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हरियाणा में मनमानी टेंडरिंग पर लगाम: अब CM की पूर्व मंजूरी बिना जारी नहीं होंगे QCBS ठेके

हरियाणा सरकार ने QCBS टेंडरिंग पर लगाई रोक, अब मुख्यमंत्री की पूर्व मंजूरी बिना सरकारी विभागों के ठेके जारी नहीं होंगे। पारदर्शिता बढ़ाने का लक्ष्य।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
30 अक्टूबर 2026 को 01:27 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा में मनमानी टेंडरिंग पर लगाम: अब CM की पूर्व मंजूरी बिना जारी नहीं होंगे QCBS ठेके
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हरियाणा सरकार ने QCBS (क्वालिटी और लागत आधारित चयन) टेंडरिंग के नियमों में किया बड़ा बदलाव।
  • •सरकारी विभागों को अब मुख्यमंत्री की पूर्व मंजूरी के बिना QCBS प्रणाली से टेंडर जारी करने पर रोक।
  • •यह प्रक्रिया अब केवल अत्यधिक तकनीकी विशेषज्ञता या विशेष परामर्श सेवाओं वाले कार्यों तक सीमित रहेगी।
  • •इस कदम का उद्देश्य सरकारी ठेकों में पारदर्शिता बढ़ाना और मनमानी पर अंकुश लगाना है।

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने सरकारी विभागों में टेंडरिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य में 'क्वालिटी और लागत आधारित चयन' (Quality and Cost Based Selection - QCBS) प्रणाली के तहत कोई भी सरकारी टेंडर मुख्यमंत्री की पूर्व मंजूरी के बिना जारी नहीं किया जा सकेगा। यह कदम सरकारी खरीद में मनमानी पर अंकुश लगाने और केवल विशेष परिस्थितियों में ही इस प्रणाली के उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

वित्त विभाग द्वारा 21 सितंबर को जारी किए गए विस्तृत निर्देशों के अनुसार, QCBS प्रणाली का उपयोग अब केवल उन विशेष परियोजनाओं और सेवाओं तक सीमित रहेगा जिनमें असाधारण तकनीकी विशेषज्ञता, विशिष्ट अनुभव या विशेषज्ञ परामर्श सेवाओं की अनिवार्यता हो। यह नई व्यवस्था हरियाणा के प्रशासनिक ढांचे में सरकारी ठेकों की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका सीधा असर राज्य के विकास कार्यों और जनहित से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा।

घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम

पहले, सरकारी विभाग कुछ हद तक अपनी सुविधानुसार QCBS प्रणाली का उपयोग कर सकते थे, जिससे कई बार ऐसी शिकायतें सामने आती थीं कि यह प्रणाली अनावश्यक रूप से या उन कार्यों के लिए भी अपनाई जा रही है जहां इसकी विशेष आवश्यकता नहीं थी। इस प्रक्रिया में कंपनियों का चयन केवल सबसे कम बोली लगाने के आधार पर नहीं होता, बल्कि तकनीकी योग्यता, अनुभव, कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय प्रस्ताव जैसे विभिन्न निर्धारित मानकों पर भी कंपनियों का मूल्यांकन किया जाता है। हालांकि, इस लचीलेपन का दुरुपयोग मनमानी ठेकेदारी या कुछ पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए होने की आशंकाएं अक्सर व्यक्त की जाती थीं।

नई व्यवस्था के तहत, यदि किसी विभाग को QCBS प्रणाली से टेंडर आमंत्रित करना है, तो उसे पहले अपने प्रशासनिक विभाग के माध्यम से एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजना होगा। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद ही संबंधित विभाग टेंडर आमंत्रित करने का नोटिस जारी कर सकेगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि QCBS का उपयोग केवल वहीं हो जहां यह वास्तव में आवश्यक हो, जैसे कि स्कूलों और कॉलेजों में विशेष तकनीकी परियोजनाओं, डिजिटल शिक्षा प्रणाली के विकास, या विशेषज्ञ परामर्श सेवाओं की खरीद में। सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि हर खरीद में इस पद्धति को अपनाना अब अनिवार्य या आसान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए ठोस औचित्य प्रस्तुत करना होगा।

बिंदुविवरण
नियम का स्रोतहरियाणा सरकार का वित्त विभाग (निर्देश: 21 सितंबर)
प्रभावित प्रणालीक्वालिटी और लागत आधारित चयन (QCBS) टेंडरिंग
आवश्यक मंजूरीमुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति अनिवार्य
उपयोग की सीमाअत्यधिक तकनीकी विशेषज्ञता, विशेष अनुभव या विशेषज्ञ परामर्श सेवाओं वाले कार्य
उद्देश्यसरकारी खरीद में पारदर्शिता बढ़ाना, मनमानी पर अंकुश
प्रक्रियाप्रशासनिक विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रस्ताव

अधिकारियों व जांच दल की भूमिका

हरियाणा सरकार का यह निर्णय राज्य में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वित्त विभाग द्वारा जारी किए गए इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य सरकारी ठेकों में होने वाली संभावित अनियमितताओं को रोकना और सार्वजनिक धन का सदुपयोग सुनिश्चित करना है। यह नीतिगत बदलाव दर्शाता है कि सरकार उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है जहां पहले मनमानी या अपारदर्शिता की गुंजाइश थी। इस फैसले से विभागों को अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ टेंडर प्रक्रियाएं संचालित करनी होंगी।

मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले कुछ समय से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया है। यह निर्णय उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें सरकारी सेवाओं में सुधार, भ्रष्टाचार पर लगाम और जनहित को सर्वोपरि रखना शामिल है। अधिकारियों को अब इन नए दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि टेंडरिंग प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की चूक या मनमानी की आशंका को समाप्त किया जा सके।

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव

इस नई व्यवस्था का सीधा असर हरियाणा के जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा। एक ओर, यह सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा, क्योंकि QCBS प्रणाली का सही उपयोग होने पर सर्वश्रेष्ठ तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभव वाली कंपनियों को ही ठेके मिलेंगे। इससे सड़कों, भवनों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। दूसरी ओर, यह ठेकेदारों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा, जिससे छोटे और मंझोले ठेकेदारों को भी समान अवसर मिल सकेंगे, बशर्ते वे निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हों।

पारदर्शिता बढ़ने से जनता का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास भी बढ़ेगा। जब ठेकों में मनमानी की संभावना कम होगी, तो जनता को यह भरोसा होगा कि उनके करों का पैसा सही तरीके से और जनहित में खर्च हो रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में थोड़ी देरी हो सकती है क्योंकि अब हर QCBS टेंडर के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी आवश्यक होगी, लेकिन सरकार का मानना है कि दीर्घकालिक लाभ और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है। यह कदम राज्य में एक अधिक जवाबदेह और निष्पक्ष प्रशासनिक माहौल बनाने में सहायक होगा।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

इस नए फरमान के बाद, हरियाणा के सभी सरकारी विभागों को अपने टेंडरिंग प्रोटोकॉल को तत्काल अपडेट करना होगा। प्रशासनिक विभागों को अब QCBS प्रणाली के तहत आने वाले हर प्रस्ताव की गहन समीक्षा करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजने से पहले सभी आवश्यक मानदंडों को पूरा करते हों। भविष्य में, इन दिशानिर्देशों के पालन की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जा सकता है, ताकि किसी भी उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। यह कदम हरियाणा सरकार की 'रिश्वतखोरी में पकड़े गए दागी अफसरों की अब खैर नहीं' जैसी अन्य कड़े फैसलों के अनुरूप है, जो भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार समय-समय पर प्रशासनिक सुधारों को लागू करती रहेगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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