हरियाणा (दैनिक Reality विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): CPCB New Guidline : स्टील और लोहा बनाने वाली भट्टियों से निकलने वाला कचरा (स्लैग) अब पर्यावरण के लिए सिरदर्द बनने के बजाय देश की सड़कें और इमारतें मजबूत करेगा।। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
स्वास्थ्य समस्या / सुविधा के मुख्य लक्षण और कारण
इस पहल से क्षेत्र के नागरिकों को दैनिक आवागमन, प्रशासनिक कार्यों और मूलभूत सुविधाओं में बड़ा लाभ मिलेगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने पायरो-मेटलर्जिकल स्लैग के सुरक्षित प्रबंधन और इस्तेमाल के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।। स्टील प्लांट्स अब इस धातु कचरे को खुले में नहीं फेंक सकेंगे, बल्कि इसकी रिसाइकिलिंग और व्यावसायिक इस्तेमाल अनिवार्य होगा।। भारत के इस्पात उद्योगों में रोजाना बड़े पैमाने पर उत्पादन से स्लैग का पहाड़ खड़ा हो जाता है, जो सही प्रबंधन न होने पर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाता है।।
| स्वास्थ्य बिंदु | विशेषज्ञ सलाह व सावधानियां |
|---|---|
| योजना / जनसुविधा | लोहे-स्टील के कचरे से बनेंगे हाईवे, ग्रामीण सड़कें और रेलवे ट |
| संबंधित विभाग | राज्य प्रशासन व स्थानीय प्राधिकरण |
| नागरिक लाभ | सुगम आवागमन व बेहतर सुविधाएं |
डॉक्टरों व चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरी सलाह
स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे जनहित में एक सार्थक प्रयास बताया है। अब तक बेकार समझे जाने वाले इस कचरे का उपयोग बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण में किया जाएगा।। गुजरात के सूरत में इस स्लैग का इस्तेमाल कर देश की पहली सफल सड़क बनाई भी जा चुकी है।। सीपीसीबी की इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा।। 1 टन स्टील में 220 किलो सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल करीब 2.4 करोड़ टन कचरा (स्लैग) निकलता है, जो 2030 तक बढ़कर 4.5 से 5 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।।
अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं और ओपीडी सेवाएं
आगामी दिनों में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन की उच्चस्तरीय समीक्षा की जाएगी ताकि आम जनता को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
खान-पान, दिनचर्या और घरेलू सावधानियां
विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। वर्तमान में स्टील मेकिंग स्लैग करीब 1.2 करोड़ टन निकल रहा है, जो 2030 तक 1.5 से 2 करोड़ तक पैदा होता है कचरा टन हो जाएगा।। ईएएफ और आईएफ स्लैग की मानें तो इनका उत्पादन अभी करीब 50 लाख टन सालाना है, जो 2030 तक 1 करोड़ टन से पार चला जाएगा।। एक टन स्टील बनाने के दौरान लगभग 150 से 220 किलोग्राम तक स्लैग पैदा हो जाता है।। पर्यावरण की सुरक्षा होगी जिन प्लांटों में अभी तक खुले और बिना बेस वाले यार्ड में स्लैग फेंका जा रहा है, उन्हें अगले 2 साल के भीतर इन सभी अनियोजित डंपिंग साइट्स को बंद करना होगा।।





