हरियाणा के रेवाड़ी जिले में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब सत्ताधारी दल के ही एक विधायक ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। रेवाड़ी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद अधिकारी जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं और जमीनी हकीकत से मुंह फेरे बैठे हैं। यह पूरा मामला शहर में डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार की जा रही सीसी रोड (Cement Concrete Road) के निर्माण कार्य में सामने आई धांधली से जुड़ा हुआ है, जिसने महकमों की कार्यशैली को कटघरे में ला खड़ा किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सड़क का निर्माण कार्य पूरा हुए अभी बमुश्किल एक महीना ही बीता था कि इसकी परतें उखड़ने लगीं और सतह से रोड़ियां बाहर आने लगीं। सड़क की इस लचर हालत को देखकर क्षेत्रीय नागरिक हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय विधायक के दरबार में पहुंचाई। नागरिकों का कहना था कि जब मुख्य मार्ग ही इतनी जल्दी खस्ताहाल होने लगे, तो भविष्य में आवागमन कितना जोखिम भरा होगा। लोगों की इस गंभीर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए विधायक ने नगर परिषद के नुमाइंदों को मौके पर स्थिति सुधारने के सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया, जिससे जनता का रोष और अधिक बढ़ गया।
अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही का सिलसिलेवार घटनाक्रम
जब नगर परिषद के अधिकारियों ने विधायक के आदेशों को भी नजरअंदाज कर दिया, तब क्षेत्रीय बाशिंदे दोबारा अपनी परेशानी लेकर विधायक के पास पहुंचे। इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने प्रशासनिक अमले की कार्यकुशलता पर सीधी टिप्पणी की। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि बार-बार ताकीद करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में यह भी कह डाला कि शायद इन अधिकारियों को इस लापरवाही में कोई आनंद आ रहा है या फिर वे किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण के भरोसे बैठे हैं, जिसके कारण उन्हें आम जनता की परेशानियों की कोई परवाह नहीं है।
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले शहर के मोती चौक से विश्वकर्मा चौक के बीच बनाई जा रही सीसी सड़क के निर्माण पर भी व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध जताया था। उस दौरान भी निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे थे, लेकिन संबंधित महकमे के नुमाइंदों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की निष्पक्ष जांच करना मुनासिब नहीं समझा था। चुनावों से पहले भी करोड़ों के बजट से बनने वाली इन सड़कों से रोड़ियां उखड़ने के मामले तूल पकड़ चुके हैं, जिस पर खुद केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दी थी।
| निर्माण परियोजना / स्थल | लागत राशि (लगभग) | सामने आई मुख्य खामी | वर्तमान प्रशासनिक स्थिति |
|---|---|---|---|
| रेवाड़ी सीसी रोड निर्माण | डेढ़ करोड़ रुपये | एक माह के भीतर रोड़ियां निकलना | अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर अनदेखी |
| मोती चौक - विश्वकर्मा चौक मार्ग | सार्वजनिक बजट | घटिया सामग्री और अनियमितताएं | व्यापारी वर्ग द्वारा तीखा विरोध |
अधिकारियों की चुप्पी और राजनीतिक गलियारों में मची हलचल
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद जब प्रशासनिक मोर्चे पर स्थिति टटोलने का प्रयास किया गया, तो जिला नगर आयुक्त (DMC) और नगर परिषद की चेयरपर्सन से संपर्क साधने की कोशिशें विफल साबित हुईं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में जब फोन कॉल किए गए तो संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया या जवाब नहीं मिला। दूसरी ओर, राजनीतिक हलकों में इस बयानबाजी के अलग ही मायने निकाले जा रहे हैं। विधायक की ओर से दिए गए इस बयान को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के खेमे से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि नगर परिषद की चेयरपर्सन राव समर्थक मानी जाती हैं। इस आंतरिक खींचतान और प्रशासनिक उदासीनता के बीच शहर का विकास कार्य कागजों तक सिमट कर रह गया है।
स्थानीय जानकारों का मानना है कि सत्ता पक्ष के भीतर ही समन्वय की कमी और अधिकारियों के बेलगाम रवैये के कारण सरकारी खजाने का दुरुपयोग हो रहा है। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से तैयार होने वाले बुनियादी ढांचे कुछ ही हफ्तों में दम तोड़ रहे हैं, जो भ्रष्टाचार के दीमक की ओर स्पष्ट इशारा करता है। चुनाव से पहले जिन मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे किए गए थे, वे आज धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठता जा रहा है।
यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि मैंने अधिकारियों को और डीएमसी को भी इस बारे में निर्देशित किया था। इसके बावजूद अधिकारी इस पर कोई फोकस नहीं कर रहे हैं, या तो उन्हें इसमें मजा आ रहा है या फिर वे किसी का आशीर्वाद लेकर बैठे हैं। - लक्ष्मण सिंह यादव, विधायक, भाजपा
स्थानीय जनजीवन, व्यापारियों और यातायात पर पड़ता गंभीर असर
बुनियादी ढांचे की इस बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा रेवाड़ी शहर के आम नागरिकों, दुकानदारों और राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। मुख्य मार्गों पर बिछाई गई सीमेंटेड सड़कें कुछ ही दिनों में उखड़ने से वहां धूल उड़ने लगी है और दोपहिया चालकों के लिए दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है। बाजार क्षेत्र में आने वाले ग्राहकों और स्थानीय व्यापारियों का कारोबार भी इस जर्जर व्यवस्था के कारण प्रभावित हो रहा है। आए दिन लगने वाले जाम और टूटी सड़कों के गड्ढों के कारण एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक दावों की पोल खुल रही है।
दूसरी तरफ, गुरुग्राम में भी हाल ही में नए सिविल अस्पताल के निर्माण को लेकर भारतीय राजनीति गर्माई हुई है, जहां स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के बीच छिड़ी बयानबाजी में पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर यशपाल बत्रा की एंट्री ने मामले को और तूल दे दिया है। इन तमाम घटनाओं से यह साफ जाहिर होता है कि हरियाणा में बुनियादी विकास और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के इर्द-गिर्द सियासी और प्रशासनिक खींचतान किस हद तक चरम पर पहुंच चुकी है, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन स्तर पर पड़ रहा है।
आगामी प्रशासनिक कदम और सुधार की उम्मीदें
इस पूरे विवाद के तूल पकड़ने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि उच्च स्तर पर शासन और प्रशासन इस मामले में क्या सुधारात्मक कदम उठाता है। क्या घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने वाले ठेकेदारों और उनकी अनदेखी करने वाले लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस विभागीय जांच बिठाई जाएगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा? क्षेत्रीय जनता और प्रबुद्ध नागरिकों ने अब कड़े शब्दों में मांग उठानी शुरू कर दी है कि यदि तय समय के भीतर सड़कों की नए सिरे से उच्च स्तरीय जांच कराकर मरम्मत नहीं की गई, तो जनता सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगी।





