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दिवाली पर संभल कर छोड़ें पटाखा, वरना कानों को पहुंच सकता है नुकसान, 30% मामलों में सुनने की क्षमता लौटना मुश्किल

चंडीगढ़: दिवाली पर पटाखे जलाते समय लोग अक्सर धुएं और वायु प्रदूषण की बात करते हैं, लेकिन तेज आवाज भी सेहत के लिए उतनी ही खतरनाक हो सकती है. पटाखों के कान।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
6 नवंबर 2026 को 11:20 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

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हरियाणा (दैनिक Reality विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): चंडीगढ़: दिवाली पर पटाखे जलाते समय लोग अक्सर धुएं और वायु प्रदूषण की बात करते हैं, लेकिन तेज आवाज भी सेहत के लिए उतनी ही खतरनाक हो सकती है. पटाखों के कान के पास फूटने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. कई मामलों में कान की नसों को ऐसा नुकसान पहुंचता है, जिससे सुनने की क्षमता हमेशा के लिए कम हो सकती है. अक्सर दिवाली के त्योहार के दौरान सेक्टर 32 एक ऐस हॉस्पिटल माना जाता है जहां सब से ज्यादा मरीज इलाज कराने के लिये पहुंचते हैं.तेज आवाज से कान की अंदरूनी नसों को पहुंचता है नुकसानः जीएमसीएच-32 के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. नितिन गुप्ता ने बताया कि तेज आवाज के कारण कान की अंदरूनी नसों को नुकसान पहुंचने की स्थिति को अकॉस्टिक ट्रॉमा कहा जाता है. सामान्य दिनों में इस तरह के 10 से 15 मामले सामने आते हैं, लेकिन दिवाली के बाद मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. कई बार एक साथ चार से पांच मरीज इस परेशानी के साथ अस्पताल पहुंचते हैं.70 फीसदी मरीज ठीक हो सकते हैंः डॉ. नितिन गुप्ता ने बताया कि तेज आवाज से प्रभावित कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है और पांच से सात दिन तक इलाज चलता है. ऐसे मामलों में करीब 70 फीसदी मरीजों के ठीक होने की संभावना रहती है, जबकि लगभग 30 फीसदी मामलों में सुनने की क्षमता को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. पटाखों से निकलने वाला धुआं भी नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है. जिन लोगों को पहले से एलर्जी, बार-बार छींक आने, नाक बहने या अस्थमा की समस्या है, उनकी परेशानी बढ़ सकती है. कई बार नाक और गले में शुरू हुई दिक्कत सांस की नली और फेफड़ों तक असर डाल सकती है. दिवाली पर संभल कर छोड़ें पटाखा, वरना कानों को पहुंच सकता है नुकसान, 30% मामलों में सुनने की क्षमता लौटना मुश्किल Muse, Claude और Gemini Omni में नए अपडेट: वॉयस चैट, पर्सनल फाइनेंस और 15s वीडियो 'क्या हमारे पास सिर्फ पुराने, आजमाए हुए और नाकाम उपाय ही बचे हैं?': दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त शुगर बढ़ते ही आंखों पर भी पड़ रहा असर, हर 5 में से 1 मरीज को रेटिना की बीमारी का खतरा, डॉक्टर्स बोले- "समय पर इलाज से टल सकता है खतरा" लड़कों से कम एक्टिव रहतीं लड़कियां; दुनिया के 24 करोड़ किशोर नहीं करते एक्सरसाइज। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

स्वास्थ्य समस्या / सुविधा के मुख्य लक्षण और कारण

इस पहल से क्षेत्र के नागरिकों को दैनिक आवागमन, प्रशासनिक कार्यों और मूलभूत सुविधाओं में बड़ा लाभ मिलेगा। संबंधित अधिकारियों को समय सीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य बिंदुविशेषज्ञ सलाह व सावधानियां
योजना / जनसुविधादिवाली पर संभल कर छोड़ें पटाखा, वरना कानों को पहुंच सकता है
संबंधित विभागराज्य प्रशासन व स्थानीय प्राधिकरण
नागरिक लाभसुगम आवागमन व बेहतर सुविधाएं

डॉक्टरों व चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरी सलाह

स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे जनहित में एक सार्थक प्रयास बताया है।

अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं और ओपीडी सेवाएं

आगामी दिनों में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन की उच्चस्तरीय समीक्षा की जाएगी ताकि आम जनता को किसी भी तरह की असुविधा न हो।

खान-पान, दिनचर्या और घरेलू सावधानियां

विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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