हरियाणा के करनाल सहित विभिन्न जिलों की अनाज मंडियों में धान की खरीद का कार्य लगातार जारी है। राज्य सरकार और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का पूरा लाभ देने के लिए मंडियों में प्रशासनिक प्रबंध पुख्ता किए जा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों और किसान प्रतिनिधियों का मानना है कि फसल की समयबद्ध खरीद और उठान प्रक्रिया से ही किसानों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
मंडियों में फसल आवक, खरीद व एमएसपी दरें
करनाल और आसपास के क्षेत्रों की अनाज मंडियों में धान की विभिन्न किस्मों की आवक दर्ज की जा रही है। सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार एजेंसी अधिकारी मंडियों में नमी की जांच के बाद फसल की खरीद सुनिश्चित कर रहे हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी फसल को सुखाकर और साफ करके मंडियों में लाएं ताकि किसी भी प्रकार की कटौती से बचा जा सके।
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की पारदर्शी खरीद के लिए मंडियों में हेल्पडेस्क और तौल मशीनों का निरीक्षण नियमित रूप से किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सभी योग्य किसानों की उपज की खरीद सरकारी दरों पर की जाएगी और खरीद के साथ ही डिजिटल पोर्टल के माध्यम से रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा है।
| मंडी व कृषि विवरण | वर्तमान स्थिति, दरें व प्रबंध |
|---|---|
| धान आवक व एमएसपी खरीद | सरकारी एजेंसियों द्वारा निर्धारित एमएसपी दरों पर धान की खरीद जारी। |
| उठान व मिलिंग स्थिति | राइस मिलों को आवंटन एवं मंडियों से उठान प्रक्रिया की निगरानी। |
| गेट पास व सत्यापन | मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के माध्यम से किसानों का सत्यापन। |
| भुगतान समय-सीमा | खरीदे गए धान का सीधा भुगतान किसान के बैंक खातों में प्रक्रियाधीन। |
किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश व भुगतान व्यवस्था
कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर पंजीकृत जानकारी के अनुसार ही मंडियों में फसल लेकर पहुंचें। इससे मंडियों में अनियंत्रित भीड़ से बचा जा सकेगा और तौल एवं गेट पास की प्रक्रिया सुगम बनी रहेगी। किसान मंडी आने से पूर्व अपने नमी स्तर की जांच अवश्य कर लें।
फसल की बिक्री के पश्चात भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरैक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित किया जा रहा है। यदि किसी किसान को भुगतान या गेट पास जारी कराने में कठिनाई आ रही है, तो वे मंडी समिति के सहायता केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं।
मौसम, खाद-बीज और फसल सुरक्षा के उपाय
आगामी रबी फसलों की बुआई के दृष्टिगत कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय पर खेत तैयार करने की सलाह दी है। मंडियों में काम निपटाने के साथ-साथ किसान गेहूं व अन्य रबी फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण खाद और प्रामाणिक बीजों का चयन करें। नमी की सही स्थिति में ही बीजों की बुआई करें ताकि बेहतर अंकुरण हो सके।
इसके अलावा, खेतों में धान के अवशेष (पराली) को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने के निर्देश दिए गए हैं। सुपर सीडर और इन-सीटू कृषि यंत्रों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें, जिससे अगली फसल की लागत कम हो और पैदावार अधिक मिले।
प्रशासनिक प्रबंध और उठान की स्थिति
मंडियों में धान का उठान समय पर होना बेहद आवश्यक है ताकि आने वाली फसलों के लिए स्थान उपलब्ध रहे। प्रशासन द्वारा राइस मिलरों और परिवहन ठेकेदारों के साथ समन्वय बनाकर बोरियों का उठान तेजी से कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिन मिलों की प्रक्रिया में अड़चन है, उन्हें जल्द से जल्द दुरुस्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों को मंडी परिसर में पेयजल, रोशनी और तिरपाल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कृषि अधिकारी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।





