऊर्जा संयंत्रों की उत्पादन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है।

ऊर्जा संकेतक / विवरणवर्तमान स्थिति / आंकड़े
देश के कुल उत्पादन में योगदान12.61%
दैनिक कुल बिजली उत्पादन80,000 मेगावाट
कुल उत्पादित बिजली (मौजूदा)1.19 लाख मिलियन यूनिट (पिछले रिकॉर्ड से 9,000 मिलियन यूनिट कम)
संकट के मुख्य कारणकमजोर मानसून, अलनीनो प्रभाव, बांधों में जलस्तर में कमी
प्रभावित परियोजनाएंसरदार सरोवर परियोजना, तापी बांध, कडाना बांध

बारिश की भारी कमी का सीधा असर राज्य के प्रमुख जल स्रोतों पर पड़ा है। गुजरात की जीवन रेखा कहे जाने वाले सरदार सरोवर नर्मदा परियोजना के साथ-साथ तापी और कडाना बांधों में पर्याप्त जलराशि न होने के कारण पनबिजली का उत्पादन अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया है। नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों में आई इस अड़चन ने बिजली वितरण कंपनियों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है, जिससे ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

प्रशासनिक कदम और उद्योग जगत पर संभावित असर

बढ़ते बिजली संकट के मद्देनजर राज्य प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार ने औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक संस्थानों को अपनी दैनिक खपत सीमित करने के निर्देश दिए हैं ताकि घरेलू क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाए रखा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले हफ्तों में मौसम में ठंडक नहीं आई और मांग इसी तेजी से बढ़ती रही, तो पावर ग्रिड को स्थिर रखने के लिए और अधिक कड़े प्रतिबंध लागू करने पड़ सकते हैं।

"राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। नागरिकों और व्यापारिक संगठनों से अनुरोध है कि वे इस चुनौतीपूर्ण समय में बिजली की बचत कर सहयोग दें ताकि किसी बड़े संकट से बचा जा सके।" - ऊर्जा विभाग, गुजरात सरकार

आम जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस बिजली संकट का सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन के साथ-साथ लघु उद्योगों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। त्योहारी सीजन के इस दौर में बाजारों में रौनक और उत्पादन का कार्य जोरों पर होता है, ऐसे में रात के समय होने वाले बिजली कटौती से व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा घरेलू उपभोक्ताओं को भी उमस भरी गर्मी और व्यवधान के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

आगे की प्रशासनिक दिशा और आगामी कदम

स्थिति की नजाकत को देखते हुए ऊर्जा मंत्रालय और राज्य के विद्युत बोर्ड लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बिजली वितरण कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वैकल्पिक स्रोतों से बिजली खरीदकर ग्रिड को संतुलित करने का प्रयास करें। साथ ही, उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे अनावश्यक बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बंद कर ऊर्जा संरक्षण अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि इस मौसमी और तकनीकी संकट से पार पाया जा सके।

प्रायोजित • SPONSORED
इस खबर को अपने दोस्तों व ग्रुप्स में शेयर करें:
व्हाट्सएप
नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

लेखक प्रोफाइल व सभी खबरें →

नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

संपादकीय प्राथमिकता:निष्पक्ष खबरेंतथ्यपरक जानकारीसरल हिंदीपाठकों का विश्वास
गुजरात में गहराया बिजली संकट, सरकार ने औद्योगिक और घरेलू स्तर पर खपत घटाने की अपील की | दैनिक रियलिटी