रविवार, 8 नवंबर 2026
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हिसार अग्निकांड: धुएं से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम और श्वसन सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय

हिसार में साइकिल शोरूम में लगी आग के बाद धुएं में फंसे लोगों के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने श्वसन तंत्र की सुरक्षा और फेफड़ों की देखभाल हेतु महत्वपूर्ण परामर्श जारी।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
8 नवंबर 2026 को 01:40 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हिसार अग्निकांड: धुएं से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम और श्वसन सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •धुएं के संपर्क में आने से श्वसन तंत्र और फेफड़ों पर पड़ता है गंभीर प्रभाव।
  • •प्लास्टिक और रबर के जलने से निकलने वाली जहरीली गैसें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक।
  • •दम घुटने की स्थिति में प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन थेरेपी है जीवनरक्षक।
  • •आपातकालीन स्थिति में मानसिक संतुलन और फेफड़ों की सुरक्षा के वैज्ञानिक तरीके।

हिसार के पारिजात चौक स्थित एक व्यापारिक प्रतिष्ठान में हुई अग्नि दुर्घटना ने न केवल संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि वहां मौजूद लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया। विशेषकर जब आग साइकिल और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों जैसे रबर और प्लास्टिक निर्मित सामानों में लगती है, तो उससे निकलने वाला धुआं सामान्य धुएं से कहीं अधिक विषाक्त होता है। ऐसी स्थिति में फंसे 15 लोगों का सुरक्षित निकलना राहत की बात है, लेकिन धुएं के संपर्क में आने के बाद शरीर पर होने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को समझना स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

स्वास्थ्य समस्या / सुविधा के मुख्य लक्षण और कारण

आग लगने की स्थिति में सबसे बड़ा स्वास्थ्य जोखिम 'स्मोक इनहेलेशन' यानी धुएं का फेफड़ों में जाना होता है। जब सिंथेटिक टायर, प्लास्टिक बॉडी और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे जलते हैं, तो वे कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन साइनाइड जैसी घातक गैसें छोड़ते हैं। ये गैसें रक्त में ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित कर देती हैं, जिससे व्यक्ति को चक्कर आना, सिरदर्द और बेहोशी महसूस हो सकती है। फेफड़ों की वायु नलिकाओं में सूजन आने से सांस लेने में तकलीफ (Dyspnea) की समस्या उत्पन्न होती है।

इसके अलावा, धुएं में मौजूद सूक्ष्म कण आँखों की कॉर्निया को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे जलन, अत्यधिक आंसू आना और धुंधलापन हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहता है, तो उसके श्वसन तंत्र की आंतरिक परत झुलस सकती है, जिसे 'थर्मल इंजरी' कहा जाता है। हिसार जैसी घटना में जहां बेसमेंट में धुआं भरा था, वहां ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है, जो हृदय और मस्तिष्क के लिए अत्यंत जोखिम भरा होता है।

स्वास्थ्य बिंदुविशेषज्ञ सलाह व सावधानियां
श्वसन मार्ग की सुरक्षाधुएं वाले क्षेत्र में रुमाल या कपड़ा गीला करके नाक पर रखें।
आँखों की जलनसाफ ठंडे पानी से आँखों को बार-बार धोएं, रगड़ें बिल्कुल नहीं।
मानसिक तनावऐसी स्थिति के बाद 'पैनिक अटैक' से बचने के लिए गहरी सांस लें।
त्वचा की देखभालराख और रसायनों के संपर्क में आई त्वचा को माइल्ड सोप से साफ करें।

डॉक्टरों व चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरी सलाह

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि आग की घटना से सुरक्षित निकलने के बाद भी अगले 24 से 48 घंटों तक व्यक्ति को चिकित्सकीय निगरानी में रहना चाहिए। कई बार 'पल्मोनरी एडिमा' (फेफड़ों में तरल पदार्थ भरना) के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते, बल्कि कुछ घंटों बाद उभरते हैं। यदि आपको खांसी में काला बलगम आ रहा है या आवाज में भारीपन महसूस हो रहा है, तो यह श्वसन तंत्र में क्षति का संकेत हो सकता है।

डॉक्टरों की सलाह है कि धुएं से प्रभावित व्यक्ति को तुरंत खुले और हवादार स्थान पर ले जाना चाहिए। यदि व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई हो रही है, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाकर ऑक्सीजन सैचुरेशन की जांच करानी चाहिए। शरीर में जमा विषाक्त गैसों को बाहर निकालने के लिए नेबुलाइजेशन और हाइड्रेशन एक प्रभावी उपचार प्रक्रिया मानी जाती है।

अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं और ओपीडी सेवाएं

ऐसी आपात स्थितियों के लिए आधुनिक अस्पतालों में 'पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट' (PFT) और चेस्ट एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध होती है। हिसार के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में तीव्र श्वसन संकट के लिए इमरजेंसी केयर यूनिट्स सक्रिय रहती हैं। इन इकाइयों में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और वेंटिलेटर की सुविधा होती है, जो धुएं के कारण फेफड़ों को पहुंची क्षति की रिकवरी में सहायक होती हैं।

ओपीडी सेवाओं में जाने वाले मरीजों को अपनी 'स्मोक एक्सपोजर' की हिस्ट्री डॉक्टर को विस्तार से बतानी चाहिए। विशेषज्ञ डॉक्टर ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से श्वसन नली की जांच कर सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई आंतरिक जलन या संक्रमण तो नहीं है। इसके साथ ही, धुएं के कारण होने वाली एलर्जी के लिए एंटी-हिस्टामाइन और स्टेरॉयड थेरेपी भी विशेषज्ञों की देखरेख में दी जाती है।

खान-पान, दिनचर्या और घरेलू सावधानियां

धुएं के प्रभाव से उबरने के लिए आहार में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। विटामिन-सी युक्त फल जैसे संतरा, नींबू और आंवला फेफड़ों की मरम्मत में मदद करते हैं। प्रचुर मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि शरीर से टॉक्सिन्स यूरिन के जरिए बाहर निकल सकें। अदरक और तुलसी का काढ़ा श्वसन मार्ग की सफाई के लिए एक प्राकृतिक और प्रभावी घरेलू उपाय है।

दिनचर्या में कुछ दिनों तक भारी व्यायाम से बचना चाहिए ताकि फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। घर के भीतर की वायु गुणवत्ता (Air Quality) को बनाए रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें या ताजी हवा के लिए खिड़कियां खुली रखें। यदि आपके घर या कार्यस्थल पर आग की कोई घटना होती है, तो भविष्य के लिए अग्निशमन यंत्रों के साथ-साथ 'फर्स्ट एड किट' में बर्न क्रीम और मास्क को अनिवार्य रूप से शामिल करें।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

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