हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): ऑस्ट्रेलिया में रिसर्च के लिए छुट्टी बढ़ाने की मांग पूरी नहीं होने पर PGIMER के मनोरोग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. ग्रोवर ने संस्थान से इस्तीफा दे दिया था. PGI प्रशासन ने फैकल्टी की कमी का हवाला देते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया. अब सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने प्रशासन के इस आदेश को रद्द कर दिया है. ट्रिब्यूनल ने PGI को तीन सप्ताह के भीतर उनके मामले पर दोबारा विचार कर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं.इस्तीफा स्वीकार करने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांगः डॉ. ग्रोवर ने कैट में PGI प्रशासन, संस्थान के प्रेसिडेंट और निदेशक के खिलाफ याचिका दायर की थी. उन्होंने प्रशासन से इस्तीफा स्वीकार करने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) देने की मांग की थी. डॉ. ग्रोवर मनोरोग के विशेषज्ञ हैं और कैटाटोनिया के इलाज में उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. अब कैट के आदेश के बाद PGI प्रशासन को उनकी मांग पर फिर से विचार करना होगा.दो साल की छुट्टी मांगी, मिली एक साल की मंजूरी: याचिका के मुताबिक, डॉ. ग्रोवर को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ साइकेट्री में फैलोशिप के लिए जाना था. इसके लिए उन्होंने दो साल की एक्स-इंडिया लीव मांगी थी, लेकिन संस्थान ने एक साल की छुट्टी ही मंजूर की. इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त छह महीने की छुट्टी के लिए आवेदन किया, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया.पीजीआई ने ठुकराया था सेवानिवृत्ति का अनुरोधः डॉ. ग्रोवर 3 फरवरी 2025 को ऑस्ट्रेलिया गए थे. उन्होंने 25 सितंबर 2025 को 3 फरवरी 2026 से 2 अगस्त 2026 तक छुट्टी बढ़ाने की मांग की थी. 2 फरवरी 2026 को भारत लौटने के बाद उन्होंने तीन महीने का नोटिस देकर इस्तीफा स्वीकार करने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने का अनुरोध किया. हालांकि, PGI प्रशासन ने उनकी मांग ठुकरा दी. प्रशासन का तर्क था कि हाल ही में दो डॉक्टरों के संस्थान छोड़ने के कारण फैकल्टी की कमी है और ऐसे में उन्हें रिटायरमेंट देना उचित नहीं होगा.2000 में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर शुरू किया था करियरः 53 वर्षीय डॉ. ग्रोवर ने 1 जनवरी 2000 को PGI में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम शुरू किया था. इसके बाद वह असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर बने. 12 मई 2017 को उन्हें प्रोफेसर पद पर पदोन्नति मिली. संस्थान में फैकल्टी की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है, जबकि डॉ. ग्रोवर ने इससे करीब 12 साल पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग की थी. चंडीगढ़ पीजीआई की रिसर्च में 48.1% में मिला TP53 जीन का बदलाव PGI के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. ग्रोवर का इस्तीफा खारिज करने का आदेश रद्द, कैट ने दिए दोबारा विचार के निर्देश NGT की जांच के घेरे में वृंदावन में यमुना क्रूज प्रोजेक्ट, पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर सवाल क्या फिर संकट में पड़ सकती है राहुल गांधी की सांसदी?। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक के पूरे मामले पर स्थानीय अधिकारियों और पुलिस टीमों की पैनी नजर बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक मामले के हर एक पहलू की गहनता से पड़ताल की जा रही है ताकि किसी भी तरह की भ्रांति न रहे और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
| समाचार बिंदु | ताज़ा विवरण व स्थिति |
|---|---|
| मुख्य घटनाक्रम | PGI के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. ग्रोवर का इस्तीफा खार |
| संबंधित क्षेत्र / ज़िला | चंडीगढ़ |
| संबंधित संस्था / विभाग | संबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन |
| प्रमुख तथ्य व आंकड़े | 3 फरवरी, 25 सितंबर, 2 अगस्त, 2 फरवरी |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
विभागीय स्तर पर प्राथमिक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और उच्चाधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी भेज दी गई है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों से भी आवश्यक जानकारी व साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था व जनसुविधा पूरी तरह चाक-चौबंद बनी रहे।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





