हरियाणा में महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, प्रदेश की 74 क्रेच कार्यकर्ताओं को अब न्यूनतम 19,900 रुपये मासिक मानदेय प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय जमीनी स्तर पर जनसुविधाओं को सुदृढ़ करने और सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विकास कार्य / जनसुविधा का पूरा ब्योरा और रूट
महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस प्रशासनिक सुधार को अमलीजामा पहनाने के लिए बजट का पूरा खाका तैयार कर लिया है। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, पूर्व में निर्धारित 15,000 रुपये के बजट और अब संशोधित 19,900 रुपये के बीच 4,900 रुपये के अंतर की भरपाई के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है। विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए फरवरी 2027 तक की कुल राशि जिलावार आवंटित कर दी है।
प्रशासनिक योजना के तहत, सभी 74 लाभार्थियों के लिए कुल 19 लाख 21 हजार 780 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसमें 22 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक के बकाया 9 दिनों के मानदेय को भी शामिल किया गया है। यह राशि सीधे कार्यकर्ताओं के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित होगी।
| परियोजना / जनसुविधा | डिपो / विभाग व लाभ |
|---|---|
| जींद जिला क्रेच सेवा | 10 कार्यकर्ताओं हेतु 2,59,700 रुपये आवंटित |
| रोहतक जिला क्रेच सेवा | 09 कार्यकर्ताओं हेतु बजट प्रावधान |
| नूंह जिला क्रेच सेवा | 08 कार्यकर्ताओं हेतु विशेष आवंटन |
| हिसार, पानीपत व सोनीपत | प्रत्येक जिले की 07 कार्यकर्ताओं को लाभ |
| कुल लाभार्थी (प्रदेश स्तर) | 74 क्रेच कार्यकर्ताओं को 19,900 रुपये मासिक |
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को मिलने वाला लाभ
क्रेच कार्यकर्ताओं के मानदेय में इस वृद्धि का सीधा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय नागरिकों, विशेषकर कामकाजी अभिभावकों पर पड़ेगा। जब जनसुविधा केंद्रों में कार्यरत कर्मचारी आर्थिक रूप से संतुष्ट और सुरक्षित होंगे, तो वे बच्चों की देखभाल और केंद्र के प्रबंधन में अधिक समर्पण के साथ कार्य कर सकेंगे। यह कदम सरकारी क्रेच केंद्रों की गुणवत्ता में सुधार लाएगा, जिससे शहरों में रहने वाले कामकाजी परिवारों को अपने बच्चों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित परिवेश मिल सकेगा।
इसके अतिरिक्त, यह निर्णय स्थानीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है। मानदेय में वृद्धि से न केवल इन 74 परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि यह अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा। प्रशासन का यह रुख स्पष्ट करता है कि जनसुविधाओं के सुचारू संचालन के लिए मानव संसाधन का सम्मान और उचित पारिश्रमिक अनिवार्य है।
प्रशासनिक समय-सीमा और जमीनी क्रियान्वयन
महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक सख्त समय-सीमा (Timeline) निर्धारित की है। जिला कार्यक्रम अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 10 नवंबर 2026 से पहले सभी पात्र याचिकाकर्ताओं को बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मानदेय बिना किसी महंगाई भत्ते (DA) के निर्धारित किया गया है, जो एक निश्चित और स्थिर आय सुनिश्चित करता है।
जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए संबंधित जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें सितंबर माह के बकाया 9 दिनों के 1,08,780 रुपये और अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 तक के लिए 18,13,000 रुपये के वितरण की निगरानी करने को कहा गया है। विभाग का यह अनुशासनात्मक रवैया यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी लाभ बिना किसी देरी के सीधे लाभार्थी तक पहुंचे।
शहरवासियों की प्रतिक्रिया और आगामी कदम
इस प्रशासनिक निर्णय का नागरिक समाज और स्थानीय संगठनों ने स्वागत किया है। शहरवासियों का मानना है कि बुनियादी जनसुविधाओं से जुड़े कर्मियों के हितों की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस कदम से सरकारी सेवाओं के प्रति आम जनता का विश्वास बढ़ा है। लोगों का कहना है कि भविष्य में अन्य जनसेवा क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए ताकि सार्वजनिक सेवाओं का स्तर निजी क्षेत्र के समकक्ष हो सके।
आगामी कदमों के रूप में, विभाग अब अन्य जिलों में भी क्रेच सेवाओं के विस्तार और वहां तैनात स्टाफ के युक्तिकरण पर विचार कर रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रदेश के हर जिले में आधुनिक सुविधाओं से लैस क्रेच केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां प्रशिक्षित और उचित मानदेय प्राप्त स्टाफ तैनात हो। यह दीर्घकालिक योजना हरियाणा के शहरी और ग्रामीण विकास के सामाजिक ढांचे को एक नई मजबूती प्रदान करेगी।





