हरियाणा के ऊर्जा उपभोक्ताओं के लिए आगामी बहत्तर घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। राज्यभर के बिजली निगमों से जुड़े तमाम अधिकारी और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आज रात ठीक दस बजे से तीन दिन की पूर्ण हड़ताल पर जा रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी और राज्यस्तरीय विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह सरकार द्वारा गुरुग्राम और नूंह जिलों में विद्युत वितरण तथा प्रबंधन के कार्यों को एक निजी कंपनी के हाथों में सौंपने का निर्णय है। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक महकमा निजीकरण के इस प्रस्ताव को पूरी तरह वापस नहीं लेता, तब तक उनका यह आंदोलन निरंतर जारी रहेगा, जिससे पूरे प्रशासनिक ढांचे में खलबली मच गई है।
हड़ताल के इस एलान के कारण प्रदेश की संपूर्ण विद्युत व्यवस्था के चरमराने का अंदेशा जताया जा रहा है। साझा मोर्चा के बैनर तले एकजुट हुए कर्मियों ने दो टूक कह दिया है कि इस तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान यदि किसी भी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित होती है, कोई ट्रांसफार्मर जलता है या लाइन में फाल्ट आता है, तो तकनीकी अमला उसे दुरुस्त करने के लिए आगे नहीं आएगा। निचले स्तर के लाइनमैन से लेकर उच्च पद पर आसीन चीफ इंजीनियर और एसडीओ रैंक के अधिकारी भी इस बहिष्कार में शामिल हो रहे हैं, जिससे आपूर्ति तंत्र पर गहरा असर पड़ सकता है।
| हड़ताल से संबंधित विवरण | मुख्य तथ्य व प्रशासनिक स्थिति |
|---|---|
| आंदोलन की शुरुआत | बुधवार, रात 10:00 बजे से |
| हड़ताल की कुल अवधि | अगले तीन दिन (निरंतर) |
| मुख्य विरोध का कारण | गुरुग्राम और नूंह में 'इलेवन पावर' निजी कंपनी को लाइसेंस देना |
| शामिल मुख्य संवर्ग | चीफ इंजीनियर, एसडीओ, जूनियर इंजीनियर और फील्ड स्टाफ |
| वैकल्पिक प्रशासनिक कदम | सब-स्टेशनों पर बाहरी राज्यों से अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती |
प्रशासनिक तैयारियां और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के निर्देश
कर्मचारियों के अचानक लामबंद होने और कामकाज ठप करने की चेतावनी के बाद शासन-प्रशासन ने भी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए अपनी कमर कस ली है। बिजली महकमे के उच्चाधिकारियों द्वारा यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न होना पड़े। इसके लिए सभी महत्वपूर्ण सब-स्टेशनों और ग्रिड्स पर सुचारू रूप से कार्य संचालन हेतु अतिरिक्त श्रमशक्ति तैनात करने के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार की ओर से यह भी योजना बनाई गई है कि जरूरत पड़ने पर पड़ोसी राज्यों से तकनीकी कर्मचारियों को बुलाकर आपातकालीन सेवाओं को बहाल रखा जाए।
प्रदेश में बिजली व्यवस्था को पटरी पर बनाए रखने और उपभोक्ताओं को किसी बड़ी असुविधा से बचाने के लिए अन्य राज्यों से भी अतिरिक्त कार्यबल उपलब्ध कराने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में त्वरित कदम उठाए जा सकें।
आम जनजीवन और औद्योगिक गतिविधियों पर मंडराता संकट
बिजली कर्मियों के इस कड़े रुख का सीधा प्रभाव हरियाणा के घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और औद्योगिक इकाइयों पर पड़ना तय है। विशेषकर जीटी रोड बेल्ट और शहरी क्षेत्रों में जहां बिजली की मांग लगातार बनी रहती है, वहां तीन दिनों तक फॉल्ट ठीक न होने की स्थिति में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। गर्मियों और उमस के इस दौर में बिजली गुल होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है, वहीं पानी की आपूर्ति भी इससे प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। व्यापारिक संघों ने भी इस हड़ताल को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है क्योंकि बिजली कटौती से उत्पादन कार्यों को बड़ा झटका लग सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर शासन की पैनी नजर बनी हुई है और कर्मचारी नेताओं के साथ संवाद के जरिए इस गतिरोध को समाप्त करने के भी प्रयास अंदरखाने चल रहे हैं। हालांकि, यूनियनों के अपने रुख पर अड़े रहने के कारण अगले कुछ घंटों में स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। प्रशासन की प्राथमिकता यही है कि हड़ताल के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े और बिजली के बुनियादी ढांचे को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाया जा सके।





