हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले 10,757 गेस्ट टीचरों ने अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में जुटे हजारों अतिथि अध्यापकों ने 'न्याय रैली' के माध्यम से चंडीगढ़ कूच का बिगुल फूंका। कुरुक्षेत्र के पिपली स्थित ताज पार्क से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जैसे ही जीटी रोड पर पहुंचा, वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई। अपनी नौकरी पक्की कराने की जिद पर अड़े ये शिक्षक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।
दोपहर करीब ढाई बजे शुरू हुए इस पैदल मार्च के दौरान पिपली मिनी जू के पास प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सड़क पर ही धरना दे दिया। विशेष रूप से महिला गेस्ट टीचर्स ने सड़क पर बैठकर अपनी व्यथा व्यक्त की और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन के कारण दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग (GT Road) पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने यातायात सुचारू रखने के लिए सर्विस लेन का सहारा लिया, लेकिन यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
मांगों का विस्तृत ब्यौरा और प्रशासनिक गतिरोध
गेस्ट टीचरों का यह आंदोलन केवल सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों पुराना कानूनी और नीतिगत संघर्ष है। शिक्षकों का तर्क है कि सरकार जानबूझकर उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है, जबकि वे दशकों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। उनकी मांग है कि 28 मई 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर उन्हें सेवा का लाभ दिया जाए।
| प्रमुख विवरण | शिक्षक संघ की मांग और तथ्य |
|---|---|
| कुल प्रभावित शिक्षक | 10,757 गेस्ट टीचर |
| मुख्य नीति संदर्भ | वर्ष 2014 की 3 वर्षीय नियमितीकरण नीति |
| आर्थिक मांग | 28 मई 2014 से बकाया लाभ + 6% वार्षिक ब्याज |
| अतिरिक्त लाभ | ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ |
| वर्तमान स्थिति | 23 जून से लघु सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना |
शिक्षकों का कहना है कि वे केवल वही मांग रहे हैं जो कोर्ट के आदेशों और पूर्व की सरकारी नीतियों के अनुसार उनका हक बनता है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, सरकार ने बार-बार आश्वासन तो दिए लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी के विरोध में अब वे चंडीगढ़ पहुंचकर हरियाणा के राज्यपाल को अपना मांग पत्र सौंपेंगे।
पुलिस बल की तैनाती और पिछले संघर्षों की याद
कुरुक्षेत्र से शुरू हुए इस मार्च को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। प्रदर्शनकारियों का पहला पड़ाव शाहाबाद में तय किया गया है, जिसके बाद वे अंबाला होते हुए चंडीगढ़ की सीमा में प्रवेश करेंगे। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब गेस्ट टीचर सड़कों पर उतरे हैं। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी मुख्यमंत्री आवास के घेराव की कोशिश के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था, जिससे माहौल काफी गरमा गया था।
"हम पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही। अब हमारे पास चंडीगढ़ कूच करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। जब तक 2014 की नीति के तहत हमें पक्का नहीं किया जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।"
जनजीवन और यातायात पर व्यापक असर
हरियाणा की लाइफलाइन कहे जाने वाले जीटी रोड पर इस विरोध प्रदर्शन का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। रविवार का दिन होने के कारण सड़क पर ट्रैफिक का दबाव पहले से ही अधिक था, ऊपर से हजारों शिक्षकों के पैदल मार्च ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। कुरुक्षेत्र, शाहाबाद और अंबाला बेल्ट के व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को इस आंदोलन के कारण वैकल्पिक मार्गों का चुनाव करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण और आगामी कदम
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन लगातार शिक्षक नेताओं के संपर्क में हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। हालांकि, शिक्षक संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस लिखित आश्वासन या अधिसूचना जारी नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। चंडीगढ़ प्रशासन ने भी पंचकूला-चंडीगढ़ बॉर्डर पर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है ताकि राजधानी की कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। आने वाले 24 घंटे हरियाणा की राजनीति और शिक्षा विभाग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।





