हरियाणा के सरकारी स्कूलों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों (Guest Teachers) ने अपनी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक मैदान से रविवार को हजारों की संख्या में गेस्ट टीचर्स ने 'न्याय रैली' का आगाज किया। यह रैली महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि कुरुक्षेत्र से राजधानी चंडीगढ़ तक का एक लंबा पैदल मार्च है, जिसमें 10,757 शिक्षकों का भविष्य दांव पर लगा है।
शिक्षकों का यह जत्था दोपहर करीब ढाई बजे पिपली स्थित ताज पार्क से रवाना हुआ। हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां लिए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए ये शिक्षक शाहाबाद की ओर बढ़ रहे हैं, जो उनकी इस पदयात्रा का पहला पड़ाव होगा। शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार उनकी सेवाओं को नियमित करने का लिखित आश्वासन और ठोस नीति लागू नहीं करती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।
गेस्ट टीचर्स की मुख्य मांगें और आंदोलन का सांख्यिकीय विवरण
| विवरण | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| कुल प्रभावित गेस्ट टीचर्स | 10,757 शिक्षक |
| आंदोलन का स्वरूप | कुरुक्षेत्र से चंडीगढ़ पैदल मार्च (न्याय रैली) |
| प्रमुख मांग | 2014 की नियमितीकरण नीति लागू करना |
| वित्तीय मांग | 28 मई 2014 से एरियर पर 6% वार्षिक ब्याज |
| अन्य लाभ | ग्रेच्युटी, पेंशन और मेडिकल लीव की सुविधा |
| आगामी रणनीति | 1 नवंबर को प्रदेश के 6 जिलों में बड़ी रैलियां |
2014 की नीति और कानूनी पेच: क्यों अड़े हैं शिक्षक?
अतिथि अध्यापकों के इस आक्रोश की जड़ें साल 2014 की उस नियमितीकरण नीति में छिपी हैं, जिसे तत्कालीन सरकार ने तीन साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए बनाया था। गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों का तर्क है कि वे पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, ऐसे में उन्हें इस नीति का लाभ मिलना ही चाहिए। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार कोर्ट के आदेशों की व्याख्या अपने तरीके से कर रही है, जबकि अदालत ने उनके हक में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं।
"सरकार ने 2014 में जो तीन साल की नियमितीकरण नीति बनाई थी, हम उसे पूरी तरह लागू करने की मांग कर रहे हैं। हमारे कई साथी पात्रता शर्तें पूरी करते हैं, फिर भी उन्हें पक्का नहीं किया जा रहा। हम 28 मई 2014 से अपनी सेवाओं को नियमित मानकर बकाया राशि और उस पर ब्याज की मांग कर रहे हैं। यह हमारे हक की लड़ाई है।" - दिनेश यादव, स्टेट प्रधान, गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा।
आंदोलन का अगला चरण: मंत्रियों और विधायकों की घेराबंदी
गेस्ट टीचर्स ने अपने इस आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना तैयार की है। पैदल मार्च के साथ-साथ, 26 अक्टूबर को प्रदेश के सभी मंत्रियों और विधायकों को उनके आवास पर जाकर मांग पत्र सौंपे जाएंगे। यदि इसके बावजूद सरकार का रुख सकारात्मक नहीं रहता, तो 1 नवंबर को हरियाणा दिवस के अवसर पर गुरुग्राम, कैथल, अंबाला, करनाल, हिसार और रोहतक जैसे प्रमुख शहरों में विशाल रैलियां आयोजित की जाएंगी।
प्रशासनिक चुनौतियां और आम जनजीवन पर प्रभाव
10 हजार से ज्यादा शिक्षकों के सड़क पर उतरने से जीटी रोड बेल्ट पर यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, लेकिन शिक्षकों के संकल्प को देखते हुए टकराव की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि इससे पहले 10 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास के घेराव के दौरान पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा था। 23 जून से लघु सचिवालय में जारी अनिश्चितकालीन धरना अब एक व्यापक प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है।
निष्कर्ष: क्या निकलेगा समाधान?
हरियाणा सरकार के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है। एक ओर जहां शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी एक बड़ा मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर 10 हजार से अधिक अनुभवी शिक्षकों का यह विरोध प्रदर्शन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार बीच का रास्ता निकालते हुए नए सेवा नियमों में ईपीएफ (EPF), वेतन वृद्धि और मेडिकल लीव के स्पष्ट प्रावधान जोड़ती है, तो शायद इस गतिरोध को कम किया जा सके। फिलहाल, चंडीगढ़ की ओर बढ़ते शिक्षकों के कदम थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।





