हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पिछले दो दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों (Guest Teachers) के लिए इस बार की दिवाली निराशा लेकर आई है। प्रदेश सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए करीब 12,000 गेस्ट टीचर्स को नियमित करने के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी किए गए 'स्पीकिंग आदेशों' ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिसके सहारे हजारों शिक्षक वर्षों से कानूनी और धरातल पर लड़ाई लड़ रहे थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में वे संवैधानिक और प्रशासनिक मानक नहीं अपनाए गए थे, जो एक नियमित सरकारी कर्मचारी की भर्ती के लिए अनिवार्य होते हैं।
यह मामला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे 21 वर्षों का लंबा संघर्ष और कानूनी पेचीदगियां शामिल हैं। शिक्षा विभाग ने अपनी दलील में कहा है कि इन शिक्षकों को वर्ष 2005 में केवल तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए 'प्रति पीरियड' के आधार पर रखा गया था। उस समय स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी और पठन-पाठन को सुचारू रखने के लिए स्थानीय स्तर पर प्राचार्यों और मुख्याध्यापकों को इन्हें नियुक्त करने के अधिकार दिए गए थे। चूंकि उस प्रक्रिया में खुली प्रतियोगिता, लिखित परीक्षा, मेरिट सूची और राज्य की आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया था, इसलिए अब इन्हें नियमित कैडर का हिस्सा बनाना कानूनन संभव नहीं है।
भर्ती प्रक्रिया और कानूनी बाधाओं का विस्तृत विश्लेषण
शिक्षा विभाग द्वारा जारी विस्तृत आदेशों में उन मुख्य कारणों का उल्लेख किया गया है जिनकी वजह से गेस्ट टीचर्स को 2014 की नियमितीकरण नीति का लाभ नहीं दिया जा सकता। विभाग के अनुसार, नियमित भर्ती के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) या हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) जैसी संस्थाओं के माध्यम से विज्ञापन जारी होना अनिवार्य है। 2005 की नियुक्तियां एक तदर्थ व्यवस्था (Ad-hoc arrangement) थी। विभाग ने यह भी तर्क दिया कि गेस्ट टीचर्स को एक निश्चित अवधि के लिए रखा गया था और उनकी सेवा शर्तें नियमित कर्मचारियों से पूरी तरह भिन्न थीं।
| महत्वपूर्ण तथ्य | विवरण एवं डेटा |
|---|---|
| कुल प्रभावित शिक्षक | लगभग 12,000 अतिथि अध्यापक |
| प्रथम नियुक्ति वर्ष | वर्ष 2005 (विभिन्न चरणों में) |
| नियुक्ति का मुख्य आधार | स्कूल स्तर पर रिक्त पदों को भरने हेतु प्रति पीरियड मानदेय |
| विभाग का मुख्य कानूनी तर्क | चयन प्रक्रिया में मेरिट, परीक्षा और आरक्षण का अभाव |
| कोर्ट का हालिया हस्तक्षेप | 6 अगस्त 2024 को सरकार को तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने का आदेश |
| जारी आदेश का स्वरूप | विस्तृत स्पीकिंग ऑर्डर (Speaking Order) |
अदालती कार्यवाही और सरकार का पक्ष
गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण का मामला लंबे समय से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में घूम रहा था। इसी वर्ष 6 अगस्त को अदालत ने राज्य सरकार की एक अपील पर सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी थी कि सरकार उपलब्ध तथ्यों और कानूनी सिद्धांतों के आधार पर गेस्ट टीचर्स के भविष्य पर फैसला ले। अदालत ने सरकार को यह छूट दी थी कि यदि वह सेवा नियमित करने में असमर्थ है, तो उचित और तर्कसंगत कारणों के साथ आदेश जारी करे। इसी आदेश के अनुपालन में अब शिक्षा विभाग ने लिखित में स्पष्ट किया है कि नियमितीकरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा वह प्रक्रिया है जिसके तहत इन्हें सेवा में लिया गया था।
"अतिथि अध्यापकों की नियुक्ति किसी स्वीकृत पद के विरुद्ध नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से नहीं की गई थी। चयन के समय सार्वजनिक विज्ञापन या व्यापक प्रतिस्पर्धा का अभाव था, जिसके कारण इन्हें नियमित कर्मचारियों के समकक्ष नहीं माना जा सकता।" - शिक्षा विभाग के स्पीकिंग आदेश का अंश
स्थानीय जनजीवन और शिक्षकों के भविष्य पर प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर हरियाणा के हजारों परिवारों पर पड़ेगा। पानीपत, करनाल, सोनीपत और रोहतक जैसे जिलों में बड़ी संख्या में गेस्ट टीचर्स कार्यरत हैं, जो पिछले कई वर्षों से इस उम्मीद में थे कि सरकार उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें पक्का करेगी। शिक्षकों के संगठनों का तर्क है कि उन्होंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण 20 साल शिक्षा विभाग को दिए हैं और अब इस उम्र में वे किसी अन्य भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते। इस फैसले के बाद शिक्षकों में भारी रोष है और आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और सड़कों पर इसके विरोध की गूंज सुनाई दे सकती है।
आगामी कदम और संभावित चुनौतियां
शिक्षा विभाग के इस रुख के बाद अब गेस्ट टीचर्स के पास कानूनी विकल्प सीमित रह गए हैं। हालांकि, सरकार ने उन्हें 58 या 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बनाए रखने और समय-समय पर मानदेय बढ़ाने का आश्वासन पहले भी दिया है, लेकिन 'नियमित कर्मचारी' का दर्जा मिलना अब लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है। शिक्षक संगठन इस आदेश को दोबारा अदालत में चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। वहीं, शिक्षा विभाग अब नई नियमित भर्तियों (TGT/PGT) के माध्यम से रिक्त पदों को भरने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे गेस्ट टीचर्स के पदों पर और अधिक संकट मंडरा सकता है।





