हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): हरियाणा में प्रदूषण का स्तर (AQI) बढ़ने लगा है।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
पिछले साल जहां एक नवंबर तक 25 एकड़ में पराली जलाने पर 12 किसानों पर एफआइआर दर्ज हुई थी।। वहीं इस बार करीब पौने छह एकड़ में पराली जलाने पर तीन किसानों के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई है।। रविवार को हरसैक से मालसरी खेड़ा गांव की लोकेशन प्राप्त हुई है।। कृषि विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी।।
| समाचार बिंदु | ताज़ा विवरण व स्थिति |
|---|---|
| मुख्य घटनाक्रम | खतरनाक जोन में पहुंच रहा AQI, सुबह छाने लगा स्मॉग, 3 कि |
| संबंधित क्षेत्र / ज़िला | हरियाणा (संबंधित क्षेत्र) |
| संबंधित संस्था / विभाग | संबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन |
| प्रमुख तथ्य व आंकड़े | संबंधित विभाग व प्रशासन द्वारा निगरानी जारी |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
अगर पराली जलाई पाई जाती है, तो संबंधित किसान के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाई जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा।। बेशक, अभी पराली जलाने के मामले कम हैं, लेकिन प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है।। रविवार को औसतन एक्यूआइ 247 रहा।। सुबह के समय हल्का स्माग भी छाया हुआ था।। हवा नहीं चलने और ठंड की वजह से धुआं व धूल वायुमंडल में जमा हो रही है।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
इसी वजह से एक्यूआइ बढ़ रहा है।। जबकि शनिवार को औसतन एक्यूआइ 69 था।। पिछले साल एक नवंबर को औसतन एक्यूआइ 326 था।। प्रशासन पराली जलाने के मामलों में कमी लाने के लिए लगातार प्रयास में जुटा है।। प्रत्येक गांव में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।। जो किसानों को जागरूक करने के साथ ही खेतों में निगरानी भी रख रहे हैं।। जिला कृषि उप निदेशक डा. सुखदेव कंबोज ने कहा कि किसानों को टीमें गांवों में जाकर पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक कर रही हैं।। कंबाइन से कटाई के बाद बाकी फसल अवशेष की गांठ बनाने के लिए किसानों को बेलर भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।। जिससे पराली जलाने के मामलों में काफी कमी आई है।। किसानों से अपील है, वे पराली को जलाने की बजाय उसका प्रबंधन करें।।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





