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हरियाणा: बिजली निजीकरण के मुद्दे पर इनेलो नेता संपत सिंह का सरकार पर प्रहार, कांग्रेस की 'खामोशी' को बताया मिलीभगत

हिसार में इनेलो नेता प्रो. संपत सिंह ने बिजली निजीकरण को लेकर भाजपा सरकार और कांग्रेस को घेरा। उन्होंने बिजली निगमों में 25,000 खाली पदों पर भर्ती की मांग उठाई।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
24 अक्टूबर 2026 को 09:07 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा: बिजली निजीकरण के मुद्दे पर इनेलो नेता संपत सिंह का सरकार पर प्रहार, कांग्रेस की 'खामोशी' को बताया मिलीभगत
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •प्रो. संपत सिंह का दावा: बिजली कर्मचारियों के उग्र आंदोलन के दबाव में बैकफुट पर आई हरियाणा सरकार।
  • •कांग्रेस पर गंभीर आरोप: गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर मुख्य विपक्षी दल रहा मौन।
  • •रोजगार संकट: प्रदेश के बिजली निगमों में 50 हजार में से 25 हजार पद खाली, पक्की भर्ती की उठाई मांग।
  • •कानूनी हस्तक्षेप: बिजली अधिनियम 2003 की धारा 108 का हवाला देते हुए नियामक आयोग को निर्देश देने की अपील।

हरियाणा की राजनीति में बिजली वितरण के निजीकरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने इस मसले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार को आड़े हाथों लिया है। हिसार के सेक्टर-15 स्थित अपने निवास स्थान पर आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता के दौरान संपत सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार बिजली निगमों को निजी हाथों में सौंपने की पूरी तैयारी कर चुकी थी, लेकिन बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के एकजुट और उग्र आंदोलन ने सत्ता पक्ष को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया है।

संपत सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रदेश की जनता की जीत बताते हुए कहा कि सरकार अब केवल समीक्षा याचिका (Review Petition) के नाम पर समय काटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार को 'बैकफुट' पर आने के बजाय इस निजीकरण के प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से पूरी तरह रद्द कर देना चाहिए। इनेलो नेता ने बिजली क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को चिंताजनक बताते हुए प्रशासनिक और राजनीतिक खामियों को उजागर किया।

प्रशासनिक ढांचा और खाली पदों का गणित

प्रो. संपत सिंह ने बिजली निगमों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले निगमों में भारी मात्रा में स्टाफ की कमी है, जो सीधे तौर पर सेवाओं को प्रभावित कर रही है। उनके अनुसार, विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर लंबे समय से नियुक्तियां नहीं हुई हैं।

विवरणआंकड़े/जानकारी
कुल स्वीकृत पद (बिजली निगम)लगभग 50,000
वर्तमान में रिक्त पदकरीब 25,000
प्रभावित क्षेत्र (निजीकरण प्रस्ताव)गुरुग्राम और नूंह (मेवात)
प्रासंगिक कानूनी धाराबिजली अधिनियम 2003 (धारा 108)
मुख्य मांगपक्की भर्ती और निजीकरण का पूर्ण रद्दीकरण

कांग्रेस की भूमिका पर तीखे सवाल

पत्रकार वार्ता के दौरान संपत सिंह का सबसे तीखा हमला मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर रहा। उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली पर संदेह जताते हुए कहा कि जब गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनियों को पैरलल बिजली वितरण (Parallel Licensing) का लाइसेंस देने की प्रक्रिया चल रही थी, तब कांग्रेस के नेता और विधायक चुप्पी साधे रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर केवल इनेलो ने ही जनता की आवाज उठाई और सड़कों पर संघर्ष किया।

संपत सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस के 9 विधायक इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा से भाग गए। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्या कारण था कि कांग्रेस ने नियामक आयोग (HERC) के समक्ष इस जनविरोधी फैसले का विरोध नहीं किया? इनेलो नेता के अनुसार, यह चुप्पी भाजपा और कांग्रेस के बीच किसी गुप्त समझौते की ओर इशारा करती है, जिससे प्रदेश के उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

कानूनी पेच और नियामक आयोग को निर्देश

बिजली अधिनियम 2003 की बारीकियों का जिक्र करते हुए संपत सिंह ने सरकार को संवैधानिक रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल बयानबाजी करने के बजाय धारा 108 का उपयोग करना चाहिए। इस धारा के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह जनहित में राज्य विद्युत नियामक आयोग को नीतिगत दिशा-निर्देश जारी कर सके।

"सरकार को चाहिए कि वह समीक्षा याचिका के नाम पर मामले को लटकाने के बजाय बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत स्पष्ट निर्देश जारी करे कि प्रदेश में किसी भी निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। बिजली उपभोक्ताओं का शोषण रोकने का यही एकमात्र कानूनी तरीका है।" - प्रो. संपत सिंह, वरिष्ठ नेता, इनेलो

जनहित और भविष्य की रणनीति

लेख के अंत में संपत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण के प्रस्ताव को पूरी तरह से कूड़ेदान में नहीं डाला और खाली पदों पर पक्की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो इनेलो इस आंदोलन को और तेज करेगी। उन्होंने कहा कि बिजली एक बुनियादी सुविधा है और इसका निजीकरण होने से टैरिफ में भारी बढ़ोतरी होगी, जिसका सीधा बोझ हरियाणा के किसानों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह आउटसोर्सिंग और कौशल रोजगार निगम के बजाय पारदर्शी तरीके से नियमित भर्ती करे ताकि युवाओं को स्थायी रोजगार मिले और बिजली निगमों की कार्यक्षमता में सुधार हो सके। संपत सिंह के इन बयानों ने हरियाणा की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले समय में विधानसभा की कार्यवाही और स्थानीय राजनीति पर दिखना तय है।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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