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हरियाणा में पराली जलाने पर कड़ा एक्शन: जींद और कैथल में 3 किसानों पर FIR और भारी जुर्माना, जमीन रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' दर्ज

जींद और कैथल में पराली जलाने पर 3 किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। भारी जुर्माने के साथ एफआईआर दर्ज हुई है और जमीन रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' कर दी गई है।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
27 अक्टूबर 2026 को 10:21 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा में पराली जलाने पर कड़ा एक्शन: जींद और कैथल में 3 किसानों पर FIR और भारी जुर्माना, जमीन रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' दर्ज
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •जींद के नरवाना और कैथल के मटौर गांव में सैटेलाइट लोकेशन के आधार पर पकड़ी गई पराली जलाने की घटनाएं।
  • •तीन किसानों पर कुल 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, कैथल में एक किसान के खिलाफ पुलिस केस दर्ज।
  • •जमीन रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' होने से किसानों को भविष्य में सरकारी सब्सिडी और मंडियों में फसल बेचने में होगी परेशानी।
  • •कृषि विभाग और 'हरसैक' (Harsac) ऐप की टीम 24 घंटे सैटेलाइट के जरिए खेतों की निगरानी कर रही है।

हरियाणा में धान की कटाई के सीजन के साथ ही पराली जलाने (Crop Residue Burning) की घटनाओं पर प्रशासन ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जींद और कैथल जिलों में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले तीन किसानों के खिलाफ कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। इन किसानों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया गया है, बल्कि उनके राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' भी दर्ज कर दी गई है, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।

प्रशासनिक मुस्तैदी का आलम यह है कि अब खेतों में लगने वाली आग की सूचना सीधे सैटेलाइट के माध्यम से प्राप्त की जा रही है। 'हरसैक' (Harsac) ऐप से मिली सटीक लोकेशन के आधार पर टीमों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम दिया। जींद के नरवाना क्षेत्र और कैथल के मटौर गांव में हुई इस कार्रवाई ने अन्य किसानों के बीच भी हड़कंप मचा दिया है।

जींद और कैथल में प्रशासनिक कार्रवाई का विवरण

जींद जिले के नरवाना में उपमंडल कृषि अधिकारी (SDO) के नेतृत्व में गठित विशेष फ्लाइंग स्क्वाड ने दो अलग-अलग स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि की। सैटेलाइट इमेज मिलने के तुरंत बाद टीम मौके पर पहुंची और उल्लंघन पाए जाने पर किसान प्रदीप कुमार पर 10,000 रुपये और किसान सतीश पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

वहीं, कैथल जिले में इस सीजन का पहला बड़ा मामला सामने आया है। मटौर गांव के किसान सुरेश कुमार ने अपने एक एकड़ खेत में धान के अवशेषों को आग के हवाले कर दिया था। सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि सैटेलाइट से मिली लोकेशन के बाद मौके पर पहुंची टीम ने साक्ष्य जुटाए और किसान के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाई। साथ ही, सुरेश कुमार पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

किसान का नामगांव/क्षेत्रजिलाकार्रवाई का स्वरूप
प्रदीप कुमारनरवानाजींद10,000 रुपये जुर्माना + रेड एंट्री
सतीशनरवानाजींद5,000 रुपये जुर्माना + रेड एंट्री
सुरेश कुमारमटौरकैथलFIR + 5,000 रुपये जुर्माना + रेड एंट्री

क्या है 'रेड एंट्री' और किसान पर इसका क्या होगा असर?

इस पूरी कार्रवाई में सबसे गंभीर पहलू 'रेड एंट्री' (Red Entry) का है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जब किसी किसान के भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज हो जाती है, तो उसे 'ब्लैकलिस्टेड' श्रेणी में माना जाता है। इसका अर्थ है कि भविष्य में वह किसान सरकार की किसी भी कृषि संबंधी योजना का लाभ नहीं ले पाएगा।

रेड एंट्री के कारण किसानों को मिलने वाली कृषि यंत्रों पर सब्सिडी, बीज और खाद पर मिलने वाली छूट और सबसे महत्वपूर्ण, 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल के माध्यम से मंडियों में फसल बेचने की प्रक्रिया में भारी बाधा उत्पन्न होगी। प्रशासन का यह कदम किसानों को पराली न जलाने के लिए मजबूर करने वाला एक प्रभावी कानूनी हथियार माना जा रहा है।

"सैटेलाइट के जरिए हर खेत पर नजर रखी जा रही है। पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि यह किसानों के लिए भी कानूनी और आर्थिक मुसीबत बन सकता है। हम किसानों से अपील करते हैं कि वे अवशेष प्रबंधन के आधुनिक तरीकों को अपनाएं।" - जगदीश मलिक, सहायक कृषि अभियंता, कैथल।

स्थानीय जनजीवन और पर्यावरण पर प्रभाव

हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट और जींद-कैथल जैसे कृषि प्रधान जिलों में पराली जलाने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) तेजी से गिरता है। इससे बुजुर्गों और बच्चों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन की इस सख्ती का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे हरियाणा में स्मॉग की स्थिति को रोकना है। हालांकि, किसान संगठनों का तर्क है कि सरकार को पराली प्रबंधन के लिए और अधिक मशीनें और आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध करानी चाहिए ताकि उन्हें ऐसे कठोर कदमों का सामना न करना पड़े।

आगामी कदम और निगरानी तंत्र

हरियाणा सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पराली जलाने के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी। इसके लिए ग्राम स्तर पर निगरानी कमेटियां बनाई गई हैं, जिनमें पटवारी, ग्राम सचिव और कृषि विकास अधिकारी शामिल हैं। आने वाले दिनों में यदि पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं आती है, तो प्रशासन और भी कड़े फैसले ले सकता है, जिसमें संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी शामिल है।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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